भारत और फ़्रांस ने 8 जनवरी 2016 को आठ दिवसीय आतंकवाद विरोधी संयुक्त सैन्य अभ्यास शक्ति-2016 राजस्थान में आरंभ किया. इसका आयोजन राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में किया जा रहा है.
भारत-फ्रांस संयुक्त आतंकवाद निरोधक अभ्यास एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे दोनों देशों की सेनाओं को संयुक्त रूप से प्रशिक्षण और अति अहम ऑपरेशनल अनुभव प्राप्त होगा.
• फ़्रांस की सातवीं आर्म्ड ब्रिगेड की 35वीं इंफेन्ट्री रेजीमेन्ट के 56 सैनिकों के दल का नेतृत्व मेजर थीबू ड्यूलैकॉस्ट लाहेमॉंड्यू कर रहे हैं. इस सैन्य टुकड़ी ने अफगान युद्ध में भी भाग लिया था.
• भारतीय सैन्य दल में सप्त शक्ति कमांड के अधीन द्वितीय गढ़वाल राइफल्स को इस युद्धाभ्यास के लिए नियुक्त किया गया है.
• इस अभ्यास के लिए इस यूनिट ने कठिन प्रशिक्षण लिया है जिसमें फायरिंग, सामरिक आपरेशन व हैली-बोर्न संचालन आदि शामिल हैं.
• इस यूनिट को अच्छे सेना आदेश व अनुशासन का पालन करने, आतंकवाद पर काबू रखने और उत्तरी इलाके की सीमा में शांति बनाए रखने के लिए एक बार सेनाध्यक्ष यूनिट प्रशंसा पत्र और दो बार जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ उत्तरी कमान यूनिट प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया जा चुका है.
भारत-फ्रांस संयुक्त आतंकवाद निरोधक अभ्यास एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे दोनों देशों की सेनाओं को संयुक्त रूप से प्रशिक्षण और अति अहम ऑपरेशनल अनुभव प्राप्त होगा.
• फ़्रांस की सातवीं आर्म्ड ब्रिगेड की 35वीं इंफेन्ट्री रेजीमेन्ट के 56 सैनिकों के दल का नेतृत्व मेजर थीबू ड्यूलैकॉस्ट लाहेमॉंड्यू कर रहे हैं. इस सैन्य टुकड़ी ने अफगान युद्ध में भी भाग लिया था.
• भारतीय सैन्य दल में सप्त शक्ति कमांड के अधीन द्वितीय गढ़वाल राइफल्स को इस युद्धाभ्यास के लिए नियुक्त किया गया है.
• इस अभ्यास के लिए इस यूनिट ने कठिन प्रशिक्षण लिया है जिसमें फायरिंग, सामरिक आपरेशन व हैली-बोर्न संचालन आदि शामिल हैं.
• इस यूनिट को अच्छे सेना आदेश व अनुशासन का पालन करने, आतंकवाद पर काबू रखने और उत्तरी इलाके की सीमा में शांति बनाए रखने के लिए एक बार सेनाध्यक्ष यूनिट प्रशंसा पत्र और दो बार जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ उत्तरी कमान यूनिट प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया जा चुका है.
35 वीं फ्रेंच इन्फेंट्री रेजिमेंट
यह 35वीं इन्फेंट्री रेजिमेंट 1604 में लोरेन के सदस्य नेमोंद द्वारा स्थापित की गयी थी. इन्हें 12 युद्धों में विजय प्राप्त करने का श्रेय हासिल है. इस बटालियन ने अल्जीरिया, अफ्रीका, इराक एवं अफगानिस्तान में युद्ध में भाग लिया है.
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इसका उपनाम एस डी ट्रेफल था. वर्तमान में यह बेलफोर्ट नामक स्थान पर मौजूद सैन्य स्थल पर तैनात है.
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