चलचित्र
अधिनियम, 1952 के तहत प्रमाणीकरण मुद्दों पर विचार
करने हेतु पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय की के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुदगल
अध्यक्षता में गठित अधिकृत समिति ने 09 अक्टूबर 2013 को अपनी रिपोर्ट भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को सौंप दी. इस
समिति का गठन 4 फरवरी 2013 को किया गया
था.
मुदगल
समिति ने अपनी रिपोर्ट में अश्लीलता और साम्प्रदायिक वैमनस्य, महिलाओं के चित्रण और सलाहकार मंडल जैसे मुद्दों के संबंध में
दिशा-निर्देश, वर्गीकरण, फिल्मों की
पायरेसी, अपीलीय पंचाट की न्याय सीमा तथा चलचित्र अधिनियम,
1952 के प्रावधानों की समीक्षा पर अपनी सिफारिशें दीं.
मुकुल मुदगल समिति
प्रमाणीकरण
तथा वर्गीकरण जैसे मुद्दों पर अपनी सिफारिशें देने के लिए गठित नौ सदस्यीय समिति
का कार्यकाल आठ महीने रहा. इसके अध्यक्ष मुकुल मुदगल अतिरिक्त इस समिति में निम्न
सदस्य थे –
उदय कुमार वर्मा, पूर्व सूचना एवं प्रसारण सचिव
ललित भसीन, एफसीएटी के अध्यक्ष
शर्मिला टैगौर, सीबीएफसी की पूर्व अध्यक्ष
जावेद अख्तर, गीतकार
लीला सैमसन, सीबीएफसी की अध्यक्ष
एल. सुरेश, भारतीय चलचित्र परिसंघ के पूर्व अध्यक्ष और दक्षिण भारतीय चलचित्र वाणिज्य परिसंघ के सचिव
रमीजा हाकिम, उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता
राघवेन्द्र सिंह, संयुक्त सूचना एवं प्रसारण सचिव (चलचित्र)
उदय कुमार वर्मा, पूर्व सूचना एवं प्रसारण सचिव
ललित भसीन, एफसीएटी के अध्यक्ष
शर्मिला टैगौर, सीबीएफसी की पूर्व अध्यक्ष
जावेद अख्तर, गीतकार
लीला सैमसन, सीबीएफसी की अध्यक्ष
एल. सुरेश, भारतीय चलचित्र परिसंघ के पूर्व अध्यक्ष और दक्षिण भारतीय चलचित्र वाणिज्य परिसंघ के सचिव
रमीजा हाकिम, उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता
राघवेन्द्र सिंह, संयुक्त सूचना एवं प्रसारण सचिव (चलचित्र)
1 comments:
धन्यवाद! अच्छा पोस्ट है।
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