भारत
ने यूरेशिया के प्रमुख देश तुर्की के साथ 11 समझौते
किये. ये सभी समझौते व्यापार, शोध, संचार,
एवं तकनीक के क्षेत्रों से संबंधित हैं. इन सभी समझौंतों का
उद्देश्य है लक्षित क्षेत्रों में सहकारिता को बढ़ावा देना. दोनो देशों के बीच
समझौते भारतीय राष्ट्रपति की 2 से 8 अक्टूबर
2013 के मध्य बेल्जियम एवं तुर्की की संयुक्त यात्रा के
दौरान किये गये.
बेल्जियम
नरेश फिलिप के निमंत्रण पर गये राष्ट्रपति अपनी यात्रा के दौरान सर्वप्रथम
बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स पहुंचे जहां उन्होंने दोनो देशों के मध्य व्यापार
बढ़ाने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा की.
अपनी यात्रा के दूसरे चरण में 5 अक्टूबर 2013 को राष्ट्रपति तुर्की की राजधानी अंकारा पहुंचे जहां उन्होंने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की स्थायी सदस्यता हेतु तुर्की से सहयोग मांगा. दूसरी ओर तुर्की के प्रधानमंत्री रिसेप तायिप इर्दोगन ने भारत से पाकिस्तान में स्थित आतंकी ढांचों को समाप्त करने हेतु समर्थन की मांग की.
अपनी यात्रा के दूसरे चरण में 5 अक्टूबर 2013 को राष्ट्रपति तुर्की की राजधानी अंकारा पहुंचे जहां उन्होंने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की स्थायी सदस्यता हेतु तुर्की से सहयोग मांगा. दूसरी ओर तुर्की के प्रधानमंत्री रिसेप तायिप इर्दोगन ने भारत से पाकिस्तान में स्थित आतंकी ढांचों को समाप्त करने हेतु समर्थन की मांग की.
राष्ट्रपति
प्रणब मुर्खजी तथा तुर्की के राष्ट्रपति अब्दुल्लाह गुल ने दोनो देशों के विभिन्न
विश्वविद्यालयों के बीच कई सहमति पत्रों पर भी हस्ताक्षर किये. इन विश्वविद्यालयो
में शामिल हैं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और
जामिया मिलिया विश्वविद्यालय.
अपनी
यात्रा से लौटने पर राष्ट्रपति ने कहा, “तुर्की
के प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के साथ हुई चर्चाओं के दौरान इस बात पर सहमति बनीं
कि आतंकवाद का कोई देश नहीं है, उसे सीमाओं का कोई सम्मान
नहीं है एवं आतंवाद का कोई धर्म नहीं है.”
विदित
हो कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेल्जियम यात्रा भारत के किसी भी राष्ट्रपति की
पहली बेल्जियम यात्रा थी.
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