आरबीआई ने सितंबर 2013 तिमाही में भारत की अंतरराष्ट्रीय निवेश स्थिति संबंधी आकड़े जारी किये-(10-JAN-2014) C.A

| Friday, January 10, 2014
भारतीय रिजर्व बैंक ने सितंबर 2013 में समाप्त तिमाही में अंतरराष्ट्रीय निवेश स्थिति (आईआईपी) से संबंधित सांख्यिकीय आंकड़े 30 दिसंबर 2013 को जारी किये. इन आंकड़ों के अनुसार, एक अर्थव्यवस्था के निवासियों की वित्तीय परिसंपत्तियां, जिसमें गैरनागरिक और स्वर्ण भण्डार शामिल होते हैं, वे सभी रिजर्व परिसंपत्तियां हैं. साथ ही, किसी अर्थव्यवस्था के नागरिकों की गैर-नागरिकों के प्रति देनदारियों पर निर्भरता होती है.
किसी अर्थव्यवस्था की बाहरी वित्तीय परिसंपत्तियों और देनदारियों के बीच के अंतर को निवल आईआईपी कहा जाता है. इस प्रकार (आईआईपी) का बैलेंस शीट अंतरराष्ट्रीय खातों का वह विश्लेषण है, जिससे अर्थव्यवस्था के बाहरी क्षेत्रों की स्थिरता और जोखिम को समझने में मदद मिलती है.
सितंबर 2013 में समाप्त हुए तिमाही के आईआईपी की महत्वपूर्ण बातें:-
•    भारत पर गैरनिवासियों का निवल दावा (जैसा कि शुद्ध आईआईपी से पता चलता है), पिछले तिमाही के 296.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर से घटकर सितंबर 2013 में समाप्त हुए तिमाही में 12.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया.

•    निवल स्थिति में यह बदलाव भारत में विदेशी स्वामित्व वाली आस्तियों के मूल्य में 10.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कमी के साथ विदेशों में भारतीय निवासियों के वित्तीय आस्तियों के मूल्य में 2.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि को दर्शाता है.

•    भारतीय निवासियों की विदेशों में वित्तीय संपत्ति सितंबर 2013 के आखिर में 436.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर थीं, जिसमें पिछली तिमाही से 2.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मामूली बढ़त दर्ज की गई.

•    कुल 6.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी खासतौर से विदेशों में दूसरे निवेशों जैसे व्यापार ऋण, ऋण और मुद्रा एवं जमाओं के कारण हुई. रिजर्व संपत्ति सितंबर 2013 के आखिर में 5.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर घटकर 277.2 बिलियन ही रह गई. प्रत्यक्ष निवेशमें में 0.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मामूली बढ़त हुई.

•    सितंबर 2013 के आखिर में भारत में विदेशी स्वामित्व वाली संपत्ति पिछली तिमाही की तुलना में  10.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कमी के साथ 732.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गई.

•    भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 2.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कमी और भारत में पोर्टफोलियो निवेश में 13.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कमी दर्ज की गई.

•    अन्य निवेश देनदारियों में व्यापार ऋण में 1.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कमी और ऋणों में 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी हुई.

•    रुपये की कीमत में गिरावट का प्रभावः रुपये और अन्य मुद्राओं के विनिमय दर में बदलाव ने अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में मूल्यांकन के समय देनदारियों में परिवर्तन को प्रभावित किया. हालांकि, इस अवधि के दौरान 6.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का शुद्ध आगमन था. अमेरिकी डॉलर में इक्विटी देनदारियां जून 2013 में 340.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर से रुपये के मूल्य में हुए ह्रास से शेयर मूल्यांकन प्रभाव के कारण 10.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर घटकर सितंबर 2013 में 330.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गईं.

•    बाहरी वित्तीय परिसंपत्तियां और देनदारियों का संयोजनः सितंबर 2013 में भारत के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय परिसंपत्तियों में रिजर्व संपत्तियां प्रमुख रहीं (63.5%), इसके बाद विदेश में प्रत्यक्ष निवेश  (27.5%) था. प्रत्यक्ष निवेश (29.6%), पोर्टफोलियो निवेश (23.1%), ऋण ( मुख्यतऋ ईसीबी– 23.1%), व्यापार ऋण ( 12.2%) और मुद्रा एवं जमा (10.3%) देश की वित्तीय देनदारियों के प्रमुख घटक थे.


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