औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी, डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन) ने नॉन-कंपीट क्लॉज के
प्रयोग पर 8 जनवरी 2014 को रोक लगा दी.
इस प्रेस नोट द्वारा ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों ही परियोजनाओं के लिए
नॉन-कंपीट क्लॉज के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई. विभाग के इस कार्रवाई को
प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है.
डीआईपीपी ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की नीति को बरकरार रखा. इस नोट में यह स्पष्ट किया गया है कि नॉन-कंपीट क्लॉज विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी के साथ सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही मान्य होंगे. इसका मतलब है कि भारतीय दवा कंपनियों में विदेशी निवेशक अब इन कंपनियों के प्रमोटरों के साथ ज्यादातर स्थितियों में अपूर्ण समझौते नहीं कर पाएंगे.
एफडीआई नीति ग्रीनफील्ड (स्वत: मंजूरी मार्ग) और ब्राउनफिल्ड (मंजूरी मार्ग) दोनों ही दवा परियोजनाओं में शत–प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देती है. हालांकि ब्राउनफिल्ड परियोजनाओं को अनुमोदन देते समय अभी भी कुछ शर्तें हैं.
नवंबर 2013 में डीआईपीपी ने महत्वपूर्ण दवा कार्यक्षेत्रों में एफडीआई को 100% से घटा कर 49% करने का प्रस्ताव दिया था. यह प्रस्ताव डीआईपीपी ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर हो रहे भारतीय दवा कंपनियों के अधिग्रहण की वजह से दिया था. बड़े पैमाने पर होने वाले ये अधिग्रहण देश में सामान्य दवाओं की उपलब्धता और उसके मूल्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं. लेकिन यह प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खारिज कर दिया और एफडीआई नीति का प्रयोग करने का फैसला किया. हालांकि मंत्रिमंडल ने अतिरिक्त शर्त लगाते हुए ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में नॉन-कंपीट क्लॉज पर होने वाली आपसी समझौते की अनुमति नहीं दी.
नॉन-कंपीट क्लॉज
नॉन-कंपीट क्लॉज विलय – अधिग्रहण का स्टैंडर्ड फीचर है. यह क्लाज एक पार्टी को निश्चित अवधि में रोजगार की समाप्ति या व्यापार बिक्री के समापन के बाद व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा पर रोक लगाती है. जैसे, जब अब्बोट्ट लेबोरेटरीज ने पीरामल हेल्थकेयर के डोमेस्टिक फॉर्म्यूलेशंस बिजनेस का अधिग्रहण किया तब उसने 8 वर्ष का नॉन-कंपीट समझौता किया था. समझौते के मुताबिक पीरामल हेल्थकेयर के प्रोमोटर्स अगले 8 वर्ष के लिए इस व्यापार में काम नहीं कर सकते थे. निश्चित अवधि की यह समय सीमा अलग– अलग समझौते के लिए अलग–अलग हो सकता है.
नॉन-कंपीट क्लॉज के अन्य उदाहरण
• दाइची सैंकियो ने 2008 में नॉन– कंपीट समझौते के तहत 2 वर्ष के लिए रैनबैक्सी का अधिग्रहण किया था.
• मेयलान ने 2013 में नॉन– कंपीट समझौते के तहत 4 वर्ष के लिए एजिला स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड का अधिग्रहण किया था.
डीआईपीपी ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की नीति को बरकरार रखा. इस नोट में यह स्पष्ट किया गया है कि नॉन-कंपीट क्लॉज विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी के साथ सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही मान्य होंगे. इसका मतलब है कि भारतीय दवा कंपनियों में विदेशी निवेशक अब इन कंपनियों के प्रमोटरों के साथ ज्यादातर स्थितियों में अपूर्ण समझौते नहीं कर पाएंगे.
एफडीआई नीति ग्रीनफील्ड (स्वत: मंजूरी मार्ग) और ब्राउनफिल्ड (मंजूरी मार्ग) दोनों ही दवा परियोजनाओं में शत–प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देती है. हालांकि ब्राउनफिल्ड परियोजनाओं को अनुमोदन देते समय अभी भी कुछ शर्तें हैं.
नवंबर 2013 में डीआईपीपी ने महत्वपूर्ण दवा कार्यक्षेत्रों में एफडीआई को 100% से घटा कर 49% करने का प्रस्ताव दिया था. यह प्रस्ताव डीआईपीपी ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर हो रहे भारतीय दवा कंपनियों के अधिग्रहण की वजह से दिया था. बड़े पैमाने पर होने वाले ये अधिग्रहण देश में सामान्य दवाओं की उपलब्धता और उसके मूल्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं. लेकिन यह प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खारिज कर दिया और एफडीआई नीति का प्रयोग करने का फैसला किया. हालांकि मंत्रिमंडल ने अतिरिक्त शर्त लगाते हुए ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में नॉन-कंपीट क्लॉज पर होने वाली आपसी समझौते की अनुमति नहीं दी.
नॉन-कंपीट क्लॉज
नॉन-कंपीट क्लॉज विलय – अधिग्रहण का स्टैंडर्ड फीचर है. यह क्लाज एक पार्टी को निश्चित अवधि में रोजगार की समाप्ति या व्यापार बिक्री के समापन के बाद व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा पर रोक लगाती है. जैसे, जब अब्बोट्ट लेबोरेटरीज ने पीरामल हेल्थकेयर के डोमेस्टिक फॉर्म्यूलेशंस बिजनेस का अधिग्रहण किया तब उसने 8 वर्ष का नॉन-कंपीट समझौता किया था. समझौते के मुताबिक पीरामल हेल्थकेयर के प्रोमोटर्स अगले 8 वर्ष के लिए इस व्यापार में काम नहीं कर सकते थे. निश्चित अवधि की यह समय सीमा अलग– अलग समझौते के लिए अलग–अलग हो सकता है.
नॉन-कंपीट क्लॉज के अन्य उदाहरण
• दाइची सैंकियो ने 2008 में नॉन– कंपीट समझौते के तहत 2 वर्ष के लिए रैनबैक्सी का अधिग्रहण किया था.
• मेयलान ने 2013 में नॉन– कंपीट समझौते के तहत 4 वर्ष के लिए एजिला स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड का अधिग्रहण किया था.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नोट विदेशी निवेशकों के लिए भ्रामक है. उनका मानना है कि ब्राउनफील्ड परियोजनाओं के लिए और अधिक स्पष्ट दिशा– निर्देश जारी किए जाने की जरूरत है.
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