जनवरी 2015 के पहले सप्ताह
में भूतपूर्व सचिव टी एस आर सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता वाली उच्च– स्तरीय समिति (एचएलसी) चर्चे में रही. इस समिति ने पर्यावरण परियोजनाओं के
लिए एकल खिड़की मंजूरी तंत्र का सुझाव दिया है.
चार सदस्यों के इस उच्च– स्तरीय समिति
(एचएलसी) का गठन केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरणीय
कानूनों की समीक्षा के लिए किया था.
समिति ने छह पर्यावरण कानूनों के अध्ययन के बाद अपनी
सिफारिशों के साथ रिपोर्ट सौंपी है. कुछ सिफारिशें इस प्रकार हैं–
·
समय बद्ध तरीके से परियोजना
क्लीयरेंस के मूल्यांकन के लिए समिति ने राज्य पर्यावरणीय प्रबंधन प्राधिकरण
(एसईएमए) और राष्ट्रीय पर्यावरण प्रबंधन प्राधिकरण (एनईएमए) नाम से पूर्ण कालिक
विशेषज्ञ निकाय स्थापित करने का सुझाव दिया जो हरित क्लीयरेंस के लिए आने वाले
आवेदनों पर गौर करने वाले निर्णायक अधिकारी होंगे. मौजूदा केंद्रीय प्रदूषण
नियंत्रण बोर्ड औऱ संबंधित राज्य एजेंसियां इन एजेंसियों के अधीन कर दी जाएंगी.
·
समुदाय को बड़े पैमाने पर लाभ
पहुंचाने के साथ– साथ ऊर्जा एवं खनन परियोजनाओं और
राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के लिए समिति ने रेखीय परियोजनाओं के लिए फास्ट
ट्रैकिंग प्रक्रिया अपनाने की सिफारिश की है.
·
राष्ट्रीय जीआईएस सक्षम पर्यावरणीय
सूचना डाटाबेस का प्रयोग करना जो परियोजना प्रस्तावक और छानबीन एजेंसी दोनों ही को
आवेदन पर फैसला करने में मदद के लिए महत्वपूर्ण प्रमाणिक आंकड़ा प्राप्त करने में
सहयोग करेगा.
पर्यावरण परियोजनाओं का क्लीयरेंस प्राप्त करने में
कॉरपोरेट शॉट कर्ट्स का प्रयोग करते हैं. इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए ये
सिफारिशें समिति ने सुझाया है.
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