भारत ने स्वदेश में निर्मित जमीन से जमीन पर मार करने वाले
प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी-2 का सफल परीक्षण 7
जनवरी 2014 को किया. परमाणु हथियार ले जाने
में सक्षम पृथ्वी-2 प्रक्षेपास्त्र ओड़िशा के बालेश्वर जिले
में चांदीपुर के पास समुद्र में स्थित एकीकृत परीक्षण केन्द्र से सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर छोड़ा गया. भारतीय सेना की
स्ट्रेटेजिक फोर्स कमाण्ड ने तैयारी अभ्यास के तहत यह परीक्षण किया. प्रक्षेपण
गतिवधियों की पूरी निगरानी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के वैज्ञानिकों ने की.
मिसाइल पृथ्वी-2 की मुख्य विशेषताएं
• पृथ्वी-2 भारत के प्रतिष्ठित एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) के तहत विकसित की गई पहली मिसाइल है.
• यह मिसाइल 500 से 1000 किलोग्राम आयुध ले जाने में सक्षम है.
• यह तरल ईंधन वाले दो इंजनों से संचालित होती है.
• इसे सही पथ पर ले जाने के लिए एक उन्नत निर्देशित प्रणाली इसमें लगी है.
• इसकी मारक क्षमता 350 किलोमीटर है.
• डीआरडीओ द्वारा विकसित पृथ्वी-2 मिसाइल को पहले ही भरतीय सैन्य बलों में शामिल किया जा चुका है.
विदित हो कि पृथ्वी-2 मिसाइल का पिछले चार महीने में यह चौथा सफल परीक्षण है. इससे पहले सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल का 7 और 8 अक्टूबर 2013 तथा 3 दिसंबर 2013 को परीक्षण किया गया था.
वर्ष 2003 में भारत के सामरिक बल कमान में शामिल किया गया पृथ्वी-दो प्रक्षेपास्त्र का विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा भारत के समन्वित निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) के तहत किया गया है जो कि अब एक प्रमाणिक प्रौद्योगिकी है. इसी तरह का प्रक्षेपास्त्र धनुष भारतीय नौसेना में शामिल किया जा चुका है.
मिसाइल पृथ्वी-2 की मुख्य विशेषताएं
• पृथ्वी-2 भारत के प्रतिष्ठित एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) के तहत विकसित की गई पहली मिसाइल है.
• यह मिसाइल 500 से 1000 किलोग्राम आयुध ले जाने में सक्षम है.
• यह तरल ईंधन वाले दो इंजनों से संचालित होती है.
• इसे सही पथ पर ले जाने के लिए एक उन्नत निर्देशित प्रणाली इसमें लगी है.
• इसकी मारक क्षमता 350 किलोमीटर है.
• डीआरडीओ द्वारा विकसित पृथ्वी-2 मिसाइल को पहले ही भरतीय सैन्य बलों में शामिल किया जा चुका है.
विदित हो कि पृथ्वी-2 मिसाइल का पिछले चार महीने में यह चौथा सफल परीक्षण है. इससे पहले सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल का 7 और 8 अक्टूबर 2013 तथा 3 दिसंबर 2013 को परीक्षण किया गया था.
वर्ष 2003 में भारत के सामरिक बल कमान में शामिल किया गया पृथ्वी-दो प्रक्षेपास्त्र का विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा भारत के समन्वित निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) के तहत किया गया है जो कि अब एक प्रमाणिक प्रौद्योगिकी है. इसी तरह का प्रक्षेपास्त्र धनुष भारतीय नौसेना में शामिल किया जा चुका है.
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