उत्तरप्रदेश
के रायबरेली के लालगंज में देश का सबसे बड़ा रेल पहिया संयंत्र लगाने के लिए भारतीय
रेलवे ने राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के साथ एक समझौते पर 3 अक्टूबर 2013 को हस्ताक्षर किए.
समझौते पर रेलमंत्री मलिकार्जुन खड़गे और केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की उपस्थिति में हस्ताक्षर किये गये. इसी के साथ इस परियोजना के लिए 40 एकड़ जमीन लीज पर लेने के लिए राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) और भारतीय रेलवे के बीच एक और समझौता भी हुआ.
रेल पहिया संयंत्र
रेल पहिया संयंत्र रायबरेली के लालगंज में रेल कोच फैक्ट्री के पास 40 एकड़ क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा. रेल पहिया संयंत्र की स्थापना में 1100 करोड़ रूपये की लागत का अनुमान लगाया गया. यह संयंत्र अगले तीन वर्ष (2015) में शुरू हो जायेगी. पहले चरण में प्रतिवर्ष एक लाख पहियों का निर्माण करने का और दूसरे चरण में पहिया उत्पादन की क्षमता बढाकर 2 लाख प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य है.
इन पहियों का उपयोग इंजनों तथा तेज रफ्तार रेल गाडि़यों के लिए किया जाना है. यहां बनने वाले पहियों का परीक्षण तथा प्रमाणीकरण अमेरिका की प्रमाणीकरण एजेंसी टीटीसीआई करेगी.
आरआईएनएल, विशाखापत्तनम में जर्मन प्रौद्योगिकी से स्थापित किये जा रहे अत्याधुनिक तकनीक के नये कॉस्टर से पहिया संयंत्र को कॉस्ट राउंड्स की आपूर्ति करेगा.
लाभ
इस संयंत्र में 600 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार जबकि 2000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा.
स्वदेश निर्मित फोर्जड व्हील की आपूर्ति से भारतीय निर्माताओं और निर्यातों के लिए एक नया बाजार खुल जाएगा.
विदित हो कि रेल पहिया की मांग की आपूर्ति आयात के माध्यम से की जाती है.
समझौते पर रेलमंत्री मलिकार्जुन खड़गे और केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की उपस्थिति में हस्ताक्षर किये गये. इसी के साथ इस परियोजना के लिए 40 एकड़ जमीन लीज पर लेने के लिए राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) और भारतीय रेलवे के बीच एक और समझौता भी हुआ.
रेल पहिया संयंत्र
रेल पहिया संयंत्र रायबरेली के लालगंज में रेल कोच फैक्ट्री के पास 40 एकड़ क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा. रेल पहिया संयंत्र की स्थापना में 1100 करोड़ रूपये की लागत का अनुमान लगाया गया. यह संयंत्र अगले तीन वर्ष (2015) में शुरू हो जायेगी. पहले चरण में प्रतिवर्ष एक लाख पहियों का निर्माण करने का और दूसरे चरण में पहिया उत्पादन की क्षमता बढाकर 2 लाख प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य है.
इन पहियों का उपयोग इंजनों तथा तेज रफ्तार रेल गाडि़यों के लिए किया जाना है. यहां बनने वाले पहियों का परीक्षण तथा प्रमाणीकरण अमेरिका की प्रमाणीकरण एजेंसी टीटीसीआई करेगी.
आरआईएनएल, विशाखापत्तनम में जर्मन प्रौद्योगिकी से स्थापित किये जा रहे अत्याधुनिक तकनीक के नये कॉस्टर से पहिया संयंत्र को कॉस्ट राउंड्स की आपूर्ति करेगा.
लाभ
इस संयंत्र में 600 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार जबकि 2000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा.
स्वदेश निर्मित फोर्जड व्हील की आपूर्ति से भारतीय निर्माताओं और निर्यातों के लिए एक नया बाजार खुल जाएगा.
विदित हो कि रेल पहिया की मांग की आपूर्ति आयात के माध्यम से की जाती है.
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