हिंदी के जर्मन विद्वान लोठार लुत्से का निधन-(12-MAR-2015) C.A

| Thursday, March 12, 2015

प्रख्यात हिंदी शिक्षक और भारतविद् डॉ लोठार लुत्से का 5 मार्च 2015 को बर्लिन में 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया.
डॉ लोठार लुत्से पहली बार वर्ष 1960 में दिल्ली विश्व विद्यालय में जर्मन पढ़ाने आए. लोठार लुत्से ने जर्मनी के हाइडलबर्ग विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित दक्षिण एशिया संस्थान के आधुनिक भारतीय भाषा और साहित्य विभाग में हिंदी, उर्दू, तमिल, कन्नड़, मराठी, ओड़िया, बांग्ला, आदि का अध्ययन, अध्यापन, शोध व अनुवाद का कार्य शुरु किया.
वे नई दिल्ली स्थित जर्मन सांस्कृतिक केंद्र मैक्समूलर भवन के निदेशक रहे. उनकी पत्नी बारबरा लोत्स भी नब्बे के दशक में मैक्समूलर भवन की निदेशक रहीं. लोठार लुत्से ने हिंदी और बांग्ला के कई मशहूर कवियों का जर्मन भाषा में अनुवाद किया. डॉ लोठार लुत्से ने अज्ञेय, विष्णु खरे, अशोक वाजपेयी और उदय प्रकाश जैसे लेखकों की रचनाओं का भी अनुवाद किया.
उन्होंने कई भारतीय लेखकों को अध्यापन, व्याख्यान और रचना पाठ के लिए जर्मनी आमंत्रित किया. लोठार लुत्से ने कई वर्षों तक भारत में रहकर अपने संस्थान के लिए अकादमिक कार्य किया. लोठार लुत्से को पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया. हिंदी साहित्य:विविध संदर्भ’, उनकी चर्चित किताब है.

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