केओआई-3278 : लाइक्रा तारामंडल में एक स्व-वीक्षण युग्मतारा प्रणाली पाई गई-(25-APR-2013) C.A

| Friday, April 25, 2014
खगोल-विज्ञानी छात्र एथन क्रूज ने लाइक्रा तारामंडल में एक स्व-वीक्षण युग्मतारा प्रणाली की खोज की. युग्मतारा प्रणाली वह स्थान होता है, जहाँ दो तारे इतने निकट होते हैं कि अपनी गुरुत्वाकर्षण-अंत:क्रियाओं के कारण वे द्रव्यमान के एक सामान्य केंद्र की कक्षा के चक्कर लगाते हैं.
केओआई-3278 एक ऊपर से नीचे की ओर अवनत ग्रह जैसा दिखता है और यह युग्मतारा-प्रणालियों के अध्ययन की नई पद्धतियों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है. यह खोज वाशिंगटन विश्वविद्यालय में ग्रह-खोजी केपलर अंतरिक्ष दूरबीन का इस्तेमाल करके की गई. अध्ययन का ब्यौरा 'साइंस' नामक जर्नल के 18 अप्रैल 2014 के अंक में प्रकाशित किया गया.

केओआई-3278 के दो तारे लगभग 2600 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर (एक प्रकाश-वर्ष 5.88 ट्रिलियन मील जितना होता है) जब हर 88.18 दिनों में एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं तो पृथ्वी से निकटतर होने के कारण मुड़ते हैं. दोनों तारे लगभग 43 मिलियन मील दूर हैं, जो बुध और सूर्य के बीच की अनुमानित दूरी है. वाइट ड्वार्फ (सफ़ेद बौना तारा), जो जीवन के अंतिम चरण में बुझता हुआ तारा माना जाता है, लगभग पृथ्वी के आकार का, किंतु  200000 गुना ज्यादा भारी है.

इस खोज ने 2013 की एक खोज में सुधार किया है, जो कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने की थी और जिसने इसी तरह के स्व-वीक्षण प्रभाव का पता लगाया था पर उसमें प्रकाश की चमक नहीं थी क्योंकि अध्ययनाधीन दोनों तारे एक-दूसरे के बहुत निकट थे.

वाइट ड्वार्फ्स खगोलविज्ञान में आकाशगंगा में उम्र के संकेतक होते हैं. वाइट ड्वार्फ्स की समझ का विस्तार खगोलविदों को आकाशगंगा की उम्र के बारे में जानने की दिशा में एक कदम और आगे ले जाकर उनकी सहायता करता है.
 
शोध का निधिकरण नेशनल साइंस फाउंडेशन और नासा द्वारा दिए गए अनुदानों से हुआ था. 

गुरुत्वाकर्षण-वीक्षण क्या है?
गुरुत्वाकर्षण-वीक्षण खगोलविज्ञान का एक सामान्य उपकरण है, जो मंदाकिनी आकाशगंगा के भीतर दूरस्थ तारों के आसपास ग्रहों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह प्रक्रिया अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत की पुष्टि के लिए प्रयुक्त प्रथम पद्धतियों में शामिल है. मंदाकिनी आकाशगंगा के भीतर वीक्षण (लेंसिंग) को सूक्ष्मवीक्षण (माइक्रोलेंसिंग) कहा जाता है.


सुरेश कुमार रेड्डी आसियान में पहले भारतीय राजदूत नियुक्त-(25-APR-2013) C.A

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विदेश मंत्रालय ने सुरेश कुमार रेड्डी को 23 अप्रैल 2014 को पहले भारतीय राजदूत के रूप में आसियान (ASEAN) में नियुक्त किया.
दक्षिण-पूर्व एशिया के राष्ट्रों के संगठन आसियान’ (ASEAN) में नियुक्ति के पूर्व सुरेश कुमार रेड्डी इराक में भारत के राजदूत के रूप में कार्यरत थे.
विदित हो कि  भारत अपने पूर्व की ओर देखोनीति के तहत पिछले दो दशकों से आसियानपे अपना ध्यान केन्द्रित किये हुए है. वहीं वर्ष 2011 में भारत एवं आसियानने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी हेतु 80 बिलियन अमेरिकी डालर का व्यापार साझेदारी प्रारंभ की.
भारत आसियानको अपने व्यापार प्रसार का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र मानता है. इसके साथ ही साथ आसियान के साथ के द्विपक्षीय संबंध की मजबूती को भारत अपने सामरिक रणनीति के नजरिये से भी काफी महत्व देता है, जिसमें विशेष कर म्यांमार के साथ का बेहतर द्विपक्षीय संबंध भारत को उत्तर पूर्व में उग्रवादी की समस्या से निपटने में काफी मददगार साबित हो सकता है.
भारत के पूर्वोत्तर राज्य आसियानके लिए प्रवेश द्वार माने जाते है. जिनके माध्यम से भारत पूरे देश को आसियानके साथ संपर्क स्थापित करने के पक्ष में है.
 
आसियानसे संबंधित मुख्य तथ्य
दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन आसियान’ (ASEAN)  10 दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का समूह है, जो आपस में आर्थिक विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने और क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने हेतु कार्य करते हैं. इसकी  स्थापना 8 अगस्त सन 1967 को थाईलैंड  की राजधानी बैंकॉक में की गई थी. वर्तमान में आसियानका मुख्यालय  इंडोनेशिया  की राजधानी जकार्ता में है. इसके संस्थापक सदस्य थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस और सिंगापुर थे. ब्रूनेई इस संगठन में वर्ष 1984 में एवं वियतनाम वर्ष 1995में शामिल हुआ. वहीं वर्ष 1997 में लाओस और बर्मा इसके सदस्य बने.
1994 में आसियानने एशियाई क्षेत्रीय फोरम (एआरएफ) की स्थापना की. जिसका उद्देश्य सुरक्षा को बढ़ावा देना था. वर्तमान में अमेरिका, रूस, भारत, चीन, जापान और उत्तरी कोरिया सहित कुल 23 देश एआरएफके सदस्य हैं.


बेनफिका ने चार वर्ष बाद 33वां पुर्तगाली लीग फुटबॉल खिताब जीता-(25-APR-2013) C.A

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बेनफिका ने ओल्हानेंसे को 2-0 से हराकर चार वर्ष बाद पुर्तगाली फुटबॉल लीग (33वां) का खिताब 21 अप्रैल 2014 को जीत लिया. बेनफिका ने अपना घरेलू खिताब वर्ष 2009-10 में जीता था. 

इस प्रतियोगता में बेनफिका ने लीग में 11 सीधे गेम जीतकर खिताब अपने नाम किया. बेनफिका की 11वीं क्रमिक लीग जीत ने उन्हें दो गेम शेष रहते दूसरे स्थान पर रही टीम पर सात अंकों की अजेय बढ़त दिला दी.
बेनफिका पुर्तगाली कप के फाइनल और यूरोपा लीग तथा पुर्तगाली लीग कप के सेमीफाइनल्स में भी पहुँची थी.

बेनफिका और पोर्टो ने लिस्बन की टीम द्वारा आखिरी बार 2001-02 में जीतने के बाद लीग के खिताब पर एकाधिकार जमाया.

बेनफिका से सम्बंधित मुख्य तथ्य 
बेनफिका लिस्बन, पुर्तगाल स्थित एक पुर्तगाली बहु-खेल क्लब है. क्लब मुख्यत: अपनी पेशेवर फुटबॉल टीम के लिए जाना जाता है. क्लब की स्थापना 28 फरवरी 1904 को हुई थी. 

यह पुर्तगाल का सर्वाधिक समर्थित क्लब है और दुनिया में विशालतम प्रशंसक-आधार रखता है. बेनफिका आय की दृष्टि से दुनिया का छबीसवां सबसे अमीर फुटबॉल क्लब है.


बोस्टन डायनामिक्स ऑफ यूएस ने एटलस नामक एक आदमकद मानवीकृत रोबोट विकसित किया-(25-APR-2013) C.A

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बोस्टन डायनामिक्स ऑफ यूएस ने एटलस नामक एक आदमकद मानवीकृत रोबोट विकसित किया. रोबोट को मनुष्यों के लिए खतरनाक स्थानों पर जा सकने वाला रोबोट विकसित करने की चुनौती के एक अंग के रूप में विकसित किया गया.
एटलस रोबोट को एक योद्धा के रूप में विकसित नहीं किया गया है, बल्कि यह एक मानवीय मशीन है. इसका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं के समय बचाव के प्रयोजनों के लिए किया जाना है.  
   
6-फुट 2-इंच का एटलस एक वयस्क मानव के रूप में एक ताकतवर रोबोट है. यह विभिन्न प्रकार के मानवसम और प्राकृतिक व्यवहारों के साथ चेष्टाएँ करता है, जिनमें गत्यात्मक रूप से संतुलित चाल, व्यायाम, हस्तकौशल और यूजर द्वारा प्रोग्राम्ड कार्य शामिल है. 

रोबोट बोस्टन डायनामिक्स द्वारा विकसित किया गया है और यह रक्षा उन्नत शोध परियोजना एजेंसी (Defense Advanced Research Projects Agency/DARPA) की परियोजना का मौलिक विचार है.


राष्ट्रीय रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (एनटीईएस) ने रेल संबंधी पुछताछ हेतु मोबाईल एप जारी की-(25-APR-2013) C.A

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राष्ट्रीय रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (एनटीईएस) ने 23 अप्रैल 2014 को रेल संबंधी पुछताछ हेतु एक मोबाईल एप्लीकेशन जारी की.   
एनटीईएस द्वारा जारी मोबाईल एप्लीकेशन की मदद से रेल यात्री अब अपने मोबाइल फोन एवं कम्प्यूटर पर किसी रेलगाड़ी के पहुंचने और रवाना होने के संभावित समय के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके साथ ही साथ इस एप की मदद से रेल यात्री यह भी पता लगा सकते हैं कि कोई रेलगाड़ी मौजूदा समय में किस जगह पर है.

एनटीईएस द्वारा जारी मोबाईल एप्लीकेशन की मुख्य तकनीकी विशेषताएं 
 
एनटीईएस द्वारा जारी नई मोबाइल एप्लीकेशन में स्पॉट योर ट्रेनफीचर है जिसके जरिए ट्रेन की मौजूदा स्थिति, उसके किसी विशेष स्टेशन पर पहुंचने और रवानगी का संभावित समय पता किया जा सकता है. वहीं  ‘ट्रेन शेड्यूलफीचर रेलगाड़ी की पूरी समय सारणी मुहैया कराएगा. ट्रेन बिटवीन स्टेशंसफीचर की मदद से रेल नेटवर्क पर दो स्टेशनों के बीच उपलब्ध सभी रेलगाड़ियों की सूची के बारे में पता लगाया जा सकेगा. इस मोबाइल एप्लीकेशन में कैंसल्ड ट्रेन्स’’ का विकल्प भी है, जो उन सभी रेलगाड़ियों की जानकारी देगा जो रद्द हो गई हैं.

विदित हो कि एनटीईएस द्वारा जारी यह एप्लीकेशन वर्तमान में विंडो 8.0 फोन एवं कम्प्यूटर पर उपलब्ध होगा जिसे बाद में अन्य मोबाइल प्लेटफार्म के लिए भी विकसित किया जाएगा.


हवाई उड़ान के दौरान सेलफोन के उपयोग की डीजीसीए द्वारा अनुमति दी गई-(25-APR-2013) C.A

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राष्ट्रीय रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (एनटीईएस) ने 23 अप्रैल 2014 को रेल संबंधी पुछताछ हेतु एक मोबाईल एप्लीकेशन जारी की.   
एनटीईएस द्वारा जारी मोबाईल एप्लीकेशन की मदद से रेल यात्री अब अपने मोबाइल फोन एवं कम्प्यूटर पर किसी रेलगाड़ी के पहुंचने और रवाना होने के संभावित समय के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके साथ ही साथ इस एप की मदद से रेल यात्री यह भी पता लगा सकते हैं कि कोई रेलगाड़ी मौजूदा समय में किस जगह पर है.

एनटीईएस द्वारा जारी मोबाईल एप्लीकेशन की मुख्य तकनीकी विशेषताएं 
 
एनटीईएस द्वारा जारी नई मोबाइल एप्लीकेशन में स्पॉट योर ट्रेनफीचर है जिसके जरिए ट्रेन की मौजूदा स्थिति, उसके किसी विशेष स्टेशन पर पहुंचने और रवानगी का संभावित समय पता किया जा सकता है. वहीं  ‘ट्रेन शेड्यूलफीचर रेलगाड़ी की पूरी समय सारणी मुहैया कराएगा. ट्रेन बिटवीन स्टेशंसफीचर की मदद से रेल नेटवर्क पर दो स्टेशनों के बीच उपलब्ध सभी रेलगाड़ियों की सूची के बारे में पता लगाया जा सकेगा. इस मोबाइल एप्लीकेशन में कैंसल्ड ट्रेन्स’’ का विकल्प भी है, जो उन सभी रेलगाड़ियों की जानकारी देगा जो रद्द हो गई हैं.

विदित हो कि एनटीईएस द्वारा जारी यह एप्लीकेशन वर्तमान में विंडो 8.0 फोन एवं कम्प्यूटर पर उपलब्ध होगा जिसे बाद में अन्य मोबाइल प्लेटफार्म के लिए भी विकसित किया जाएगा.


एडिडास ने फीफा वर्ल्ड कप 2014 के लिए फिल्म श्रृंखला ब्राजुका अराउंड द वर्ल्ड लांच किया-(25-APR-2013) C.A

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एडिडास ने ब्राजील में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप 2014 के लिए ऑनलाइन डॉक्यूमेंटरी फिल्मों की साप्ताहिक श्रृंखला ब्राजुका अराउंड द वर्ल्ड की शुरुआत की. इसे एडिडास ने 22 अप्रैल 2014 को अपने यूट्यूब चैनल पर लांच किया.
फिल्म की शूटिंग छह एचडी कैमरे वाले ब्राजुकैम से की जाएगी. यह ब्राजील में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप 2014 के आधिकारिक बॉल में लगा होगा. ब्राजुकैम तकनीक के जरिए प्रशंसक 360 डिग्री के व्यू का मजा ले सकेंगें. फिल्म स्पेन, जर्मनी, इंग्लैंड, रुस, जापान , अमेरिका और मैक्सिको जैसे विभन्न देशों में सात सप्ताह तक चलने वाली बॉल की यात्रा को दिखाया जाएगा. बॉल की आधिकारिक यात्रा वर्तमान फीफा विश्व कप विजेता स्पेन के प्रशिक्षण सत्र से शुरु हो जाना है. एडिडास अगले सात सप्ताह तक एडिडास फुटबॉल यूट्यूब चैनल के जरिए हर सप्ताह एक फिल्म रिलीज करेगा.

सात फिल्म में जेवी हर्नान्डिंज, डैनी अल्विज, क्रिस्टियन टेलो, , मैनुएल न्यूअर, फिलिप लैह्म और डेविड विला जैसे स्टार फुटबॉल खिलाड़ियों को फीचर किया जाएगा.
 
दर्शकों के लिए फिल्म आकर्षक फॉर्मेट में होगा और उन्हें अपने पसंदीदा व्यू चुनने की आजादी होगी. इस पहल के हिस्से के तौर पर, उपयोगकर्ता एडिडास के उत्पादों पर अपने हस्ताक्षर कर सकेंगे.


एचआरडब्ल्यू की रिपोर्ट– दे से वी आर डर्टीः डिनाइंग एन एजुकेशन टू इंडियाज मार्जिनलाइज्ड जारी की गई-(25-APR-2013) C.A

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स्वयंसेवी संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने दे से वी आर डर्टीः डिनाइंग एन एजुकेशन टू इंडियाज मार्जिनलाइज्ड’ (They Say We’re Dirty: Denying an Education to India’s Marginalized) नामक रिपोर्ट 22 अप्रैल 2014 को जारी की. वर्ष 2010 से प्रभावी हुए शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून, 2009 के समुचित कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं की जांच के लिए यह सर्वेक्षण कराया गया था. सर्वेक्षण आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में कराया गया था.
रिपोर्ट में यह बताया गया है कि कैसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बच्चे बहिष्कृत किए जाते हैं और उन्हें आरटीई कानून के तहत किए गए बच्चों के अनुकूल और न्यायसंगत वातावरण नहीं मिलता. 

रिपोर्ट की मुख्य बातें
कक्षा में भेदभाव प्रमुख कारक है और स्कूल ही ऐसी जगह है जहां दलितों, जनजातीय समूहों, मुस्लिमों और अन्य कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा मिलने में दिक्कत हो रही है. 
पिछड़े वर्ग के छात्रों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के बाद उन्हें कक्षा में भेदभाव का शिकार होना पड़ता हैं, उन्हें अलग कर दिया जाता है और सार्वजनिक रूप से उनका अपमान किया जाता है. 
भेदभाव कई तरह से होता है जिसमें शिक्षकों का दलित छात्रों को अलग बैठने या मुस्लिम बच्चों और जनजातीय बच्चों पर अपमानजनक टिप्पणी करने और गांव के अधिकारियों का लड़कियों को कक्षा से बाहर रखने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना शामिल है. 
शिक्षक और अन्य छात्र अक्सर ऐसी जाति, समुदाय, जनजाति या धर्म के बच्चों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं. 
कुछ स्कूलों में तो दलित बच्चों को सिर्फ जाति और समुदाय के आधार पर नेतृत्व करने की आजादी नहीं मिलती जैसे उन्हें कक्षा का मॉनिटर नहीं बनाया जाता. कई बच्चों से तो शौचालय की सफाई का काम तक कराया जाता है. 
हाशिए पर खड़े समुदायों के बच्चों के लिए बने निकट के स्कूलों का बुनियादी ढांचा बहुत खराब होता है और वहां सबसे कम प्रशिक्षित शिक्षक होते हैं और कई स्कूलों में तो शिक्षकों की भारी कमी है. 

रिपोर्ट में बच्चों को 14 वर्ष की उम्र तक स्कूल में बनाए रखने पर अधिक जोर दिया गया है. इसके अलावा इसमें एक ऐसी प्रणाली बनाने की सिफारिश की गई है जिसकी मदद से बच्चे के स्कूल में दाखिले के बाद कक्षा आठवीं तक पहुंचने के क्रम पर निगरानी रखी जा सके. इसके साथ ही, स्कूल से जाने वाले, स्कूली शिक्षा बीच में ही छोड़ देने वाले और शिक्षा छोड़ने को मजबूर होने वाले छात्रों की पहचना के लिए एक प्रोटोक़ल बनाने की बात भी कही गई है.


पेंटागन के वैज्ञानिकों ने ह्यूमनायड रोबोट एटलस बनाया-(24-APR-2013) C.A

| Thursday, April 24, 2014
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागनके वैज्ञानिकों ने ह्यूमनायड रोबोट एटलसबना लेने की घोषणा अप्रैल 2014 के चौथे सप्ताह में की. जिसका अनावरण अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हेगल द्वारा 23 अप्रैल 2014 को किया गया.
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागनद्वारा निर्मित, इंसान की तरह काम करने में सक्षम इस ह्यूमनायड रोबोट एटलसको बनाने का मुख्य मकसद युद्ध करना नहीं बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के समय में पीड़ितों को द्रुतगति से राहत पहुंचना है.

6 फुट 2 इंच कद के एटलसनाम के इस रोबोट को इंसान की तरह ही मददगार रोबोट के रूप में तैयार करने की मुख्य योजना पेंटागन के डिफेंस एडवांस रीसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी (डारपा) ने तैयार की थी. जिसके पीछे मुख्य उद्देश्य जापान के फुकुशिमा एवं सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद ध्वस्त हो चुकी इमारतों से लोगों को निकालने के लिए इस रोबोट का प्रयोग करना था.

एटलसरोबोट सीढ़ियां चढ़ सकता हैं, दरवाजा खोल सकता हैं तथा साथ ही साथ इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान के उपकरणों का प्रयोग कर सकता है. इस रोबोट के मशीनी हाथ मस्तिष्क के निर्देशों को मानकर उसी के मुताबिक काम करते हैं.

विदित हो कि ह्यूमनायड रोबोट मानवीय मस्तिष्क के निर्देशों के आधार पर कार्य करने वाला अब तक का सबसे उत्कृष्ट रोबोट तकनीक का विकसित रूप है.


कॉग्निजेंट ने अमेरिका की डिजिटल वीडियो सॉल्यूशंस कंपनी आईटीएएएस का अधिग्रहण किया-(24-APR-2013) C.A

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आईटी सेवा प्रदाता कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) ने 22 अप्रैल 2014 को आईटीएएएस (इंटरैक्टिव टेलीविजन एंड एप्लीकेशन सॉल्यूशंस) के अधिग्रहण के लिए  समझौता करने की घोषणा की. आईटीएएएस अमेरिका की डिजिटल वीडियो सॉल्यूशंस कंपनी है जिसका मुख्यालय जॉर्जिया के अटलांटा में है. इस समझौते से न्यूजर्सी की आईटी कंपनी कॉग्निजेंट को मीडिया, संचार और उच्चप्रौद्योगिकी के कार्यक्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
आईटीएएएस (इंटरैक्टिव टेलीविजन एंड एप्लीकेशन सॉल्यूशंस) 
इंटरैक्टिव टेलीविजन एंड एप्लीकेशन सॉल्यूशंस (आईटीएएएस) की स्थापना 1999 में हुई थी. इसने इंटरैक्टिव टेलीविजन (आईटीवी) के विकास और वितरण में अहम भूमिका निभाई है. इसने पारंपरिक केबल, प्रसारण और दूरसंचार नेटवर्क वातावरण में डिजिटल वीडियो सेवाओं की व्यापक रेंज और ग्राहक उपकरणों में सेटट़प्स, टैबलेट और स्मार्ट फोन प्रदान करने में अग्रणी केबल, दूरसंचार और प्रौद्योगिकी कंपनियों की मदद करता है. अमेरिका, कनाडा और भारत में इसके टेस्टिंग और डेवलपमेंट केंद्र हैं.
 
कॉग्निजेंट (Cognizant)
सूचना प्रौद्योगिकी, परामर्श और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवाओं की यह अग्रणी कंपनी विश्व की प्रमुख कंपनियों को मजबूत व्यवसाय करने में मदद करती है. इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूजर्सी में टीनैक में है. कॉग्निजेंट में ग्रहकों की संतुष्टि, प्रौद्योगिकी नवाचार, उद्योग और बिजनेस प्रॉसेस का गहरा एक्सपर्टाइज का जुनून है और इसमें वैश्विक सहयोगी कार्यबल है जो काम के भविष्य का प्रतीक है. विश्वभर में 50 वितरण केंद्रों के साथ कॉग्निजेंट नैसडैक– 100, एस एंडपी 500, फोर्ब्स ग्लोबल 2000 और फॉर्च्यून 500 का सदस्य है. यह विश्व में सबसे बेहतरीन औऱ तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनियों में शुमार है.


कैडबरी इंडिया ने अपना नाम बदलकर मोनडेल्ज इंडिया फूड लिमिटेड किया-(24-APR-2013) C.A

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कैडबरी इंडिया ने अपना नाम बदलकर मोनडेल्ज इंडिया फूड लिमिटेड करने की घोषणा 22 अप्रैल 2014 को की. कैडबरी इंडिया लिमिटेड मोनडेल्ज इंटरनेशनल इंक. की सहायक कंपनी है. कैडबरी के नाम में होने वाला बदलाव विश्व भर में मोनडेल्ज इंटरनेशनल की सभी सहायक कंपनियों के नाम बदलने के क्रम में हुआ है. मोनडेल्ज में मोनडे का अर्थ है दुनिया और डेल्ज का अर्थ है स्वादिष्ट.
इसके उत्पाद पहले वाले ब्रांड नाम से ही बेचा जाता रहेगा. कंपनी के नाम में हुई बदलाव का असर इसके लोकप्रिय उत्पादों जैसे कैडबरी डेयरी मिल्क, फाइव स्टार, जेम्स, बॉर्नवेल, पर्क, सेलिब्रेशंस, चोक्लेयर्स, हैल्स, बॉर्नविटा, टैंग और ओरियो के नाम पर नहीं पड़ेगा. कंपनी का नया नाम उत्पादों के पैकेट के पीछे लिखा जाएगा. कंपनी के नाम के बदलाव के साथ ही 2012 में शुरु हुई परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई. 

मोनडेल्ज इंटरनेशनल इंक वैश्विक स्नैकिंग पावरहाउस है जिसका सालाना टर्नओवर 35 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है. यह स्टैंडर्ड एंड पुअर्स 500, नैसडैक 100 और डाउजोन्स सस्टेनिबिलिटी इंडेक्स का सदस्य है.


भारत सहित 22 एशिया-प्रशांत देशों की नौसेनाओं ने समुद्री संचार समझौते पर हस्ताक्षर किए-(24-APR-2013) C.A

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भारत सहित 22 एशिया-प्रशांत देशों की नौसेनाओं ने 22 अप्रैल 2014 को समुद्री संचार समझौते पर हस्ताक्षर किए. इन देशों के नौसेना-प्रमुखों के बीच यह समझौता द्विवार्षिक पश्चिमी प्रशांत नौसैनिक संगोष्ठी  (Western Pacific Naval Symposium/WPNS) के दौरान हुआ. संगोष्ठी चीन के पूर्वी बंदरगाह-शहर क्विंगदाओ में 21 से 25 अप्रैल 2014 तक चल रही है.
समझौते का यह लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि नौसैनिक जहाजों के बीच संवादहीनता प्रशांत महासागर में संघर्ष में न बदल जाए. समझौते में इस प्रक्रिया की रूपरेखा बनाई गई कि जापान, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के इर्द-गिर्द के समुद्री पथ में नौसैनिक जहाजों को अप्रत्याशित रूप से एक-दूसरे के संपर्क में आने पर किस तरह संवाद और युक्ति-प्रयोग करना चाहिए.    

इस समझौते के अतिरिक्त, पाकिस्तान को 21 सदस्यीय डब्ल्यूपीएनएस में प्रेक्षक का दर्जा दिया गया. पाकिस्तान को प्रेक्षक का  दर्जा दिए जाने से डब्ल्यूपीएनएस में प्रेक्षक का  दर्जा पाए देशों की कुल संख्या 4 हो गई है. प्रेक्षक का  दर्जा प्राप्त अन्य देश हैं भारत, बांग्लादेश और मैक्सिको. 
  
क्विंगदाओ संगोष्ठी  डब्ल्यूपीएनएस के संस्थापक सदस्यों में से एक, चीन द्वारा अपनी मेजबानी में आयोजित पहली द्विवार्षिक बैठक थी. 

समझौता इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच संवादहीनता प्रशांत महासागर में बढ़ते संघर्ष का केंद्र बनती जा रही है. समझौता जापान सहित चीन और उसके पड़ोसी देशों  के बीच बढ़ते विवाद हल करने में भी सहायक हो सकता है.  

पश्चिमी प्रशांत नौसैनिक संगोष्ठी (डब्ल्यूपीएनएस) 
डब्ल्यूपीएनएस का मूल 1987 की अंतरराष्ट्रीय समुद्र-शक्ति संगोष्ठी में निहित है, जो नौसेना-प्रमुखों के बीच मुक्त चर्चाओं के लाभों को लेकर आयोजित की गई थी. इस बैठक ने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रीय समिति में भी ऐसी ही बैठक आयोजित किए जाने के समझौते की ओर अग्रसर किया.  

उक्त समझौते के परिणामस्वरूप पश्चिमी प्रशांत नौसैनिक संगोष्ठी (डब्ल्यूपीएनएस) का गठन हुआ, जिसने अपनी पहली बैठक 13 संस्थापक सदस्यों के साथ 1988 में की. 

प्रयोजन 
डब्ल्यूपीएनएस का उद्देश्य पारस्परिक हितों के समुद्री मुद्दों पर चर्चा संभव बनाने के लिए एक ढाँचा उपलब्ध करवाकर, सूचना का आदान-प्रदान कर, क्षमताओं के प्रदर्शन की प्रथा और कार्मिकों की अदला-बदली द्वारा नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ उनमें परस्पर विश्वास तथा भरोसा निर्मित करना है.    

उद्देश्य 
डब्ल्यूपीएनएस के निम्नलिखित पाँच प्रमुख उद्देश्य हैं.
सहयोग की पहलों के बारे में चर्चा करना और उन्हें आगे बढ़ाना, तथा उनमें से उन पहलों की पहचान करना, जो और अधिक विकास तथा अभ्यास की दृष्टि से उपयोगी हैं.
मैत्री और पेशेवर सहयोग बढ़ाने के नए तरीके ढूंढ़ना और उनका विकास करना.
वर्तमान और भविष्य के लिए भरोसा और विश्वास निर्मित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर नौसेना-से-नौसेना संबंध विकसित करना. 
आपसी हितों के समुद्री मुद्दों के व्यापक दायरे पर सूचना का आदान-प्रदान करना. 
संचार-पथों की स्थापना और रखरखाव सुनिश्चित करना, ताकि कार्यशालाओं और संगोष्ठियों के बाहर प्रतिनिधियों के बीच संबंध बना रहे.

डब्ल्यूपीएनएस में वे नौसेनाएं शामिल हैं, जिनकी सीमा प्रशांत महासागर क्षेत्र से लगती है.

डब्ल्यूपीएनएस के 21 सदस्य देश हैं : ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, कंबोडिया, कनाडा, चिली, चीन, फ़्रांस, इंडोनेशिया, जापान, मलयेशिया, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, पेरू, फिलीपींस, कोरियाई गणतंत्र, रूस, सिंगापुर, थाइलैंड, टोंगा, अमेरिका और वियतनाम.


डोना वेकिक ने बीएमडब्लू मलेशियन ओपन टेनिश ख़िताब-2014 जीता-(24-APR-2013) C.A

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मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर में 20 अप्रैल 2014 को आयोजित बीएमडब्लू मलेशियन ओपन टेनिश ख़िताब-2014 को क्रोएशिया की टेनिश खिलाड़ी डोना वेकिक (Donna Vekic) ने जीत लिया. इस जीत के लिए डोना को 43000 अमेरिकन डॉलर का इनाम मिला.  
विश्व की 95वें नंबर की महिला टेनिश खिलाड़ी डोना वेकिक ने खिताबी मुकाबले में विश्व की 10वें नंबर की महिला टेनिश खिलाड़ी, स्लोवाकिया की डोमिनिका सिबुलकोवा (Dominika Cibulkova) को 5-7, 7-5 एवं 7-6 से पराजित किया. डोना वेकिक (Donna Vekic) का यह पहला महिला टेनिश संघ (WTA) महिला एकल ख़िताब है.

बीएमडब्लू मलेशियन ओपन टेनिश ख़िताब-2014 के महिला डबल्स का ख़िताब हंगरी की टिमा बाबोस (Timea Babos) एवं चीन की चन हो चिंग’ (Chan Hao Ching) ने चीन की जहेंग साईसाई’ (Zheng Saisai) एवं चन युंग जन (Chan Yung Jan) को 6-3,6-4 से पराजित कर जीता.
 
विदित हो कि बीएमडब्लू मलेशियन ओपन टेनिश ख़िताब-2014 का आयोजन 14 अप्रैल 2014 से 20 अप्रैल 2014 तक मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर में हुआ.


सरकारी आय-व्यय के लेखा परीक्षण में सहयोग हेतु भारत एवं भूटान के बीच समझौता-(24-APR-2013) C.A

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सरकारी आय-व्यय (लोक वित्त) के लेखा परीक्षण में सहयोग हेतु भारत एवं भूटान के बीच थिंपू में 22 अप्रैल 2014 को समझौता हुआ.
भारत के वर्तमान नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) शशिकांत शर्मा और भूटान के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक दशो यूगेन शेवांग ने इस समझौते से संबंधित सहमति पत्र पर पर हस्ताक्षर किए. 

भारत एवं भूटान के बीच हुआ यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया जो छह वर्षों तक के लिए मान्य होगा.
भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के अनुसार, समझौते के तहत दोनों देशों के लेखा परीक्षक पेशेवर एक-दूसरे के अनुभव साझा कर लेखा-परीक्षा के क्षेत्र में क्षमता बढ़ायेंगे.
इसके साथ ही साथ भारतीय सीएजी हर वर्ष भूटान के लेखा अधिकारियों को प्रशिक्षण देगा. सीएजी के अनुसार यह प्रशिक्षण भारतीय ऑडिट एंड अकाउंट्स की शिमला अकादमी में दिया जाएगा.


चीन के डिप्‍टी चीफ ऑफ जनरल स्‍टॉफ (ऑपरेशन) लेफ्टिनेंट जनरल की जियांगो दो दिवसीय भारत यात्रा संपन्न-(24-APR-2013) C.A

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चीन के डिप्‍टी चीफ ऑफ जनरल स्‍टॉफ (ऑपरेशन) लेफ्टिनेंट जनरल की जियांगो दो दिवसीय भारत यात्रा 23 अप्रैल 2014 को संपन्न हो गई. इस यात्रा पर भारत सरकार के निमंत्रण पर उनके साथ आठ सदस्‍यों का एक शिष्‍टमंडल भी आया. चीनी शिष्‍टमंडल के साथ नई दिल्‍ली में अधिकारी स्‍तर की वार्ता हुई.
चर्चा के मुख्य बिंदु   
वास्‍तविक नियंत्रण रेखा के आसपास शांति बनाए रखने संबंधी मुद्दों पर चर्चा.
दोनों देशों की सेनाओं के बीच पारस्‍परिक सहयोग और समझदारी बढ़ाने सहित पारस्‍परिक हित के विभिन्‍न मुद्दों पर चर्चा. 
वर्तमान द्विपक्षीय समझौतों को लागू करने के उपायों पर विचार-विमर्श.
दोनों पक्ष द्विपक्षीय सैन्‍य सहयोग की आवश्यकता बढ़ाने पर सहमत हुए.
चीन ने भारत में नवम्‍बर 2014 में होने वाले चौथे भारत चीन संयुक्‍त प्रशिक्षण अभ्यास कार्यक्रम में भाग लेने की बात दोहराई.
वार्ता के दौरान चीनी पक्ष द्वारा चीन के रक्षा मंत्री जनरल चांग वानकुआंन की वर्ष 2014 के अंत में भारत की यात्रा पर आने की भी पुष्टि की गई.

विदित हो कि वर्ष 2014 को मैत्री आदान-प्रदान वर्ष घोषित किया गया है. फरवरी 2014 में चीन के डिप्‍टी चीफ ऑफ जनरल स्‍टॉफ लेफ्टिनेंट जनरल वांग गुआंगझोंग वार्षिक रक्षा वार्ता के लिए भारत आए थे और जुलाई 2013 में भारत के रक्षा मंत्री ने चीन की यात्रा की थी.