भारतीय
रिजर्व बैंक ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली में पूंजी प्रवाह (तरलता) को बढ़ाने की
दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मार्जिनल स्टैंडिंग फेसेलिटी (एमएसएफ,
Marginal Standing Facility, MSF) की दर को 0.5 फीसदी घटाकर 9 फीसदी कर दिया. आरबीआई ने इस संबंध
में 07 सितंबर 2013 को दिशा-निर्देश
जारी किये.
विदित
हो कि विभिन्न उद्योग संगठनों तथा वाणिज्यिक संस्थानों की ओर से बैंकिंग प्रणाली
में पूंजी प्रवाह को बढ़ाने हेतु आरबीआई की ओर कदम उठाये जाने की मांग की जा रही
थी. इसी दिशा में आरबीआई ने 20 सितंबर 2013
को भी एमएसएफ रेट को 10.25 फीसदी से घटाकर 9.5
फीसदी कर दिया था.
जबकि
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2013-14 की मध्य तिमाही की समीक्षा में
एमएसएफ दर को 2 फीसदी बढ़ाकर 10.25 फीसदी
कर दिया था. जिसके बाद से दर को घटाने की मांग जा रही थी.
एमएसएफ दर को घटाने के साथ ही साथ, आरबीआई ने बैंकों को अतिरिक्त तरलता उपलब्ध कराने हेतु 7 दिन तथा 14 दिन टर्म रेपो के माध्यम से पूंजी प्रवाह को प्रेरित करने का निर्णय लिया.
एमएसएफ दर को घटाने के साथ ही साथ, आरबीआई ने बैंकों को अतिरिक्त तरलता उपलब्ध कराने हेतु 7 दिन तथा 14 दिन टर्म रेपो के माध्यम से पूंजी प्रवाह को प्रेरित करने का निर्णय लिया.
मार्जिनल स्टैंडिंग फेसेलिटी (एमएसएफ,
Marginal Standing Facility, MSF)
एमएसएफ
दर वह दर है जिस पर बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से सरकारी प्रतिभूतियों के एवज में ऋण
लेते हैं. एमएसएफ के तहत बैंक ओवरनाइट आधार पर अपने अतिरिक्त सांविधिक तरलता
अनुपात (एसएलआर) के विरूद्ध पूंजी लेते हैं. एमएसएफ को भारतीय बैंकिंग प्रणाली में
9 मई 2011 से लागू किया गया था.
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