असम में राइनो के अवैध शिकार की जांच हेतु डीएनए– आधारित प्रणाली ‘रोडिस’ का प्रयोग-(01-JUNE-2014) C.A

| Sunday, June 1, 2014
राइनो डीएनए इन्डेक्सिंग सिस्टम (रोडिस) को असम के वन अधिकारियों के सामने 27 मई 2014 को प्रदर्शित किया गया. इससे उन्हें असम में राइनो के अवैध शिकार को रोकने में मदद मिलेगी. इसे दक्षिण अफ्रीका के वन्यजीव विशेषज्ञ कैंडी हार्पर औऱ रोड पॉर्टर ने असम राज्य अभ्यारण्य में प्रदर्शित किया.
  
इसके अलावा हार्पर और पॉटर को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का दौरा करना है. जहां वे वन अधिकारियों को रोडिस के बारे में और अपराध स्थल की जांच में इसकी उपयोगिता के बारे में बताएंगें. 

रोडिस को इस्तेमाल करने का तरीका
रोडिस एक प्रकार का उपकरण है जिसमें एक डेटाबेस में हर एक राइनो का डीएनए प्रोफाइल बना होता है. यह डेटाबेस अभ्यारण्य़ के अधिकारी और सरकार राज्य में होने वाले राइनो के अवैध शिकार के मामले में कानूनी सबूत के तौर पर पेश कर सकते हैं.
 
रोडिस का इस्तेमाल अवैध शिकार करने वालों को दंड दिलाने में कानूनी सबूत के तौर पर इसलिए पेश किया जा सकता है क्योंकि अधिकांश मामलों में वे सबूतों के अभाव में बिना सजा पाए छूट जाते हैं. 

असम में रोडिस के कार्यान्वयन की योजना
असम राज्य सरकार निकट भविष्य में रोडिस को राज्य में शुरु करने की योजना बना रही है. सूदूर, अवैध शिकार किए गए और प्राकृतिक रूप से मरने वाले राइनो के डीएनए का डेटाबेस तैयार करने के लिए राज्य रोडिस को वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचरइंडिया के साथ मिलकर शुरु करेगा.

वर्ष 2013 में असम में करीब 41 राइनो का अवैध शिकार किया गया औऱ उनकी सींग निकाल ली गई जबकि इस वर्ष अभी तक 16 राइनो की हत्या की जा चुकी है. 

राइनो के अवैध शिकार का मुख्य कारण  उसके सींग का विभिन्न कामों यथा औषधि बनाने, में उपयोग किया जाना है. इसकी वजह से राइनो संरक्षण के प्रयासों में इनका अवैध शिकार प्रमुख चुनौती बनता जा रहा है. असम के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव वार्डन आर पी अग्रवाल के मुताबिक राइनो के सींगों की मांग सबसे ज्यादा चीन और वियतनाम में है.
 
एक अनुमान के मुताबिक असम में 2553 राइनो है जिनमें से 
काजीरंगा नेशनल पार्क में 2329 
राजीव गांधी ओरांग नेशनल पार्क में 100 
पोबित्रा वन्यजीव अभ्यारण्य में 93 
मानस नेशनल पार्क में 31 

रोडिस के बारे में
राइनो डीएनए इंडेक्सिंग सिस्टम को राइनो के अवैध शिकार की जांच और संदिग्धों पर मुकदमा चलाने के लिए दक्षिण अफ्रीका में विकसित किया गया है. 

रोडिस के इस्तेमाल से दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों को राइनो के अवैध शिकार करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोहों को पकड़ने में मदद मिली है. उस गिरोह के खिलाफ सजा के प्रभावी अभियोजन का कदम भी उठाया गया है. 

करीब 5000 राइनो के डीएनए डेटाबेस यूनिवर्सिटी ऑफ प्रीटोरिया के वेटनरी जेनेटिक्स लैबोरेट्री ने इक्ट्ठा किया और दक्षिण एवं पूर्वी अफ्रीकी क्षेत्र में 400 से अधिक मामलों की जांच में मदद की.

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