राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शास्त्रीय तमिल के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार प्रदान किए-(10-OCT-2013) C.A

| Thursday, October 10, 2013
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2009-10 तथा वर्ष 2010-11 के लिए शास्त्रीय तमिल के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार  प्रदान किया. उन्होंने यह पुरस्कार नई दिल्ली में 9 अक्टूबर 2013 को प्रदान किया. 

वर्ष 2009-10 का शास्त्रीय तमिल में आजीवन उपलब्धि के लिए (लाइफटाइम एचीवमेंट) टॉकप्पियर पुरस्कार इरावथम महादेवन तथा वर्ष 2010-11 के लिए यह पुरस्कार प्रोफेसर तमिझानल पेरियाकरूप्पन को प्रदान किया गया. 

वर्ष 2009-10 तथा वर्ष 2010-11 के लिए कुरूल पीतम पुरस्कार क्रमश: जारोस्लॉ वासेक और जॉन रालस्टन को प्रदान किया गया.
 
तमिल भाषा के ऐसे युवा विद्वानों को भी पुरस्कृत किया गया जिन्होंने  शास्त्रीय तमिल में शिक्षण, अनुसंधान और प्रकाशन में श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया था. वर्ष 2009-10 के लिए डॉ. टी. सुरेश, डॉ. एस कल्पना, डॉ. आर चन्द्रशेखरन, डॉ. वाणी अरिवालन, डॉ. मुथामिझसेलवन को युवा विद्वान पुरस्कार से सम्मानित किया गया. जबकि 2010-11 के लिए डॉ. टी. संज्ञा, डॉ. ए. जयकुमार, डॉ. ए. मणि, डॉ. एस. चिदंबरम और डॉ. के. सुंदरापंडियन को पुरस्कार प्रदान किए गए.

शास्त्रीय तमिल के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार  
राष्ट्रपति के टोकापियार और कुरल पीदम पुरस्कार विजेताओं को प्रशस्ति पत्र और शॉल के साथ पांच लाख रूपये का नकद पुरस्कार और युवा वि़द्वान पुरस्कार विजेताओं को एक-एक लाख रूपये दिये जाते हैं. ये पुरस्कार भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तत्वाधान में कार्यरत केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्था द्वारा शुरू किए गए.




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