नेक्स्ट चाइना -इंडिया
वॉर: वर्ल्डस फर्स्ट वाटर वॉर 2029: जनरल
एस पद्मनाभन
जनरल सुंदरराजन पद्मनाभनद्वारा लिखित ‘नेक्स्ट चाइना-इंडिया वॉर -वर्ल्डस फर्स्ट वाटर वॉर 2029’ शीर्षक नामक पुस्तक अक्टूबर 2014 में जारी की गयी. ब्रह्मपुत्र पर चीन तीन और बांध बनाना चाहता है जिसको लेकर भारत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. एक बांध तो भारत को सूचना दिए बगैर ही बनाया जा रहा है इस पुस्तक में इन्ही चिंताओं को इंगित किया गया है.
जनरल सुंदरराजन पद्मनाभनद्वारा लिखित ‘नेक्स्ट चाइना-इंडिया वॉर -वर्ल्डस फर्स्ट वाटर वॉर 2029’ शीर्षक नामक पुस्तक अक्टूबर 2014 में जारी की गयी. ब्रह्मपुत्र पर चीन तीन और बांध बनाना चाहता है जिसको लेकर भारत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. एक बांध तो भारत को सूचना दिए बगैर ही बनाया जा रहा है इस पुस्तक में इन्ही चिंताओं को इंगित किया गया है.
भारत का मानना है कि ऐसे बांध बनने से नदी के उसके तरफ आ रहे जल
प्रवाह पर असर पड़ेगा. जबकि चीन ने कहा है कि उसके बांध रिवर प्रोजेक्ट के तहत बन
रहे हैं, जो जल प्रवाह को प्रभावित नहीं करेंगे.भारत
ने जल विवाद को दूर करने के लिए आपसी सहयोग और विश्वास की प्रक्रिया पर जोर दिया.
भारत चाहता है ऐसे विवाद के लिए जल आयोग या अंतर सरकारी वार्तालाप जरूरी
है.वर्तमान में दोनों देश विशेषज्ञ स्तर प्रक्रिया (ईएलएम) के तहत बाढ़ के दौरान
सिर्फ हायड्रोलाजिकल इंफार्मेशन जैसे जल स्तर, जल बहाव और
वर्षा का स्तर एक दूसरे को सूचित करते हैं.किताब में भविष्यवाणी की गयी है की
दोनों देश ब्रह्मपुत्र नदी पर संघर्ष करेंगे.
पुस्तक में लेखकने यह भी भविष्यवाणी की है कि भारत की कार्रवाई के जवाब में चीन द्वारा परमाणु हथियारों का उपयोग करने का खतरा पैदा हो जाएगा.
सुंदरराजन पद्मनाभन
सुंदरराजन पद्मनाभन वर्ष 2000 में भारतीय सेना के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल वेद प्रकाश मलिक के उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किये गए थे और जनरल निर्मल चन्द्र विज उनके उत्तराधिकारी बने.
थलसेना प्रमुख के रूप में जनरल सुंदरराजन पद्मनाभन ने 30 सितम्बर 2000 को अपना पदभार ग्रहण किया था. जनरल पद्मनाभन तीनों सेनाध्यक्षों की संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन भी रहे हैं और थल सेनाध्यक्ष के पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद वह इस दायित्व से मुक्त हुए थे.
थल सेनाध्यक्ष सैन्य हलकों में ' पैडी ' के नाम से लोकप्रिय रहे हैं. इससे पहले वह थलसेना मुख्यालय में सैन्य गुप्तचर के प्रमुख और कश्मीर घाटी में 15 कोर के कमांडर भी रह चुके हैं. उनके कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ कई सफलताएं मिली हैं.
संसद पर हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए थे. पाकिस्तान द्वारा हमले को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की करतूत बताने के बाद दोनों देशों के बीच का कूटनीतिक तनाव, सैन्य तनाव में बदल गया था. पाक पर दबाव बनाने के लिए भारत ने ऑपरेशन पराक्रम के तहत दस महीने तक अपनी फौज पंजाब से लेकर जम्मू-कश्मीर सीमा पर तैनात रखी.उस समय ऑपेरशन पराकर्म के माध्यम से कार्रवाई करने का प्रस्ताव था किन्तु बाद में उसे स्थगित कर दिया गया था. सुंदरराजन पद्मनाभन उस समय थल सेना अध्यक्ष थे.
पुस्तक में लेखकने यह भी भविष्यवाणी की है कि भारत की कार्रवाई के जवाब में चीन द्वारा परमाणु हथियारों का उपयोग करने का खतरा पैदा हो जाएगा.
सुंदरराजन पद्मनाभन
सुंदरराजन पद्मनाभन वर्ष 2000 में भारतीय सेना के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल वेद प्रकाश मलिक के उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किये गए थे और जनरल निर्मल चन्द्र विज उनके उत्तराधिकारी बने.
थलसेना प्रमुख के रूप में जनरल सुंदरराजन पद्मनाभन ने 30 सितम्बर 2000 को अपना पदभार ग्रहण किया था. जनरल पद्मनाभन तीनों सेनाध्यक्षों की संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन भी रहे हैं और थल सेनाध्यक्ष के पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद वह इस दायित्व से मुक्त हुए थे.
थल सेनाध्यक्ष सैन्य हलकों में ' पैडी ' के नाम से लोकप्रिय रहे हैं. इससे पहले वह थलसेना मुख्यालय में सैन्य गुप्तचर के प्रमुख और कश्मीर घाटी में 15 कोर के कमांडर भी रह चुके हैं. उनके कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ कई सफलताएं मिली हैं.
संसद पर हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए थे. पाकिस्तान द्वारा हमले को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की करतूत बताने के बाद दोनों देशों के बीच का कूटनीतिक तनाव, सैन्य तनाव में बदल गया था. पाक पर दबाव बनाने के लिए भारत ने ऑपरेशन पराक्रम के तहत दस महीने तक अपनी फौज पंजाब से लेकर जम्मू-कश्मीर सीमा पर तैनात रखी.उस समय ऑपेरशन पराकर्म के माध्यम से कार्रवाई करने का प्रस्ताव था किन्तु बाद में उसे स्थगित कर दिया गया था. सुंदरराजन पद्मनाभन उस समय थल सेना अध्यक्ष थे.
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