वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत 97वें स्थान पर-(14-OCT-2016) C.A

| Friday, October 14, 2016
povertyइंटरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई) द्वारा 11 अक्टूबर 2016 को वैश्विक भुखमरी सूचकांक जारी किया गया. इस सूचकांक में भारत को 97वां स्थान प्राप्त हुआ तथा भारत की चिंताजनक हालत का ब्यौरा दिया गया.

कुल 118 देशों के बीच किये गये इस सर्वेक्षण में भारत को 97वां स्थान मिला जबकि नेपाल (72वें), म्यांमार (75वें), श्रीलंका (84वें) और बांग्लादेश (90वें) स्थान पर भारत से आगे रहे. पाकिस्तान भारत ने भी नीचे 107वें स्थान पर रहा.

वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2016 

•    सर्वेक्षण में शामिल 118 देशों की सूची में भारत 97वें स्थान पर है.

•    सर्वेक्षण में बताया गया है कि भारत में 39 प्रतिशत बच्चे विभिन्न कारणों के चलते अविकसित हैं तथा उन्हें संपूर्ण पोषण एवं भोजन भी उपलब्ध नहीं होता. 

•    यह भी कहा गया कि भारत की कुल जनसंख्या का 15.2 प्रतिशत भाग कुपोषण की समस्या से जूझ रहा है.

•    वैश्विक भुखमरी सूचकांक-2016 में भारत को कुल 28.5 अंक हासिल हुए जो अन्य विकासशील देशों की तुलना में अधिक है. 

•    इसमें कहा गया कि अस्वच्छता तथा स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण बच्चों को अल्पायु में ही गंभीर रोगों जैसे अतिसार, हैजा आदि से ग्रसित होना पड़ता है.

•    इस सूचकांक में विकासशील देशों का औसत अंक 21.3 है.

•    इस सूचकांक में सबसे बेहतर स्थिति में अर्जेंटीना, बोस्निया, हर्जेगोविना, बेलारूस और ब्राजील शामिल हैं.

वैश्विक भुखमरी सूचकांक क्या है?

इस सर्वेक्षण का आरंभ अमेरिका के इंटरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा किया गया जबकि वेल्ट हंगरलाइफ़ नामक एक जर्मन स्वयंसेवी संस्थान ने इसे वर्ष 2006 में सार्वभौमिक रूप से सर्वप्रथम जारी किया.

•    इस रिपोर्ट में जिस देश का स्थान जितना अधिक होता है, वहां अधिक भुखमरी होती है.

•    यदि स्थान कम है तो इसका अर्थ है वह देश बेहतर स्थिति में है.

•    इसे लिए चार पैमाने तय किये गये हैं – देश की जनसँख्या में कुपोषण, शिशुओं में कुपोषण, बच्चों के विकास में बाधाएं तथा शिशु मृत्यु दर.

•    मौजूदा आंकड़ों के अनुसार एशिया में सबसे अधिक दयनीय स्थिति भारत और पाकिस्तान में है.

•    इस सर्वेक्षण अभियान द्वारा वर्ष 2030 तक 'जीरो हंगर' का लक्ष्य तय किया गया.

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