कोलोराडो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के एक दल ने मंगल ग्रह पर एक प्राचीन झील की उपस्थिति के प्रमाण की खोज की है. शोध को ‘लेट स्टेज ऑफ़ मार्टियन क्लोराइड साल्ट्स थ्रू पोंडिंग एंड एवापोरेशन’ शीर्षक सहित पत्रिका जियोलॉजी में 5 अगस्त 2015 को प्रकाशित किया गया.
शोध के अनुसार, मंगल ग्रह के सैंकड़ों स्थानों पर क्लोराइड लवण के नमूने पाए गए. इन कणों के छोटे अवशेषों के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि उनके निर्माण तंत्र, समय और वर्तमान तथा भूतकाल के बारे में सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है.
शोध के निष्कर्ष
इस प्रकार का एक क्लोराइड नमूना मेरीडियनी प्लानुम के नज़दीक पाया गया, यह स्थान ओप्पोरच्यूनिटी रोवर के पास था.
शोध के अनुसार, मंगल ग्रह के सैंकड़ों स्थानों पर क्लोराइड लवण के नमूने पाए गए. इन कणों के छोटे अवशेषों के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि उनके निर्माण तंत्र, समय और वर्तमान तथा भूतकाल के बारे में सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है.
शोध के निष्कर्ष
इस प्रकार का एक क्लोराइड नमूना मेरीडियनी प्लानुम के नज़दीक पाया गया, यह स्थान ओप्पोरच्यूनिटी रोवर के पास था.
वैज्ञानिकों के अनुसार यह क्लोराइड संभवतः फ्लुवियोलेकस्तरिन प्रक्रिया के कारण बना, जिसमे एक्टिव हाईड्रोलोजिक साइकिल भी काम करता है.
इसके बाद की प्रक्रिया में घाटी के निर्माण एवं झील बनने की प्रक्रिया भी आरंभ हुई. झील का स्तर बढ़ने एवं जल निकासी के कारण वहां चिन्ह दिखाई दिए. बाकी बचा पानी वाष्पीकरण के कारण सूख गया तथा क्लोराइड बाकी रह गया.
डिजिटल तरीके से देखने पर झील में पानी एवं नमक की मात्रा का अनुमान लगाया गया. पानी में नमक की मात्रा पृथ्वी पर समुद्र में पाए जाने वाले जल की मात्रा का केवल 8 प्रतिशत था.
इस हाइड्रोलॉजिकल घटनाचक्र क्षेत्र में किन स्थितियों के चलते सल्फेट के आधार की रचना हुई, उस पर अभी शोध किया जा रहा है.
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