एके-47 के डिजाइनर मिखाइल क्लाश्निकोव का निधन-(25-DEC-2013) C.A

| Wednesday, December 25, 2013
रायफल एके 47’ के डिजाइनर मिखाइल क्लाश्निकोव का रूस के उद्मुर्सिया प्रांत स्थित अपने गृह नगर इजेव्स्क में 23 दिसंबर 2013 को निधन हो गया. वह 94 वर्ष के थे. एके 47’ विश्व के सबसे खतरनाक हथियारों में से एक है. एके 47’ के नाम विश्व में सबसे अधिक लोगों की मौत का कारण बनने का रिकॉर्ड है.
मिखाइल क्लाश्निकोव को रूस के सबसे बड़े सम्मान द हीरो ऑफ रसिया गोल्ड स्टार मेडलसे सम्मानित किया गया था.

मिखाइल क्लाश्निकोव ने कहा कि उन्हें अपने अविष्कार पर जितना गर्व था उतना ही यह देखकर दु:ख होता था कि अपराधी किस तरह इसका दुरुपयोग करते हैं.

कालाश्निकोव ने पहली मशीन गन का डिजाइन वर्ष 1942 में बनाया था. उस समय द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वह सोवियत यूनियन की रेड आर्मी में टैंक कमांडर थे. वर्ष 1947 तक सोवियत मिलिट्री सर्विस में एके-47 को अपना लिया गया था.

वर्ष 1950 के प्रारम्भ में सोवियत यूनियन और वारसा संधि वाले देशों के बीच में यह मशीनगन स्टैंडर्ड मान ली गई थी. सबसे ज्यादा गन का प्रयोग पैरामिलिट्री सेना ने किया. एके 47 ने वर्ष 1960 से 70 के दशक में मोजाम्बिक में जारी अस्थिरता के बीच इसे इतनी लोकप्रियता हासिल हुई कि राष्ट्रीय ध्वज पर भी इसकी तस्वीरें थी.


सिद्धार्थ बिड़ला ने भारतीय वाणिज्य एवं उधोग महासंघ (फिक्की) का अध्यक्ष चुना गया-(25-DEC-2013) C.A

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भारतीय वाणिज्य एवं उधोग महासंघ (फिक्की) की 86वीं सालाना आम बैठक में 21 दिसंबर 2013 को एक्सप्रो लिमिटेड के चेयरमैन सिद्धार्थ बिड़ला को अध्यक्ष पद के लिये चुना गया. सिद्धार्थ बिड़ला ने इस पद पर एचएसबीसी बैंक की भारत प्रमुख नैना लाल किदवई का स्थान लिया है.
भारत होटल्स की चेयरपर्सन एवं प्रबंध निदेशक ज्योत्सना सुरी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं हर्षवर्धन नेवतिया को उपाध्यक्ष चुना गया.

सिद्धार्थ बिड़ला से संबंधित तथ्य
कलकत्ता विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक डिग्री (भौतिकी में आनर्स).
स्विटजरलैंड के अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान (आईएमडी) से वर्ष 1980 में एमबीए की डिग्री प्राप्त की.
सिद्धार्थ बिड़ला को कॉर्पोरेट प्रशासन, अधिग्रहण और विनिवेश, कंपनी कानून, कॉर्पोरेट और वित्तीय संरचना, संचालन वित्तीय प्रबंधन और औद्योगिक और व्यापार के संचालन के क्षेत्रों में एक व्यापक अनुभव है.
सिद्धार्थ बिड़ला एक्सप्रो लिमिटेड कंपनी के चेयरमैन है.

भारतीय वाणिज्य एवं उधोग महासंघ (फिक्की) से संबंधित तथ्य
फिक्की की स्थापना वर्ष 1927 में महात्मा गाँधी की सलाह पर घनश्यामदास बिड़ला एवं पुरुषोत्तम ठक्कर द्वारा की गयी थी.फिक्की भारत में सबसे बड़ा एवं सबसे पुराना शीर्ष व्यावसायिक संगठन है.
फिक्की एक गैर सरकारी, गैर लाभ संगठन एवं भारत के व्यापार और उद्योग का स्तम्भ है.
फिक्की अपनी सदस्यता बहुराष्ट्रीय कंपनियों सहित निजी और सार्वजनिक दोनों, एवं कॉरपोरेट सेक्टर को प्रदान करती है.


57वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी चैम्पियनशिप में निशानेबाज रंजन सोढी ने डबल ट्रैप में स्वर्ण पदक जीता-(25-DEC-2013) C.A

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निशानेबाज रंजन सोढ़ी ने 57वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी चैम्पियनशिप में पहला स्वर्ण पदक नई दिल्ली में 23 दिसंबर 2013 को जीता. 57वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी चैम्पियनशिप में रंजन सोढी ने डबल ट्रैप में 30 में से 27 निशाने लगाए, जबकि अजय मित्तल ने 25 निशाने लगाकर रजत पदक और मोहम्मद असाब ने कांस्य जीता.
ओलिंपिक पदक विजेता संजीव राजपूत ने 50 मीटर राइफल्स थ्री पोजीशन में स्वर्ण पदक और गगन नारंग ने रजत पदक जीता.
 
एथेंस ओलंपिक के रजत पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सातवें स्थान पर रहे. गगन नारंग ने 2012 लंदन ओलंपिक में दस मीटर एयर राइफल में कांस्य पदक जीता था.


राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा को लंदन में सुरक्षा प्रबंधन के लिए के लिए सम्मानित किया गया-(25-DEC-2013) C.A

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राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा को लंदन में सुरक्षा प्रबंधन के लिए दिसंबर 2013 के दूसरे सप्ताह में सोर्ड ऑफ ऑनरसे सम्मानित  किया गया. यह पुरस्कार ब्रिटिश सुरक्षा परिषद ने अपने लेखा परीक्षा कार्यक्रम में हवाई अड्डे पर स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के बेहतर प्रबंधन एवं प्रभावी कार्यान्वयन के लिए 5 सितारा प्रमाण पत्र दिया. इस सम्मान को विश्व सुरक्षा का ऑस्कर कहा जाता है.
राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा से संबंधित तथ्य
राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का पूर्व नाम बेगमपट हवाईअड्डा था. वर्ष 2008 में इसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा कर दिया गया.  
राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा आंध्र प्रदेश राज्य के हैदराबाद में स्थित है.
यह हवाईअड्डा जीएमआर हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (GHIAL) द्वारा संचालित है. सुरक्षा प्रबंधन के लिए पुरस्कार प्राप्त करने वाला यह भारत में पहला हवाई अड्डा है.
भारत की कंपनी स्पाइसजेट लिमिटेड एवं सिंगापुर की विमानन कंपनी टाइगरएयर के साथ हुए समझौतों में राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा भारत और सिंगापुर के मध्य आवागमन का प्रस्थान बिंदु होगा.


राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप में के श्रीकांत एवं पीवी सिंधु ने सिंगल्स खिताब जीता-(25-DEC-2013) C.A

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78वीं सीनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप मे 23 दिसंबर 2013 को दिल्ली में आयोजित मुकाबले में किदंबी श्रीकांत ने पुरूष सिंगल्स का एवं पुसरला वेंकता सिंधु ने महिला सिंगल्स का खिताब जीता.
के श्रीकांत ने पुरूष सिंगल्स फाइनल में आर एम वी गुरूसाईदत्त को  21-13, 22-20 से हराया. महिला सिंगल्स फाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त पीवी सिंधु ने जूनियर राष्ट्रीय चैम्पियन रितुपर्णा दास को 21-11, 21-17 से हराकर खिताब जीता.

पुरूष डबल्स फाइनल में शीर्ष वरीय जोड़ी प्रणव जेरी चोपड़ा एवं अक्षय देवाल्कर की जोड़ी ने मनु अत्री एवं सुमित रेड्डी को 21-19, 21-17 से हराकर खिताब जीता. महिला डबल्स फाइनल में ज्वाला गुट्टा एवं अश्विनी पोन्नप्पा की जोड़ी ने सिकी रेड्डी और प्रदन्या को 21-17, 21-16 से हराकर खिताब जीता. मिक्स्ड डबल्स खिताब अरूण विष्णु और अपर्णा बालान की जोड़ी ने अपने नाम किया.

मिक्स्ड डबल्स फाइनल में अरूण विष्णु एवं अपर्णा बालान की जोड़ी ने तरुण कोना एवं अश्विनी पोन्नप्पा की जोड़ी को 21-10, 21-17 से हराकर खिताब जीता.

विदित हो कि 77वीं सीनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप का आयोजन जम्मू और कश्मीर राज्य में वर्ष 2012 अक्टूबर में हुआ था. पुरूष सिंगल्स का फाइनल ख़िताब पी कश्यप ने अजय जयराम को हराकर जीता. महिला सिंगल्स का फाइनल ख़िताब सयाली गोखले ने पी वी सिंधु को हराकर जीता.  

भारतीय बैडमिंटन एसोसिएशन एवं राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप से संबंधित तथ्य
भारतीय बैडमिंटन एसोसिएशन की स्थापना एवं राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप की शुरुआत वर्ष 1934 में हुई. वर्ष 1960 से इस चैंपियनशिप में विदेशी खिलाडियों को भी भाग लेने की अनुमति प्रदान की गयी.
भारतीय बैडमिंटन एसोसिएशन का मुख्यालय लखनऊ में है. इसके अध्यक्ष अखिलेश दास गुप्ता है.  
वर्ष 2013 में भारतीय बैडमिंटन लीग की शुरुआत हुई. इस लीग में कुल 6 टीमों ने भाग लिया. अंतिम मुकाबले में हैदराबाद हॉटशॉट ने अवध वारियर्स को हराकर लीग का पहला ख़िताब जीता.


दूसरे पंडित हरिप्रसाद चौरसिया पुरस्कार हेतु शास्त्रीय गायिका किशोरी अमोनकर का चयन-(25-DEC-2013) C.A

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शास्त्रीय गायिका किशोरी अमोनकर को दूसरे पंडित हरिप्रसाद चौरसिया पुरस्कार हेतु चयनित किया गया. इनके चयन की जानकारी समारोह के आयोजक ने 23 दिसंबर 2013 को दी.
किशोरी अमोनकर को यह पुरस्कार संगीत के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए दिया जाना है. मुंबई की 82 वर्षीया किशोरी अमोनकर को यह पुरस्कार 4-5 जनवरी 2014 को आयोजित दो दिवसीय 7वें संगीत समारोह 'बांसुरी उत्सव' के दौरान बांसुरी वादक एवं संगीतकार हरिप्रसाद चौरसिया द्वारा प्रदान किया जाना है.

बांसुरी उत्सव
बांसुरी की लोकप्रियता बढ़ाने के उद्देश्य से पंडित चौरसिया के शिष्य संगीतज्ञ सोनार ने ही वर्ष 2007 में 'बांसुरी उत्सव' की शुरुआत की थी. पहले 'बांसुरी उत्सव' में 35 बांसुरी वादकों ने एकसाथ संगीत प्रस्तुति दी थी.

गुरुकुल प्रतिष्ठान 
भारतीय शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने एवं इसका प्रचार प्रसार करने के उद्देश्य से गुरुकुल प्रतिष्ठान की स्थापना भी सोनार ने ही की.

पंडित हरिप्रसाद चौरसिया पुरस्कार
पंडित हरिप्रसाद चौरसिया पुरस्कार वर्ष 2012 में गुरुकुल प्रतिष्ठान द्वारा स्थापित किया गया. पंडित हरिप्रसाद चौरसिया पुरस्कार के तहत विजेता को एक लाख रुपये प्रदान किए जाते हैं, तथा सम्मानित व्यक्ति के सम्मान में एक दृष्टांत पेश किया जाता है.

वर्ष 2012 में पहला पंडित चौरसिया पुरस्कार प्रख्यात कर्नाटक की बांसुरी वादक एन रामानी को दिया गया था.
 
किशोरी अमोनकर से सम्बंधित मुख्य तथ्य 

किशोरी अमोनकर हिंदुस्‍तानी शास्‍त्रीय परंपरा की प्रमुख गायिकाओं में से एक और जयपुर घराने की गायिका हैं.
किशोरी अमोनकर को वर्ष 2002 में भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से तथा वर्ष 1987 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.  
किशोरी अमोनकर को वर्ष 1985 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया  गया.
किशोरी अमोनकर को वर्ष 2009 में संगीत नाटक अकादमी फ़ेलोशिप प्रदान किया गया.
किशोरी अमोनकर पर 'भिन्न षड़ज' नामक वृत्तचित्र फ़िल्म कलाकर अमोल पालेकर और उनकी पत्नी संध्या गोखले ने बनायी.


कन्नड़ कवि जीएस शिवरुद्रप्पा का लंबी बीमारी के बाद निधन-(24-DEC-2013) C.A

| Tuesday, December 24, 2013
कन्नड़ कवि जीएस शिवरुद्रप्पा का लंबी बीमारी के बाद 23 दिसंबर 2013 को निधन हो गया. वह 87 वर्ष के थे. कर्नाटक सरकार ने शिवरुद्रप्पा के सम्मान में दो दिनों का शोक घोषित किया है, और 24 दिसंबर 2013 को राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी.
जीएस शिवरुद्रप्पा से सम्बंधित मुख्य तथ्य 
जीएस शिवरुद्रप्पा को वर्ष 2006 में राज्य सरकार का राष्ट्र कवि सम्मान प्रदान किया गया.
जीएस शिवरुद्रप्पा राज्य सरकार का राष्ट्र कवि सम्मान पाने वाले तीसरे कवि थे.
जीएस शिवरुद्रप्पा से पहले केवी पुट्टप्पा और मंजेश्वरा गोविंद पई को राज्य सरकार का राष्ट्र कवि सम्मान प्रदान किया गया था.
जीएस शिवरुद्रप्पा  को वर्ष 1984 में उन्हें अपने कार्य काव्यार्थ चिंतन (Kavyartha Chintana) के लिए केन्द्र के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
जीएस शिवरुद्रप्पा  को वर्ष 1998 में भारत सरकार द्वारा पदम आवार्ड से सम्मानित किया गया.
जीएस शिवरुद्रप्पा वर्ष 1991 में दावणगेरे में आयोजित 61वें अखिल भरत कन्नड़ साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष थे.
जीएस शिवरुद्रप्पा ने मैसूर के महाराज कॉलेज में एक कन्नड़ व्याख्याता के रूप में अपना करियर शुरू किया.
जीएस शिवरुद्रप्पा हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय में कन्नड़ विभाग के अध्यक्ष रहे.
जीएस शिवरुद्रप्पा बेंगलुरू विश्वविद्यालय में कन्नड़ विभागाध्यक्ष भी रहे.
जीएस शिवरुद्रप्पा का जन्म शिमोगा जिले के शिकारीपुरा में 7 फरवरी 1926 को हुआ.
जीएस शिवरुद्रप्पा के परिवार में पत्नी, दो पुत्र और एक पुत्री हैं.

जीएस शिवरुद्रप्पा के साहित्यिक कार्य 
जीएस शिवरुद्रप्पा के 13 कविता संग्रह, एक दर्जन गद्य व शोध कृतियां, चार यात्रा वृत्तांत प्रकाशित हुए. समागना ( कविता संग्रह) और व्यक्तमध्य (निबंध संग्रह) उनकी प्रसिद्ध कृति है. इसके अलावा जीएस शिवरुद्रप्पा ने कला और सामाजिक मुद्दों पर ढेर सारे लेख लिखे.


पूर्व केंद्रीय गृह सचिव विनोद कुमार दुग्गल मणिपुर के राज्यपाल नियुक्त-(24-DEC-2013) C.A

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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव विनोद कुमार दुग्गल को मणिपुर का राज्यपाल 23 दिसंबर 2013 को नियुक्त किया.
राष्ट्रपति भवन से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, "राष्ट्रपति ने विनोद कुमार दुग्गल को मणिपुर का राज्यपाल नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी".

विनोद कुमार दुग्गल को अश्वनी कुमार का स्थान लेना है. विनोद कुमार दुग्गल की नियुक्ति से पहले तक नगालैंड के राज्यपाल अश्विनी कुमार मणिपुर का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे.

विनोद कुमार दुग्गल से सम्बंधित मुख्य तथ्य 
विनोद कुमार दुग्गल केंद्र शासित प्रदेश काडर के पहले भारतीय प्रशानिक सेवा (आईएएस)  के अधिकारी हैं.
• 1968 बैच के भारतीय प्रशानिक सेवा (आईएएस) अधिकारी दुग्गल मार्च 2007 में केंद्रीय गृह सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए.
विनोद कुमार दुग्गल मणिपुर के राज्यपाल नियुक्त होने से पूर्व राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य हैं.
दुग्गल वर्ष 1996 से 2000 तक दिल्ली नगर निगम के आयुक्त रहे.

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन 
देश में आपदा प्रबंधन का यह सर्वोच्च निकाय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में संचालित है.

विदित हो कि मणिपुर के राज्यपाल का पद इस वर्ष जुलाई में खाली हुआ था जब जम्मू कश्मीर पुलिस के पूर्व प्रमुख गुरबचन सिंह जगत का पांच वर्ष का कार्यकाल समाप्त हो गया था.


भारत ने परमाणु क्षमता वाले अग्नि-3 मिसाइल का उड़ीसा तट के व्हीलर द्वीप से सफल परीक्षण किया-(24-DEC-2013) C.A

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भारत ने परमाणु क्षमता वाले अग्नि-3 बैलिस्टिक मिसाइल का उड़ीसा तट के व्हीलर द्वीप से सफल परीक्षण 23 दिसंबर 2013 को किया गया. सतह से सतह तक मार करने वाले मिसाइल का परीक्षण भारतीय सेना के सामरिक बल कमांड ((एसएफसी)) द्वारा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की सहायता से किया गया. स्वदेशी तकनीक से निर्मित अग्नि-3 मिसाइल को एकीकृत टेस्ट रेंज से लांच काम्प्लैक्स-4 पर स्थित मोबाइल लांचर से शाम 4.55 बजे प्रक्षेपित किया गया.
इसे पहले ही सेना में शामिल कर लिया गया है जिसमें हाईब्रिड नेविगेशन, गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम तथा कम्प्यूटर लगे हुए है. मिसाइल दागे जाने और उसके लक्षित क्षेत्र को निशाना बनाने तक के पथ पर अत्‍याधुनिक राडारों, टेलीमट्री अर्ब्‍जेवेशन स्‍टेशन्‍स, इलेक्‍ट्रोओपटिक उपकरणों तथा नौसेना के जहाजों से नजर रखी गई.

अग्नि-3 से सम्बंधित मुख्य तथ्य 
अग्नि-3 मिसाइल तीन हजार किलोमीटर से ज्‍यादा की दूरी तक मार कर सकती है.
अग्नि-3 मिसाइल उन्‍नत, उच्‍च, सटीकता वाली नेविगेशन प्रणाली से युक्‍त है और एक नवीन निर्देशित योजना द्वारा निर्देशित है.
इसका प्रक्षेपण सेना द्वारा प्रायोगिक परीक्षण के तहत किया गया.
डीआरडीओ के एक अधिकारी ने कहा, 'अग्नि-3 मिसाइल के प्रदर्शन को दोहराने की क्षमता साबित करने के लिए इसकी श्रृंखला में दूसरा प्रायोगिक परीक्षण किया गया.'
अग्नि-3 मिसाइल में दो स्तर की ठोस प्रणोदक प्रणाली है.
• 17 मीटर लंबी मिसाइल का व्यास 2 मीटर है और प्रक्षेपण के समय इसका भार करीब 50 टन है.
यह डेढ़ टन वजनी वारहैड ले जा सकती है.
रेल मोबाइल प्रणाली से युक्त अग्नि-3 मिसाइल को देश के किसी भी हिस्से से छोड़ा जा सकता है.

विदित हो कि अग्नि-3 के 9 जुलाई 2006 को हुए पहले विकास परीक्षण के अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे लेकिन 12 अप्रैल 2007 और  7 मई 2008 तथा 7 फरवरी 2010 को किये गये परीक्षण और बाद में 21 सितंबर 2012 को इसी केंद्र से किये गये पहले प्रायोगिक परीक्षण सफल रहे.


बोलीविया ने देश का पहला दूरसंचार उपग्रह तूपक कटरी लॉन्च किया-(24-DEC-2013) C.A

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बोलीविया ने 20 दिसंबर 2013 को देश का पहला दूरसंचार उपग्रह तूपक कटरी लॉन्च किया. उपग्रह का नाम देश के एक राष्ट्रनायक के नाम पर रखा गया है, जिसने 18वीं शताब्दी के स्पेनी औपनिवेशिक शासन से युद्ध लड़ा था. उपग्रह को ले जाने वाले रॉकेट को चीन स्थित एक संचालन-केंद्र से दागा गया. बोलीविया दक्षिण अमेरिका के उन अंतिम देशों में से एक है, जिनके पास अपना स्वयं का उपग्रह है.  

बोलीविया की आधिकारिक अंतरिक्ष एजेंसी के निदेशक, इवान जांब्राना के अनुसार, “उपग्रह मार्च 2014 तक पूरी तरह से काम करने लगेगा और संप्रेषण-लागत कम करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए टेलीविजन और इंटरनेट सेवाओं में सुधार लाने में मदद करेगा.

दूरसंचार उपग्रह
दूरसंचार उपग्रह (सेटकॉम) सबसे परिपक्व अंतरिक्ष एप्लीकेशनों में से एक है. वर्ष 962 में टेलस्टार और वर्ष 1963 में सिनकॉम के लॉन्च के साथ 50 वर्ष पहले शुरू हुआ सेटकॉम लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर है. पहले सेटेलाइट का निष्पादन बहुत सीमित था. सेटेलाइट का प्रयोग लंबी दूरी की टेलीफोनी और स्टूडियोज के टेलीविजन-सिग्नल्स के परिवहन तक सीमित था.  

दूरसंचार उपग्रहों का प्रयोग 
रेडियो सुनते हुए और टीवी देखते हुए जो सिग्नल्स हम प्राप्त करते हैं, वे सेटेलाइट से वितरित होते हैं.
ज्यादातर समाचार-एजेंसियाँ अपनी संबद्ध संस्थाओं को टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो वितरित करने के लिए सेटेलाइट्स का इस्तेमाल करती हैं.
इंटरनेट में एक्सेस केवल सेटेलाइट-संप्रेषण द्वारा ही संभव है.
सेटेलाइट्स का इस्तेमाल टेली-शिक्षा, टेली-चिकित्सा या वीडियो कांफ्रेंस प्रणालियों के लिए किया जा रहा है.
इंटरनेट सेवा प्रदाता अकसर अपने सर्वर्स सेटेलाइट द्वारा इंटरनेट नेटवर्क के कोर से जोड़ देते हैं.
अति शक्तिशाली ब्रॉडबैंड सेटेलाइट्स के आविर्भाव से यूजर अपने खुद के ब्रॉड बैंड इंटरएक्टिव सेटेलाइट टर्मिनल्स से लैस होकर इंटरनेट में एक्सेस कर लेते हैं, भले ही निकटतम टेरेस्टेरियल नोड से उनकी दूरी कितनी भी हो.
दुनिया के सर्वाधिक दूरस्थ भागों में, और कुछ कम दूरस्थ भागों में भी, दूरसंचार-संप्रेषण टेलीफोन और अन्य सेवाओं के इन्फ्रास्ट्रक्चर में बुनियादी भूमिका निभा रहा है.


पर्यावरण मंत्रालय ने कस्तूरीरंगन की सिफारिशों पर नए आदेश जारी किए-(24-DEC-2013) C.A

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पर्यावरण मंत्रालय ने देश के दक्षिणी हिस्से में घोषित पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र (पश्चिमी घाट) के संबंध में कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट को सिद्धांतत: स्वीकार करने के बाद 20 दिसंबर 2013 को एक नया आदेश जारी किया और 16 नवंबर 2013 की अधिसूचना वापस ले ली. यह आदेश केरल, तमिलनाडू, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात को जारी किया गया.

पर्यावरण और वन मंत्रालय के आदेश ने स्पष्ट किया कि कस्तूरीरंगन के नेतृत्व वाले उच्च स्तरीय कार्य-दल  ने पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में जमीन के उपयोग पर कोई नए प्रतिबंध नहीं लगाए और यह आदेश स्थानीय लोगों द्वारा अपने कब्जे वाली जमीन के सतत अधिग्रहण या उनकी दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों अथवा सामान्य जीवनचर्या को प्रभावित नहीं करता.

उच्च स्तरीय कार्य-दल की रिपोर्ट निम्नलिखित पर प्रतिबंध लगाती है-
खनन, उत्खनन, बालू की खुदाई, ताप-विद्युत संयंत्र.
• ESA में 20000 वर्गमीटर या उससे ज्यादा के क्षेत्र पर भवन-निर्माण परियोजनाएँ, 50 है या उससे ज्यादा बड़े क्षेत्र की टाउनशिप और क्षेत्र विकास परियोजनाएँ और लाल श्रेणी के उद्योग. 

उच्च स्तरीय कार्य-दल ने 37 प्रतिशत पश्चिमी घाट भूदृश्य को पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील बताया.
 
पर्यावरण और वन मंत्रालय ने कहा कि उच्च स्तरीय कार्य-दल की सिफारिशों के समयबद्ध कार्यान्वयन की निगरानी के लिए पर्यावरण मंत्रालय की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी. 

मंत्रालय ने उच्च स्तरीय कार्य-दल द्वारा की गई अन्य सभी प्रमुख सिफारिशें स्वीकार कर लीं-

•    पश्चिमी घाट में प्रेरणास्पद हरित संवृद्धि के लिए वित्तीय व्यवस्थाएँ
•    निर्णय करने में स्थानीय समुदायों की सहभागिता और संलग्नता
•    पश्चिमी घाटों के लिए डाटा निगरानी प्रणाली विशेषकर निर्णय सहायता
•    निगरानी केंद्र की स्थापना


वित्तवर्ष 2013-14 के अप्रैल-नवम्बर महीनें में अप्रत्यक्ष कर वसूली में 5 प्रतिशत की वृद्धि-(23-DEC-2013) C.A

| Monday, December 23, 2013
वित्तवर्ष 2013-14 के अप्रैल-नवम्बर महीनें में अप्रत्यक्ष कर वसूली में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई. वित्त मंत्रालय द्वारा यह जानकारी 22 दिसंबर 2013 को दी गई. इस अवधि के दौरान (वित्तवर्ष 2013-14 के अप्रैल-नवम्बर महीनें में) अप्रत्यक्ष कर (उत्पाद, सीमा शुल्क और सेवा कर) संग्रह 3 07568 करोड़ रपए रहा. जबकि वित्तवर्ष 2012-13 के दौरान इस अवधि में 293145 करोड़ रपए की कर वसूली हुई थी.
भारत सरकार ने चालू वित्तवर्ष (2013-14) के लिए 5.5 लाख करोड़ रूपए से अधिक अप्रत्यक्ष कर वसूली का लक्ष्य रखा है.

अप्रत्यक्ष कर 
अप्रत्यक्ष कर वह कर है जो सीधे जनता से नहीं लिया जाता किंतु उसका बोझ प्रकारांतर से उसी पर पड़ता है. देश में तैयार किए गए वस्तुओं पर लगने वाला उत्पादन शुल्क, आयात या निर्यात किए जाने वाले वस्तुओं पर लगने वाले सीमा शुल्क आदि अप्रत्यक्ष कर हैं.


सोमालिया की संसद ने अब्दिवली शेख अहमद को प्रधानमंत्री नियुक्त करने की मंजूरी प्रदान की-(23-DEC-2013) C.A

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सोमालिया की संसद ने अब्दिवली शेख अहमद को प्रधानमंत्री नियुक्त करने की मंजूरी प्रदान की. अब्दिवली शेख अहमद ने अब्दी फराह शिरदोन का स्थान लिया. पूर्व प्रधानमंत्री अब्दी फराह और सोमाली के राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद के बीच नीतिगत मतभेदों के लेकर अब्दी फराह को नवम्बर 2013 में अपदस्थ कर दिया गया था.
 
सोमालिया की संसद में उपस्थित 243 सांसदों में से 239 सांसदों ने अब्दिवली शेख अहमद के पक्ष में मतदान किया. सोमालिया की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद शेख उस्मान जवारी ने मतदान के परिणाम की घोषणा 21 दिसंबर 2013 को की.

सोमालिया से संबंधित मुख्य तथ्य 
सोमालिया अफ्रीका के पूर्वी किनारे पर स्थित है. इसके पहले सोमालिया को सोमाली लोकतांत्रिक गणराज्य के नाम से जाना जाता था. इसके उत्तरपश्चिम में जिबूती, दक्षिण पश्चिम में केन्या, उत्तर में अदन की खाड़ी, पूर्व में हिन्द महासागर और पश्चिम में इथियोपिया स्थित है. सोमालिया की राजधानी मोगादिशु है. 

जर्मनी में कार्यरत और वैश्विक स्तर पर भ्रष्ट्राचार पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रांसपैरेसी इंटरनेशनल के 177 देशों में कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार सोमालिया दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश है. सर्वेक्षण की रिपोर्ट 3 दिसंबर 2013 को जारी की गयी. 

अंतरराष्ट्रीय पंचाट न्यायालय द्वारा भारत को जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा बांध के निर्माण की अनुमति-(23-DEC-2013) C.A

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अंतरराष्ट्रीय पंचाट न्यायालय ने पाकिस्तान की आपत्तियों को खारिज करते हुए जम्मू कश्मीर में किशनगंगा नदी से पानी का प्रवाह मोड़कर विद्युत उत्पादन करने के नई दिल्ली के अधिकार को बरकरार रखा. अंतरराष्ट्रीय पंचाट न्यायालय ने भारत पाकिस्तान मध्यस्थता मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए यह भी फैसला दिया कि भारत को किशनगंगा जल विद्युत परियोजना के नीचे से हर वक्तकिशनगंगा-नीलम नदी में कम से कम 9 क्यूमेक्स (घन मीटर प्रति सेकेंड) पानी जारी करना होगा. हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय पंचाट न्यायालय ने यह निर्णय 20 दिसंबर 2013 को दिया.

अंतरराष्ट्रीय पंचाट न्यायालय ने अपने अंतिम फैसले में कहा कि किशनगंगा नदी से जल प्रवाह की दिशा प्रथम बार मोड़ने के सात साल बाद भारत और पाकिस्तान दोनों स्थायी सिंधु आयोग और सिंधु जल समझौते की रूपरेखा के मुताबिक निर्णय पर पुनर्विचारकर सकते हैं.

अंतरराष्ट्रीय पंचाट न्यायालय के 18 फरवरी 2013 में जारी आदेश पर भारत द्वारा स्पष्टीकरण के अनुरोध के बाद न्यायालय ने अपना अंतिम फैसला सुनाया. अंतरराष्ट्रीय पंचाट न्यायालय द्वारा 18 फरवरी को दिए गए आंशिक फैसले में न्यूनतम प्रवाह का मुद्दा अनसुलझा रह गया था.

अदालत ने कहा कि किशनगंगा जल विद्युत परियोजना (केएचईपी) की भारत ने पाकिस्तान के एनजेएचईपी परियोजना से पहले कार्ययोजना बनाई थी और परिणामस्वरूप केएचईपी को प्राथमिकतामिलती है.  

अंतिम फैसला दोनों देशों के लिए बाध्यकारी है और इस पर अपील नहीं किया जा सकता.

अदालत ने अपने अंतिम फैसले में भारत को परियोजना के लिए पानी मोड़ने का अधिकार प्रदान किया और साथ ही निर्बाध पानी के प्रवाह के पाकिस्तान की मांग को भी स्वीकार की.

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय का अंतरिम निर्णय 
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय (The Court of Arbitration) ने निर्देश दिया कि उत्तरी कश्मीर में स्थित किशनगंगा पनबिजली परियोजना (Kishenganga Hydro-electric project, KHEP) के लिए किशनगंगा का जलमार्ग बदलने का भारत को अधिकार है. इसमें भारत ने सिन्धु जल समझौते के सभी प्रावधानों का पालन किया है. आंशिक फैसले में अदालत ने सर्वसम्मति से निर्णय किया था कि जम्मू कश्मीर में 330 मेगावाट की परियोजना में सिंधु जल समझौते की परिभाषा के तहत नदी का प्रवाह बाधित नहीं होना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय ने पाकिस्तान की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पाकिस्तान ने भारत पर किशनगंगा नदी के बहाव को मोड़ने और दोनों देशों के बीच हुई सिंधु जल संधि 1960 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इस परियोजना पर स्थगन की मांग की थी.

पाकिस्तान का आरोप 
पाकिस्तान ने भारत पर किशनगंगा नदी के बहाव को मोड़ने और दोनों देशों के बीच हुई सिंधु जल संधि 1960 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि भारत की किशनगंगा जल विद्युत परियोजना के कारण किशनगंगा नदी जल में इसका करीब 15 फीसद हिस्सा गायब हो जाएगा.

पाकिस्तान ने भारत पर आरोप लगाया कि वह पाकिस्तान के 949 मेगावाट की नीलम-झेलम जल विद्युत परियोजना (एनजेएचईपी) को नुकसान पहुंचाने के लिए नदी जल को मोड़ने का प्रयास कर रहा है.

पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि 1960 के प्रावधानों के तहत 17 मई 2010 को भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत अपील किया था.

सिंधु जल समझौता अंतरराष्ट्रीय समझौता है जिस पर भारत और पाकिस्तान ने 1960 में दस्तखत किए थे जिसके तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी के जल के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश हैं.

सिंधु जल संधि 1960 के मुख्य बिंदु
सिंधु नदी प्रणाली में तीन पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास और सतलुज और उनकी सहायक नदियां) और तीन पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम और चिनाब और उनकी सहायक नदियां) शामिल हैं.
सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर भारत और पाकिस्तान के मध्य वर्ष 1960 में किया गया था. जो 1 अप्रैल 1960 को लागू किया गया.
समझौते के तहत भारत पश्चिमी नदियों के पानी का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए कर सकता है. शेष पानी को पाकिस्तान के लिए छोड़ देगा.
a) घरेलू उपयोग हेतु
b) विशेषीकृत कृषि कार्य हेतु
c) पनबिजली परियोजना हेतु

किशनगंगा पनबिजली परियोजना 
किशनगंगा पनबिजली परियोजना (Kishanganga hydro-electric power project, केएचईपी) भारत के नेशनल पावर कारपोरेशन द्वारा किशनगंगा नदी पर बनाई जा रही है जो कि (किशनगंगा नदी) झेलम की एक सहायक नदी है. पाकिस्तान में प्रवेश करने के बाद किशनगंगा नदी नीलम के नाम से जानी जाती है. इस परियोजना का कार्य वर्ष 1992 में प्रारम्भ किया गया था. किशनगंगा पनबिजली परियोजना की लागत 3 हजार 6 सौ करोड़ रुपए है.

330 मेगावाट की किशनगंगा पनबिजली परियोजना उत्तरी कश्मीर के बांदीपुरा के निकट गुरेज घाटी में स्थित है. केएचईपी की रूपरेखा ऐसे तैयार की गई है जिसके तहत किशनगंगा नदी में बांध से जल का प्रवाह मोड़कर झेलम की सहायक नदी बोनार नाला में लाया जाना है.

अंतरराष्ट्रीय पंचाट न्यायालय 
सात सदस्यीय मध्यस्थता अदालत की अध्यक्षता अमेरिका के न्यायाधीश स्टीफन एम. स्वेबेल ने की. स्टीफन एम. स्वेबेल अंतराराष्ट्रीय न्यायालय के पूर्व अध्यक्ष थे. अन्य सदस्यों में फ्रैंकलिन बर्मन और होवार्ड एस. वीटर (ब्रिटेन), लुसियस कैफलिश (स्विट्जरलैंड), जान पॉलसन (स्वीडन) और न्यायाधीश ब्रूनो सिम्मा (जर्मनी) पीटर टोमका (स्लोवाकिया) है.

मध्यस्थता अदालत ने जून, 2011 में किशनगंगा परियोजना स्थल और आसपास के इलाकों का दौरा किया था.


भारतीय मूल की अमरीकी नागरिक अटॉर्नी नंदिता बेरी को टेक्सास राज्य की सचिव नियुक्त-(23-DEC-2013) C.A

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अमेरिका में टेक्सास के गवर्नर रिक पेरी ने भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक अटॉर्नी नंदिता बेरी को राज्य की सचिव नियुक्त किया. इनकी नियुक्ति 21 दिसंबर 2013 को की गयी.

इस नियुक्ति के साथ ही वह अमेरिका के दक्षिणी राज्य में इस पद पर पहुंचने वाली पहली भारतीय- अमेरिकी बन गईं. नंदिता बेरी को जॉन स्टीन का स्थान लेना है. नंदिता बेरी की नियुक्ति 7 जनवरी 2013 से प्रभावी होगी.
 
विदेश सचिव के कार्य 
नंदिता बेरी को राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी, सीमा और मैक्सिको मामलों पर गवर्नर की जनसम्पर्क अधिकारी और मुख्य प्रोटोकोल अधिकारी के रूप में काम करना है.
 
राज्य के विदेश सचिव कार्यालय के पास आधिकारिक एवं व्यावसायिक रिकॉर्ड का संग्रह होता है. यह सरकारी नियमों और कानूनों का प्रकाशन करता है. इसके पास राज्य की मुहर होती है और यह आधिकारिक दस्तावेजों पर गवर्नर के हस्ताक्षरों को प्रमाणित करता है. -