उत्तर प्रदेश सरकार ने 06 जून 2017 को जारी एक निर्देश में कहा है कि 2018-19 सत्र के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की किताबों के स्थान पर एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई की जाएगी.
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को मई 2017 में उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की ओर से कहा गया था कि पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की पुस्तकें शामिल की जायें. गौरतलब है कि उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के पास माध्यमिक शिक्षा का भी प्रभार है.
इसका अर्थ यह हुआ कि वर्ष 2019 में दसवीं और 12वीं की परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों को नए पाठ्यक्रम के अंतर्गत परीक्षाएं देनी होंगी.
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को मई 2017 में उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की ओर से कहा गया था कि पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की पुस्तकें शामिल की जायें. गौरतलब है कि उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के पास माध्यमिक शिक्षा का भी प्रभार है.
इसका अर्थ यह हुआ कि वर्ष 2019 में दसवीं और 12वीं की परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों को नए पाठ्यक्रम के अंतर्गत परीक्षाएं देनी होंगी.
हाई स्कूल के लिए कृषि और इंटरमीडिएट के लिए व्यवसायिक शिक्षा जैसे विषयों के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें नहीं ली जाएंगी, क्योंकि इन विषयों के पाठ्यक्रम में यूपी बोर्ड और सीबीएसई के बीच भारी अंतर है.
उत्तर प्रदेश में पाठ्यक्रम समितियों की बैठकों के साथ यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और इसके बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद की बैठक में प्रस्तावित बदलावों पर विचार किया जाएगा. माध्यमिक शिक्षा परिषद की बैठक, माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में होगी. इसके बाद प्रस्ताव का मसौदा मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा.
उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष यूपी बोर्ड द्वारा कराई जाने वाली 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में लाखों की संख्या में विद्यार्थी शामिल होते हैं. पिछले वर्ष 32.6 लाख विद्यार्थी हाई स्कूल की परीक्षाओं में शामिल हुए जबकि 29.2 लाख विद्याथी इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में शामिल हुए थे
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