भारतीय
भू-वैज्ञानिक सर्वे (जीएसआई) ने गहरे समुद्र में सर्वेक्षण और गहरे पानी में मौजूद
खनिज के उत्खनन के लिए 600 करोड़ रुपए के ‘समुद्र रत्नाकर’ (Samudra
Ratnakar) नामक जहाज 4 अक्टूबर 2013 को खरीदा.
‘समुद्र रत्नाकर’ से सम्बंधित तथ्य
• ‘समुद्र रत्नाकर’ की आपूर्ति दक्षिण कोरिया की कंपनी हुंडई हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा सितंबर 2013 में की गई. यह नवीनतम प्रौद्योगिकी उपकरणों से लैस है.
• जीएसआई ने गहरे समुद्र से आंकड़ों के संग्रह के लिए 50 वैज्ञानिकों को तैनात करने की योजना बनाई है.
• ‘समुद्र रत्नाकर’ को शामिल करने के साथ जीएसआई पहली बार सर्वेक्षण और उत्खनन के लिए गहरे समुद्र जल में प्रवेश करेगा.
• ‘समुद्र रत्नाकर’ की क्षमता 2700 डीडब्ल्यूटी है.
• इसे चेन्नई बंदरगाह पर तैनात किया जाएगा.
समुद्र रत्नाकर के रखरखाव, प्रबंधन एवं संचालन के लिए जीएसआई ने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के साथ एक समझौता किया. वर्तमान में, समुद्र रत्नाकर कांडला बंदरगाह पर है और इसे अक्टूबर 2013 के तीसरे सप्ताह में केन्द्रीय खनन मंत्री दिनशा पटेल द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया जाना है.
‘समुद्र रत्नाकर’ से सम्बंधित तथ्य
• ‘समुद्र रत्नाकर’ की आपूर्ति दक्षिण कोरिया की कंपनी हुंडई हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा सितंबर 2013 में की गई. यह नवीनतम प्रौद्योगिकी उपकरणों से लैस है.
• जीएसआई ने गहरे समुद्र से आंकड़ों के संग्रह के लिए 50 वैज्ञानिकों को तैनात करने की योजना बनाई है.
• ‘समुद्र रत्नाकर’ को शामिल करने के साथ जीएसआई पहली बार सर्वेक्षण और उत्खनन के लिए गहरे समुद्र जल में प्रवेश करेगा.
• ‘समुद्र रत्नाकर’ की क्षमता 2700 डीडब्ल्यूटी है.
• इसे चेन्नई बंदरगाह पर तैनात किया जाएगा.
समुद्र रत्नाकर के रखरखाव, प्रबंधन एवं संचालन के लिए जीएसआई ने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के साथ एक समझौता किया. वर्तमान में, समुद्र रत्नाकर कांडला बंदरगाह पर है और इसे अक्टूबर 2013 के तीसरे सप्ताह में केन्द्रीय खनन मंत्री दिनशा पटेल द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया जाना है.
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