राष्ट्रपति
प्रणब मुखर्जी ने नई दिल्ली में खादी मार्क का लोकार्पण 30 सितम्बर 2013 को किया. इस खादी मार्क की शुरूआत के
पश्चात किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा किसी खादी वस्त्र या उत्पाद की बिक्री,
बिना खादी मार्क टैग अथवा लेबल के नहीं की जानी है.
खादी मार्क का उद्देश्य
खादी
मार्क की शुरुआत का प्राथमिक उद्देश्य खादी को विशिष्ट स्थान दिलाना है और इससे
खादी की शुद्धता की गारंटी और उपभोक्ताओं में जागरूकता लाने के साथ-साथ खादी के
प्रचलन में भी वृद्धि आनी है. खादी को राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण में इस्तेमाल
होने वाले एक मात्र कपड़े के रूप में गौरव प्राप्त है.
विदित
हो कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भारत में खादी शुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए 22
जुलाई 2013 को खादी मार्क विनियमन 2013
को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया था. खादी और ग्रामोद्योग
आयोग (केवीआईसी) खादी के रूप में विक्रय किए जा रहे उत्पादों की शुद्धता की
निगरानी एवं इसे प्रमाणित करने का एक नोडल एजेंसी है.
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय खादी और ग्रामोद्योग आयोग के माध्यम से
जरूरतमंद पारंपरिक कारीगरों और उद्यमियों को ग्रामीण क्षेत्रों में 5000 संस्थाएं रोजगार उपलब्ध करा रही हैं, जिसमें 2300 संस्थाएं खादी के हित में काम कर रहीं हैं. इसके साथ ही प्रधानमंत्री
रोजगार और सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत 2.23 लाख
उद्यम की सहायता से लगभग 20.42 लाख व्यक्तियों के लिए रोजगार
सृजन किया जा रहा है.
खादी सुधार और विकास कार्यक्रम (केआरडीपी)
खादी
सुधार और विकास कार्यक्रम (केआरडीपी) के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा शुरू की गई 717
करोड़ रुपये धनराशि वाली सुधार पैकेज की सहायता से खादी क्षेत्र को बाजार
प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ इसे विकास की राह में शामिल करने में मदद भी
प्राप्त होनी है. इस सुधार पैकेज का वित्तियन एशियन डेवेलपमेंट बैंक द्वारा किया
गया. खादी सुधार और विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वर्तमान 300
खादी संस्थाओं को सीधे सहायता उपलब्ध कराई जानी है तथा 50 नई
खादी संस्थाओं का प्रबंधन उद्यमिता मॉडल के आधार पर किया जाना है. खादी और
ग्रामोउद्योग क्षेत्र में कारीगरों को उनकी जड़ों से विस्थापित किए बिना रोजगार
उपलब्ध कराने की क्षमता है.
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