भारत
का व्यापार घाटा कम होकर सितंबर 2013 में 6 अरब 76 करोड़ डॉलर हो गया. इस अवधि में निर्यात 11.15
प्रतिशत की बढ़त लेकर 27 अरब 68 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया जबकि आयात 18 .1 प्रतिशत की
भारी कमी के साथ 34 अरब 40 करोड़ डॉलर
रहा. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने यह आंकड़े नई दिल्ली में 9 अक्टूबर 2013 को जारी किए.
सितंबर 2013 में व्यापार घाटा मार्च 2011 के बाद सबसे कम रहा. इस का मुख्य कारण सोने और तेल के आयात में आई कमी है. सितंबर 2013 में सोने और चांदी का आयात 80 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 80 करोड़ डॉलर रहा. सितंबर 2012 में यह 4 अरब 60 करोड़ डॉलर का रहा था. अप्रैल 2013 –सितंबर 2013 के दौरान तेल आयात 6 प्रतिशत घटकर 13 अरब 19 करोड़ डॉलर पर रहा. हालांकि इस अवधि में सोने चांदी का आयात 8.7 प्रतिशत बढ़कर 23 अरब 10 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया.
सितंबर 2013 में देश के निर्यात में 11.15 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि आयात में 18. प्रतिशत की कमी आई जिसके चलते व्यापार घाटा 30 महीने के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया. सितंबर 2013 में निर्यात बढ़कर 27 अरब 68 करोड़ रूपए हो गया जबकि आयात 34 अरब 40 करोड़ डॉलर रहे और व्यापार घाटा कम होकर 6 अरब 76 करोड़ डॉलर दर्ज हुआ.
विश्लेषण
सितंबर में सोने और चांदी के आयत में आयी कमी भारत के लिए उत्साहवर्धक है. देश का निर्यात दो अंकों में बढ़ा हैं और आयात में भी कमी हो रही है, इससे चालू खाते में जो छूट है. वह कम हो रही है. इसके अनेक लाभ हैं.
सितंबर 2013 में व्यापार घाटा मार्च 2011 के बाद सबसे कम रहा. इस का मुख्य कारण सोने और तेल के आयात में आई कमी है. सितंबर 2013 में सोने और चांदी का आयात 80 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 80 करोड़ डॉलर रहा. सितंबर 2012 में यह 4 अरब 60 करोड़ डॉलर का रहा था. अप्रैल 2013 –सितंबर 2013 के दौरान तेल आयात 6 प्रतिशत घटकर 13 अरब 19 करोड़ डॉलर पर रहा. हालांकि इस अवधि में सोने चांदी का आयात 8.7 प्रतिशत बढ़कर 23 अरब 10 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया.
सितंबर 2013 में देश के निर्यात में 11.15 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि आयात में 18. प्रतिशत की कमी आई जिसके चलते व्यापार घाटा 30 महीने के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया. सितंबर 2013 में निर्यात बढ़कर 27 अरब 68 करोड़ रूपए हो गया जबकि आयात 34 अरब 40 करोड़ डॉलर रहे और व्यापार घाटा कम होकर 6 अरब 76 करोड़ डॉलर दर्ज हुआ.
विश्लेषण
सितंबर में सोने और चांदी के आयत में आयी कमी भारत के लिए उत्साहवर्धक है. देश का निर्यात दो अंकों में बढ़ा हैं और आयात में भी कमी हो रही है, इससे चालू खाते में जो छूट है. वह कम हो रही है. इसके अनेक लाभ हैं.
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