नासा ने मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यानों की टक्कर रोकने के लिए जुलाई 2015 में एक यातायात निगरानी प्रक्रिया शुरू की. इस प्रणाली के अतंर्गत यातायात निगरानी, संचार एवं युक्तिचालन योजना की प्रक्रिया शामिल है.
दो नए अंतरिक्षयान नासा का मार्स एटमोसफेयर एंड वोलाटाइल इवोल्यूशन (मावेन) और भारत का मार्स आर्बिटर मिशन (मंगलयान) के मंगल की कक्षा में शामिल होने के बाद यह कदम उठाया गया. वर्ष 2014 से यह दो नए अंतरिक्ष यान मंगल की परिक्रमा कर रहे हैं जिससे मंगल ग्रह पर ऐसे सक्रिय अंतरिक्ष यानों की संख्या 5 हो गई.
नासा का ‘मार्स एटमासफियर एंड वोलाटाइल इवोल्यूशन’(मावेन) और भारत का ‘मार्स आर्बिटर मिशन’, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का 2003 का ‘मार्स एक्सप्रेस’ और नासा के दो मंगल यान, 2001 के 'मार्स ओडिसी' और 2006 के ‘मार्स रिकानिसएंस आर्बिटर’ (एमआरओ) मंगल की परिक्रमा में शामिल है.
यह नई टक्कर बचाव प्रक्रिया नासा के ‘मार्स ग्लोबल सर्वेयर’ के संभावित स्थान पर भी नजर रखेगी. वर्ष 1997 में भेजा गया एक आर्बिटर अब निष्क्रिय है.
इस समय मंगल ग्रह पर पांच अंतरिक्ष यान हैं जिनमें भारत का मंगलयान भी शामिल है. नासा ने ऐसे में इन सभी यान को आपस में टकराने से बचाने के लिए एक खास तरह का सिस्टम तैयार किया है. इस सिस्टम के जरिए दो यान करीब न आने पाए, यह सुनिश्चित किया जा सकेगा. यह सिस्टम नासा के मार्स ग्लोबल सर्वेयर के संभावित स्थानों पर भी नजर रखेगा.
मंगल पर यातायात प्रबंधन पृथ्वी की कक्षा की तुलना में बहुत कम जटिल है, जहां 1000 से अधिक सक्रिय आर्बिटर तथा अतिरिक्त निष्क्रिय ठोस वस्तुएं जोखिम बढ़ा रही हैं. सभी पांच सक्रिय मार्स आर्बिटर नासा के डीप स्पेस नेटवर्क के संचार एवं ट्रैकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसकी कमान जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (जेपीएल) में है.
0 comments:
Post a Comment