भारत मारकेश संधि अपनाने वाला पहला देश बना-(02-AUG-2014) C.A

| Saturday, August 2, 2014
भारत 30 जून 2014 को मारकेश संधि को अपनाने वाला पहला देश बन गया ताकि वह नेत्रहीनों तक प्रकाशित सामग्री की पहुंच बना सके.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि दिलीप सिन्हा ने डब्ल्यूआईपीओ के महानिदेशक फ्रांसिस गुर्रे को अनुसमर्थन के साधन सौंपे. यह साधन डब्ल्यूआईपीओ के मुख्यालय में एससीसीआर (कॉपीराइट और संबंधित अधिकारों पर स्थायी समिति) के 28वें सत्र के समारोह के दौरान सौंपे गए.
मारकेश संधि औऱ इसके लक्ष्य
मारकेश संधि का उद्देश्य नेत्रहीन लोगों और प्रिंट विकलांगता वाले व्यक्तियों तक प्रकाशित काम को पहुंचाना है और इस पर 28 जून 2013 को मोरक्को के मारकेश में हस्ताक्षर किया गया था.
यह संधि झपकी, नेत्रहीनों और अन्य तरीके से प्रिंट विकलांगों (वीआईपी) के लाभ के लिए अनिवार्य सीमाओं और अपवादों को निर्धारित करने के लिए बनाया गया था. इस संधि पर 64 देशों ने हस्ताक्षर किए थे लेकिन सिर्फ भारत ने ही इसकी पुष्टि की है.
मारकेश संधि 20 देशों द्वारा अपनाए जाने के बाद ही अस्तित्व में आ पाएगा.
संधि के मुताबिक संपर्क दलों को राष्ट्रीय कानून प्रावधानों को अपनाना होगा जो वीआईपी के लिए  रिप्रोडक्शन, वितरण औऱ प्रकाशित कामों को सुलभ प्रारुपों जैसे कि ब्रेल में उपलब्ध कराएंगे. यह लाभार्थियों की सेवा करने वाले संगठनों द्वारा कामों को सीमा पार भी आदानप्रदान करने की सुविधा देता है.
मारकेश संधि के लाभ
·       मारकेश संधि लागू होने के बाद निम्न सुविधाएं प्रदान करेगा.
·       भारत में मौजूद अंधों, नेत्रहीनों और अन्य प्रिंट अक्षम लोगों में प्रकाशित काम की पहुंच बना सकेगा.
·       यह उनके लिए शिक्षा और रोजगार के समान अधिकार और अवसरों की स्थापना करेगा.
·       यह भारतीय अधिकृत इकाइयों जैसे शिक्षण संस्थानों, पुस्तकालयों और ऐसे ही अन्य संस्थानों जो इन नेत्रहीनों के लिए काम कर रहे हैं, को, सुलभ प्रारूप प्रतियों के आयात की सुविधा प्रदान करेगा.
·       यह आयातित सुलभ प्रारुप प्रतियों के अनुवाद और सुलभ प्रारूप प्रतियों का भारतीय भाषाओं में निर्यात की सुविधा भी देगा.
·       भारतीय कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम, 2012 ने मारकेश संधि के साथ सामंजस्य स्थापित किया है.
·       मारकेश संधि वर्ष 1994 में विश्व व्यापार संगठन की स्थापना के साथ भी जुड़ा है.


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