प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली केन्द्रीय मंत्रिमण्डल ने
भारतीय राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण विधेयक (National Identification
Authority of India Bill) को 8 अक्टूबर 2013
को मंजूरी प्रदान की. यह कानून बनने से भारतीय विशिष्ट पहचान
प्राधिकरण को संवैधानिक दर्जा मिल जाएगा. विधेयक को नवंबर-दिसंबर में संसद के
शीतकालीन सत्र में पेश किये जाने की उम्मीद है.
भारतीय राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण विधेयक के मुख्य प्रावधान
यह विधेयक विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूनीक आइडेंटिफिकेशन ऑथरिटी आफ इंडिया,यूआईडीएआई) को वैधानिक दर्जा देने के अलावा आधार को कानूनी समर्थन प्रदान करने का प्रावधान करता है. आधार कार्ड, विभिन्न प्रकार की रियायतों को उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण है. इसमें भारतीय राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसकी निगरानी में आधार परियोजना लागू की जाएगी. परियोजना के तहत जो आंकड़े एकत्र किये जाएंगे, उसके गलत इस्तेमाल के सिलसिले में इस कानून के तहत सजा दिये जाने का भी प्रावधान है.
उद्देश्य
यूआईडी परियोजना का उद्देश्य उन लोगों को पहचान पत्र जारी कर समग्र विकास की प्रक्रिया से जोड़ना है, जिनके पास कोई पहचान नहीं है. पहचान मुहैया कराने के अलावा आधार नंबर सेवाओं की बेहतर आपूर्ति और प्रभावशाली प्रशासन भी सुनिश्चित करेगा. आधार नंबर भारत में रहने वाले लोगों को जारी किया जा रहा है.
आधार कार्ड
आधार (अंग्रेजी:AADHAAR), एक बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय पहचान पत्र परियोजना है, जिसे भारत सरकार द्वारा शुरु किया गया. आधार भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय पहचान पत्र कार्यक्रम का नया नाम है. आधार 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या है जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा.वि.प.प्रा.) सभी निवासियों के लिये जारी करता है. इस समय यह भारत सरकार के आदेश के तहत परिचालन रत है.
संख्या को केन्द्रीकृत डाटा बेस में संग्रहित किया जायेगा एवं प्रत्येक व्यक्ति की आधारभूत जनसांख्यिकीय एवं बायोमैट्रिक सूचना - फोटोग्राफ, दसों अंगुलियों के निशान एवं आंख की पुतली की छवि के साथ लिंक किया जायेगा. डाटा फील्ड एवं सत्यापन प्रक्रियाओं का विवरण यहां उपलब्ध है.
विदित हो कि भारतीय राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण विधेयक दिसंबर 2010 में राज्यसभा में पेश किया गया था और उसे वित्तीय मामलों पर संसद की एक स्थाई समिति के पास भेज दिया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट दिसंबर 2011 में सौंप दी थी.
भारतीय राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण विधेयक के मुख्य प्रावधान
यह विधेयक विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूनीक आइडेंटिफिकेशन ऑथरिटी आफ इंडिया,यूआईडीएआई) को वैधानिक दर्जा देने के अलावा आधार को कानूनी समर्थन प्रदान करने का प्रावधान करता है. आधार कार्ड, विभिन्न प्रकार की रियायतों को उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण है. इसमें भारतीय राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसकी निगरानी में आधार परियोजना लागू की जाएगी. परियोजना के तहत जो आंकड़े एकत्र किये जाएंगे, उसके गलत इस्तेमाल के सिलसिले में इस कानून के तहत सजा दिये जाने का भी प्रावधान है.
उद्देश्य
यूआईडी परियोजना का उद्देश्य उन लोगों को पहचान पत्र जारी कर समग्र विकास की प्रक्रिया से जोड़ना है, जिनके पास कोई पहचान नहीं है. पहचान मुहैया कराने के अलावा आधार नंबर सेवाओं की बेहतर आपूर्ति और प्रभावशाली प्रशासन भी सुनिश्चित करेगा. आधार नंबर भारत में रहने वाले लोगों को जारी किया जा रहा है.
आधार कार्ड
आधार (अंग्रेजी:AADHAAR), एक बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय पहचान पत्र परियोजना है, जिसे भारत सरकार द्वारा शुरु किया गया. आधार भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय पहचान पत्र कार्यक्रम का नया नाम है. आधार 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या है जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा.वि.प.प्रा.) सभी निवासियों के लिये जारी करता है. इस समय यह भारत सरकार के आदेश के तहत परिचालन रत है.
संख्या को केन्द्रीकृत डाटा बेस में संग्रहित किया जायेगा एवं प्रत्येक व्यक्ति की आधारभूत जनसांख्यिकीय एवं बायोमैट्रिक सूचना - फोटोग्राफ, दसों अंगुलियों के निशान एवं आंख की पुतली की छवि के साथ लिंक किया जायेगा. डाटा फील्ड एवं सत्यापन प्रक्रियाओं का विवरण यहां उपलब्ध है.
विदित हो कि भारतीय राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण विधेयक दिसंबर 2010 में राज्यसभा में पेश किया गया था और उसे वित्तीय मामलों पर संसद की एक स्थाई समिति के पास भेज दिया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट दिसंबर 2011 में सौंप दी थी.
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