ग्रे हाय्पोकोलिअस (हाय्पोकोलिअस एम्पेलिनुस),एक दुर्लभ पक्षी को मुंबई के दो पेशेवर और शौकिया बर्ड वॉचर द्वारा देखा
गया. कुणाल मुन्सिफ और नौशेरवां सेठना ने 26 फ़रवरी 2015
को गुजरात के जामनगर इलाके के नज़दीक मरीन राष्ट्रीय उद्यान में
पक्षी की तस्वीरों को कैमरे में कैद किया.
मुन्सिफ और सेठना द्वारा इस पक्षी पर किये गए निष्कर्षों को बॉम्बे
नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) के समक्ष प्रस्तुत करने के बाद बीएनएचएस
द्वारा प्रकाशित किया गया.
ग्रे हाय्पोकोलिअस एक छोटी गौरैया प्रजाति का पक्षी है तथा यह जीनस हाय्पोकोलिअस श्रेणी का एकमात्र सदस्य है जिसे हाय्पोकोलिअस परिवार में रखा गया है.
दिखने में पतला तथा लंबी पूंछ वाला यह पक्षी उत्तरी अफ्रीका, अरब (ईरान, इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, तुर्कमेनिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, और यमन) अफगानिस्तान, पाकिस्तान और पश्चिमी भारत के शुष्क अर्द्ध रेगिस्तान क्षेत्र में पाया जाता है.
यह एक प्रवासी पक्षी है जो आम तौर पर सर्दियों में दक्षिण की ओर पलायन करता है. इसका मुख्य आहार फल हैं.
पक्षी आईयूसीएन की संकटग्रस्त प्रजाति की लाल सूची में उन पक्षियों में शामिल है जिन पर सबसे कम ध्यान दिया जा रहा है.
ग्रे हाय्पोकोलिअस एक छोटी गौरैया प्रजाति का पक्षी है तथा यह जीनस हाय्पोकोलिअस श्रेणी का एकमात्र सदस्य है जिसे हाय्पोकोलिअस परिवार में रखा गया है.
दिखने में पतला तथा लंबी पूंछ वाला यह पक्षी उत्तरी अफ्रीका, अरब (ईरान, इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, तुर्कमेनिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, और यमन) अफगानिस्तान, पाकिस्तान और पश्चिमी भारत के शुष्क अर्द्ध रेगिस्तान क्षेत्र में पाया जाता है.
यह एक प्रवासी पक्षी है जो आम तौर पर सर्दियों में दक्षिण की ओर पलायन करता है. इसका मुख्य आहार फल हैं.
पक्षी आईयूसीएन की संकटग्रस्त प्रजाति की लाल सूची में उन पक्षियों में शामिल है जिन पर सबसे कम ध्यान दिया जा रहा है.
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