सचिन तेंदुलकर को 35 वें राष्ट्रीय खेलों का सद्भभावना राजदूत बनाया गया-(30-MAY-2014) C.A

| Friday, May 30, 2014
सचिन तेंदुलकर को जनवरी से फरवरी 2015 तक केरल में आयोजित होने वाले 35 वें राष्ट्रीय खेलों का सद्भभावना राजदूत 27 मई 2014 को घोषित किया गया. राष्ट्रीय खेलों को राज्य के सात शहरों में आयोजित किया जाएगा.
राजदूत के रूप में सचिन के नाम की घोषणा केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने मुलाकात के दौरान की. इसके अलावा ओमन चांडी ने भारतीय सुपर लीग फुटबॉल टूर्नामेंट में शिरकत कर रही सचिन तेंदुलकर के स्वामित्व वाली कोच्चि फ्रेंचाइजी टीम के नाम की घोषणा की. सचिन के स्वामित्व वाली टीम को केरल ब्लास्टर्स फुटबॉल क्लब के नाम से जाना जाएगा.
राष्ट्रीय खेल
राष्ट्रीय खेलों की प्रारंभ 1920 के अंत में ओलंपिक आंदोलन में अंतर्गत हुआ है.
राष्ट्रीय खेल भारतीय ओलिंपिक खेलों के रूप में वर्ष 1924 से प्रत्येक दो साल में आयोजित होते थे और पहली बार वर्ष 1940 में मुंबई में इसे राष्ट्रीय खेल के रूप में दर्जा दिया गया.
आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रीय खेलों को वर्ष 1948 में उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित किया गया.
राष्ट्रीय खेल की अवधि और नियमों को भारतीय ओलंपिक संघ के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत रखा हैं. राष्ट्रीय खेलों  प्रत्येक दो साल में आयोजित होते है हालांकि यह ओलिंपिक खेलों और एशियाई खेलों के आयोजन के निर्धारित वर्षों में आयोजित नहीं होते है.
केरल में दूसरी बार राष्ट्रीय खेलों का आयोजन हो रहा है. पहले अवसर पर वर्ष 1987 में 27 वें राष्ट्रीय खेलों को तिरुवनंतपुरम, कोझीकोड, अलाप्पुझा, कोच्चि, त्रिशूर और कोल्लम में आयोजित किया गया था.
पिछले दो राष्ट्रीय खेलों का आयोजन वर्ष 2007 2011 में क्रमश:रांची और गुवाहाटी में किया गया था.


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वड़ोदरा संसदीय सीट से इस्तीफा दिया-(30-MAY-2014) C.A

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 मई 2014 को गुजरात की वड़ोदरा लोकसभा सीट से इस्तीफा दिया. वर्तमान में नरेंद्र मोदी लोकसभा में उत्तर प्रदेश के वाराणसी संसदीय क्षेत्र के प्रतिनिधि हैं.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान वड़ोदरा और वाराणसी सीटों से लोकसभा चुनाव लड़ा था और इन दोनों सीटों पर उनकी जीत हुई थी. मोदी ने लोकसभा चुनाव 2014 में वड़ोदरा में अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के प्रत्याशी मधुसूदन मिस्त्री को 5 लाख 70 हजार से अधिक वोटों से एवं वाराणसी में आम आदमी पार्टी के अरिवंद केजरीवाल को 3 लाख 72 हजार से अधिक वोटों से हराया था.
विदित हो कि भारत का संसदीय चुनाव कोई भी प्रत्याशी अधिकतम दो लोकसभा सीट से लड़ सकता है.



महाराष्ट्र के स्कूल की किताबों में सचिन तेंदुलकर के नाम का अध्याय जोड़ा गया.-(30-MAY-2014) C.A

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महाराष्ट्र राज्य सरकार ने स्कूल पाठ्यक्रम में क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर के नाम पर एक अध्याय जोड़ने का निर्णय किया है. सचिन तेंदुलकर के नाम पर अध्याय जोड़ने का उद्देश्य बच्चों को प्रेरित करने के लिए किया गया है. सचिन तेंदुलकर का नाम मराठी एवं अंग्रेजी विषय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है.
यह पहली बार नहीं है कि किसी क्रिकेटर के नाम पर एक अध्याय महाराष्ट्र के स्कूलों के पाठ्यक्रम में जोड़ा गया है. इससे पहले चंद्रकांत गुलाबरॉव (चंदू बोर्डे) और सुनील गावस्कर को भी स्कूलों के पाठ्यक्रम में जोड़ा गया था.


अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने अपने पद से इस्तीफा दिया-(29-MAY-2014) C.A

| Thursday, May 29, 2014
अटार्नी जनरल जीई वाहनवती (Goolam Essaji Vahanvati) ने 27 मई 2014 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को सौंपा. भारत सरकार के अटार्नी जनरल के पद पर वाहनवती का कार्यकाल 7 जून 2014 तक था.
जीई वाहनवती जून 2009 में तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा भारत के 13वें अटार्नी जनरल के पद पर नियुक्त हुए. वर्ष 2012 में उन्हें दो वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया.
 
विदित हो कि भारत सरकार के अटार्नी जनरल का पद एक संवैधानिक पद हैं, और इस पद से संबंधित व्यक्ति को कार्यकाल पूरा होने तक साधारणतः हटाया नहीं जाता, लेकिन परंपरा यहीं है कि नई सरकार आने के बाद पुरानी सरकार के विधि अधिकारी अपने पद से स्वयं इस्तीफा दे देते हैं.

भारत सरकार के अटार्नी जनरल के पद से संबंधित मुख्य तथ्य 
अटार्नी जनरल, भारत सरकार का प्रथम विधि अधिकारी एवं सर्वोच्च न्यायालय का प्राथमिक अधिवक्ता होता है. इसकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुछेद 76(1) के तहत होता है. अटार्नी जनरल के लिए वहीं योग्यता निर्धारित है, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए होनी चाहिए. 
भारत सरकार का अटार्नी जनरल संसद की कार्यवाही में भाग ले सकता है, लेकिन इसे संसद के अंदर किसी मुद्दे पर होने वाले मतदान में भाग लेने का अधिकार नहीं है. भारत के प्रथम अटार्नी जनरल एम सी सीतलवाड’ (28.01.1950 -01.03.1963) थे.



हिंदुस्तान मोटर्स लिमिटेड ने अपने उत्तरपाडा संयंत्र को बंद कर दिया-(29-MAY-2014) C.A

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हिंदुस्तान मोटर्स लिमिटेड ने अपने उत्तरपाडा संयंत्र को बंद कर दिया. इसके बंद करने की घोषणा 24 मई 2014 को की गई. इस संयंत्र के बंद होने के साथ ही यहां एम्बेसडर ब्रांड कार का निर्माण भी बंद हो गया. इसका कारण आर्थिक समस्या, उत्पादन में कमी, अनुशासनहीनता में वृद्धि और इसके महत्वपूर्ण वाहन एम्बेसडर की घटती मांग रही.
 
उत्तरपाडा संयंत्र में एम्बेसडर कार का उत्पादन होता था. पश्चिम बंगाल में हुगली जिले के उत्तरपाडा में स्थित यह संयंत्र देश का पहला और एकमात्र एकीकृत ऑटोमोबाइल संयंत्र है.

एम्बेसडर कार का उत्पादन वर्ष 1958 में शुरू किया गया था. एम्बेसडर पहली कार थी जो भारत में और भारतीय जरूरतों के अनुरूप बनाई गई. अस्सी के दशक प्रतिवर्ष 24000 कार बेची जा रही थी, जबकि अब उत्तरपाडा संयंत्र में मात्र 5 कार प्रतिदिन बनाई जा रही थी.
 
अस्सी के दशक में ही भारतीय कार बाजार में मारूति सुजुकी, फोर्ड और हुंडई आदि कंपनियों ने प्रवेश किया और उपभोक्ताओं के सामने कई रंग और मॉडल पेश किए जिसके कारण इसकी बिक्री में गिरावट आई.
  
हिन्दुस्तान मोटर्स लिमिटेड 
हिन्दुस्तान मोटर्स लिमिटेड पश्चिम बंगाल के कोलकाता आधारित एक वाहन निर्माता कम्पनी है जो बिरला टेक्नीकल सर्विसेज का हिस्सा है. देश स्वतंत्र होने से पहले हिंदुस्तान मोटर्स लिमिटेड को गुजरात के ओखा में स्थापित किया गया था. बाद में इसका परिचालन हुगली जिले के उत्तरपाड़ा स्थानांतरित कर दिया गया. यहीं से कंपनी ने 1958 में एम्बेसडर का उत्पादन शुरू किया था.

मारूति उद्योग के कार बाजार में उतरने से पहले हिन्दुस्तान मोटर्स लिमिटेड देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी थी. हिन्दुस्तान मोटर्स के पार्टनर्स में जनरल मोटर्स और इसुजू मोटर्स शामिल थे. वर्तमान में हिन्दुस्तान मोटर्स का मित्सुबीशी के साथ ज्वाइंट वेंचर है.


चीन ने उबेर कप 2014 का खिताब जीता-(29-MAY-2014) C.A

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चीन ने 24मई 2014 को बैडमिंटन के उबेर कप 2014 का खिताब जीता. नई दिल्ली के सीरी फोर्ट कांपलैक्स में आयोजित फाइनल में चीन की टीम ने जापान की टीम को 3-1 से मात दी. इसके साथ ही चीन ने 13 वीं बार उबेर कप जीता और पिछले नौ संस्करणों में से यह चीन का आठवां खिताब था. चीन लगातार 16 फाइनल में पहुंचने वाला एकमात्र देश है.
परिणाम
·       चीन की ली जुइरइ ने  सीधे सेट में जापान की मिनात्सु मितानी को शिकस्त दी.
·       पहले डबल्स में जापान की मिसाकी मात्सुतोमो  और अयाका ताकाहाशी ने सीधे सेट में चीन के बाओ यिक्सिन और तांग जिंहुआ के खिलाफ जीत दर्ज की.
·       चीन की वांग  सिक्सिन ने सीधे सेट में जापान की सायाका ताकाहाशी को हराया.
·       दूसरा युगल में चीन की वांग जियोली और झाओ युनलेइ ने फाइनल में जापान के मियुकी माएदा और रिका काकियावा को शिकस्त दी.
उबेर कप
उबेर कप या महिला विश्व टीम चैंपियनशिप का पहला आयोजन वर्ष 1956-57 में किया गया था. वर्ष 1984 के बाद से उबेर कप  द्विवार्षिक आयोजित होता है. उबेर कप का नाम एक पूर्व ब्रिटिश महिला बैडमिंटन खिलाड़ी  बेट्टी उबेर के नाम पर रखा गया था.
चीन ने सबसे अधिक 13 बार उबेर कप का खिताब जीता है जबकि जापान ने पांच बार यह खिताब जीता है. इंडोनेशिया और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनो भी तीन बार उबेर कप का खिताब जीत चुके है.


काला धन की जांच हेतु केंद्र सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया-(29-MAY-2014) C.A

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काला धन की जांच हेतु केंद्र सरकार ने 27 मई 2014 को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार किया गया. एसआईटी कर चोरी और गैर-कानूनी गतिविधियों के जरिए विदेश में जमा की गई धन राशि की जांच करेगी. नवगठित एसआईटी के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम बी शाह और उपाध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरिजित पसायत होंगे.
 सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्य के रूप में केंद्र सरकार के निम्नलिखित पदाधिकारियों को शामिल होंगे.
1. सचिव, राजस्व विभाग, भारत सरकार
2. डिप्टी गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक
3. निदेशक, भारतीय ख़ुफ़िया ब्यूरो (आईबी)
4. निदेशक, प्रवर्तन निदेशालय
5. निदेशक, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई)
6. अध्यक्ष, सीबीडीटी
7. महा निदेशक, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो
8. महा निदेशक, राजस्व गुप्तचर
9. निदेशक, वित्तीय गुप्तचर विभाग 
10.निदेशक, अनुसंधान एवं विश्लेषण विभाग
11.संयुक्त संचिव (एफटी एंड आईआर-1), सीबीडीटी
 
एसआईटी को अवैध धन संग्रह से संबंधित हसन अली और अन्य मामलों की जांच और मुकद्दमें चलाने का काम सौंपा गया है. एसआईटी ऐसे मामलों के बारे में एक व्यापक कार्य योजना तैयार करेगा और अपने काम-काज की जानकारी समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय को देगा.
विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन से संबंधित पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय में काला धन का मामला वकील राम जेठमलानी ने एक जनहित याचिका के जरिये वर्ष 2011 में उठाया. इस मामले में सर्वोच्च अदालत ने काले धन की जांच के लिए केंद्र सरकार को एसआइटी गठित करने का आदेश 4 जुलाई 2011 को दिया था, लेकिन संप्रग सरकार ने एसआइटी गठन के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर किया. सर्वोच्च न्यायालय ने 1 मई 2014 को एसआइटी गठन का विरोध करने वाली संप्रग सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए पुनः अपने पूर्वर्ती आदेश पर मुहर लगा दी एवं केंद्र सरकार को 28 मई 2014 तक काला धन की जांच हेतु विशेष जांच दल के गठन से संबंधित अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया.


रुपया 11 महीने के सर्वोच्च पर पहुँचकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सर्वोत्तम निष्पादक मुद्रा बना-(29-MAY-2014) C.A

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भारतीय रुपया (आईएनआर) 11 महीने में सर्वाधिक सुधरकर 2014 में अमेरिकी डॉलर के विरुद्ध एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सर्वश्रेष्ठ निष्पादक मुद्रा बन गया. दिनांक 23 मई 2014 को रुपया डॉलर के विरुद्ध 11 महीने के शीर्ष पर पहुँचकर 58.52पर बंद हुआ.
पिछले एक महीने मेंभारतीय रुपये का मूल्य अमेरिकी डॉलर के विरुद्ध5.3 प्रतिशत सुधरा है.
अमेरिकी डॉलर के विरुद्ध भारतीय रुपये के मूल्य में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि एशिया-प्रशांत की अन्य समकक्ष मुद्राओं, जैसे कि इंडोनेशियाई रुपिया और न्यूजीलैंड डॉलर से आगे रही.
2014 के शुरू में अमेरिकी डॉलर के विरुद्ध भारतीय रुपया 61.80 पर था और तब से इसमें,अंशत: विदेशी निधियों के आगमन के कारण,छह महीने से भी कम समय में 327 पैसे की वृद्धि हुई है. यह वृद्धि अगस्त 2013 की तुलना में एकबड़ाउलटफेर है, जबरुपया अपने सार्वकालिक निम्नतम स्तर68.80 पर पहुंच गया था.
रुपये की मूल्यवृद्धि का मुख्य कारण पूँजी-प्रवाहों का बढ़ना और नई सरकार का गठन है, जिसने अर्थव्यवस्था में प्राण फूँकने के लिए बड़े सुधारों की उम्मीद जगा दी है.
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारतीय रुपये के बाद इंडोनेशियाई रुपिया, न्यूजीलैंड डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रहे, जिनमें क्रमश:4.60, 3.75 और3.55 प्रतिशतकी वृद्धि हुई.
येन(जापान), वॉन(दक्षिण कोरिया) और रिंगिट(मलयेशिया) के मूल्य में 2014 में अब तक 2 से3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
फिलीपींस का पेसो अमेरिकी डॉलर के विरुद्ध1.6 प्रतिशतबढ़ा है, जबकिथाइलैंड के बहत और सिंगापुरी डॉलर में0.5 प्रतिशत की एक छोटी वृद्धि हुई है.
हांगकांग डॉलर प्राय: अपरिवर्तितमुद्राओं में रहा है, जबकिचीन के युआन ने अपना मूल्य खोया है.
मुद्रा की मूल्य वृद्धि
मुद्रा की मूल्य वृद्धि का अर्थ है एक मुद्रा के मूल्य में अन्य मुद्राओं की तुलना में वृद्धि होना. मुद्राओं के मूल्य में एक-दूसरे की तुलना में वृद्धि कई कारणों से होती है, जिनमें पूँजी-आगमन और देश की चालू खाते की स्थिति शामिल हैं.
मूल्यवृद्धि के प्रभाव
देश का अंतरराष्ट्रीय व्यापार (निर्यात और आयात) : कमजोर मुद्रा सेनिर्यातों में वृद्धिहोगी, जबकि आयात महँगे हो जाएँगे, जिससेआगे चलकर देश का व्यापार-घाटा कम हो जाएगा (या अधिशेष अर्थात सरप्लस बढ़ जाएगा).
विदेशी पूँजी उन देशों में प्रवाहित होगी, जिनमें मजबूत सरकार, गतिशीलअर्थव्यवस्था और स्थिर मुद्रा होगी. इसका अर्थ है कि स्थिर मुद्रा विदेशी निवेशकों से निवेश-पूँजी आकर्षित करेगी.
देश में मुद्रास्फीति बढ़ सकती है, क्योंकि अवमूल्यित (Devalued) मुद्रा भारी संख्या में आयातकों वाले देशों में आयातित मुद्रास्फीति में परिणत हो सकती है.


नासा ने आईएसएस में कृन्तकों को ले जाने के लिए उच्च तकनीक वाले पिंजरे विकसित किए-(29-MAY-2014) C.A

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नासा ने पृथ्वी से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में कृन्तकों को ले जाने के लिए उच्च तकनीक वाले पिंजरे विकसित किए हैं. इन पिंजरों में ले जाए जाने वाले स्तनधारी कृन्तकों के शरीर क्रिया विज्ञान पर माइक्रोग्रैविटी के दीर्घकालिक प्रभाव का अध्ययन करने की अनुमति शोधकर्ताओं को मिलेगी.
कृंतक पर्यावास मॉड्यूल की पहली उड़ान इस वर्ष अगस्त में मानवरहित स्पेसएक्स ड्रैगन मालवाहक जहाज  से होगा.
ये उच्च तकनीक वाले पिंजरे नासा ने कैलिफोर्निया स्थित मोफ्फेट्ट फील्ड के एम्स रिसर्च सेंटर में विकसित किए गए हैं और जानवरों को अंतरिक्ष स्टेशन में भेजना उनके दीर्घकालिक आवास का हिस्सा है.
ट्रांस्पोर्ट मॉड्यूल के डिजाइन ड्रैगन अंतरिक्ष यान के कार्गो सेक्शन में बने खानों में फिट हो सकता है. ट्रांस्पोर्टर से स्टेशन के कृंतक आवास में बिना चूहों के भागे भेजने के लिए एक एक्सेस मॉड्यूल होगा और उनका आवास कंट्रोल पैनेल के पीछे होगा. हर निवास मॉड्लयूल में दस चूहिया और छह चूहे रह सकते हैं. इनमें उनके लिए पानी, खाना, स्वच्छ हवा और रौशनी का पूरा इंतजाम होगा ताकि वे स्टेशन पर आराम से रह सकें.
हैबिटेट मॉड्यूल्स में डाटा डाउनलिंक की क्षमता है जो पर्यावरण की स्थिति जैसे तापमान आदि की निगरानी कर सकता है. अंतरिक्ष में चालक दल और जमीन पर वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की टीम दृष्य प्रकाश और इंफ्रारेड वीडियो प्रणाली के जरिए रोजाना कृन्तकों के व्यवहार और समग्र स्वास्थ्य की निगरानी करने में सक्षम होंगें.
कुल मिलाकर, ये कृन्तक उनके आनुवांशिक उपभेदों को समझने और गुरुत्वाकर्षण के संवेदन और प्रतिक्रियाओं में विशिष्ट जीन द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका को समझने में मदद करेंगे.


रूस और चीन ने सीरिया के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र के संकल्प को वीटो किया-(29-MAY-2014) C.A

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रूस आर चीन ने 22 मई2014 को सीरियाई गृहयुद्ध को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) को संदर्भित करने का इरादा रखने वाले एक प्रारूप-संकल्प के विरुद्ध अपनी वीटो-शक्ति का इस्तेमाल किया. संकल्प को रूस और चीन द्वारा चौथी बार डबल-वीटो किया गया.  
संयुक्त राष्ट्र के 15 देशों के निकाय में प्रारूप-संकल्प का प्रस्ताव फ्रांस ने किया था. इसके पक्ष में 13 और विपक्ष में 2 वोट पड़े.
संयुक्त राष्ट्र संकल्प कामंतव्य सीरिया के तीन-वर्षीय गृहयुद्ध के दौरान युद्ध-अपराधियों और मानवता के विरुद्ध अपराध करने वालों पर मुकदमा चलने की संभावना हेतुसीरिया की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) को संदर्भित करना था.
सीरियाआईसीसी की स्थापना करने वाले रोम के विधान का पक्षकार देश नहीं है, इसलिएउसका मामला आईसीसी को संदर्भित करने का एकमात्र उपाय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा संदर्भित करना ही है. इसलिए फ्रांस ने 12 मई2014 को सीरियाई गृहयुद्ध को आईसीसी को संदर्भित करने का संकल्प परिषद के सदस्यों के बीच परिचालित किया था.
संयुक्त राष्ट्र प्रारूप-संकल्प अपनाए जाने के लिए कम से कम नौ वोट पक्ष में पड़नेके साथ-साथ सुरक्षा परिषद केपाँच स्थायी सदस्यों में से एक का भी नकारात्मक वोट (वीटो) नहीं पड़ना चाहिए.


मेघायल उच्च न्यायालय ने कहा 1971 से पहले बांग्लादेश से आकर बस चुके लोग भारतीय माने जाने चाहिए-(29-MAY-2014) C.A

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मेघालय उच्च न्यायालय ने 15 मई 2014 को शिलांग में दिए एक फैसले में कहा कि वैसे बांग्लादेशी नागरिक जो 24 मार्च 1971 से पहले राज्य में बस चुके हैं उनके साथ भारतीय नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए. इसके साथ ही कोर्ट ने ऐसे लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने का भी आदेश दिया.
न्यायमूर्ति सुदीप रंजन सेन ने 40 बांग्लादेशी शरणार्थियों की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई के आधार पर फैसला सुनाया. इन याचिकाकर्ताओं को प्रशासन ने उनकी नागरिकता को संदिग्ध बताते हुए  मतदाता सूची में शामिल नहीं किया था. असममेघालय़ सीमा पर रीबहोई जिला के अमजोंग गांव के शरणार्थियों ने जिला उपायुक्त द्वारा उनके नागरिकता प्रमाणपत्र को जब्त कर लिए जाने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
न्यायमूर्ति सेन ने उपायुक्त को आदेश मिलने के एक सप्ताह के भीतर शरणार्थियों को उनके प्रमाणपत्र वापस करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने अगले चुनावों से पहले इन सभी को मतदाता सूची में शामिल करने को भी कहा है. अपने फैसले में उन्होंने कहा कि इससे पहले दोनों देशों ने जो भारत में रहना चाहते हैं उनके भारत रहने और बांग्लादेश वापस जाने वालों को वापस जाने की अनुमति देने पर सहमति जताई थी.
न्यायमूर्ति सेन ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं के पूर्वज 24 मार्च 1971 से बहुत पहले भारत में आकर बस चुके थे इसलिए उन्हें वापस बांग्लादेश भेजने का कोई सवाल नहीं उठता. कोर्ट ने राज्य औऱ केंद्र सरकार को उन्हें उचित पुनर्वास मुहैया कराने का भी निर्देश दिया है.


16वीं लोकसभा का गठन-(29-MAY-2014) C.A

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भाजपा नेता एवं गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के 15वें प्रधानमंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ 26 मई 2014 को ली. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित एक समारोह में नरेन्द्र मोदी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ के बाद मंत्रिमंडल स्तर के 23 मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के 10 और  राज्यमंत्री स्तर के 12 मंत्रियों को भी शपथ दिलाई गई. इस मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित कुल मंत्रियों की संख्या 46 है.  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में 6 महिलाओं को मंत्रिमंडल स्तर का मंत्री बनाया गया. जिसमें सुषमा स्वराज, मेनका गांधी, नजमा हेपतुल्ला, हरसिमरत कौर बादल, उमा भारती और स्मृति ईरानी शामिल हैं. मंत्रिपरिषद में सर्वाधिक उम्र की मंत्री नजमा हेपतुल्ला (74) और सबसे कम उम्र की मंत्री स्मृति ईरानी (38) हैं.
नरेन्द्र मोदी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री बनें, जिनका जन्म स्वतन्त्र भारत अर्थात 15 अगस्त 1947 के बाद हुआ. नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को हुआ था. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद के कुल 45 मंत्रियों में से दो छोड़कर शेष सभी 43 मंत्रियों का जन्म स्वतन्त्र भारत अर्थात 15 अगस्त 1947 के बाद हुआ है.  नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश के वाराणसी एवं गुजरात के वडोदरा संसदीय क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर 16वीं लोकसभा हेतु निर्वाचित किए गए.

शपथ ग्रहण समारोह में  सार्क देशों के शीर्ष नेता, जिनमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई, श्रीलंका के राष्ट्रपति महिन्दा राजपक्षे, मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम, भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोब्गे, बांग्लादेश की संसद की अध्यक्ष शीरीन शर्मिन चौधरी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम उपस्थित थे.
 
मंत्रियों के नाम और उनको आवंटित मंत्रालयों की सूची निम्नलिखित है:

1.
श्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन
परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग
सभी महत्‍वपूर्ण नीतिगत मामले
तथा किसी अन्‍य मंत्री को नहीं दिये गए अन्‍य सभी पोर्टफोलियो
कैबिनेट मंत्री
1.
श्री राजनाथ सिंह (भाजपा, उत्तरप्रदेश)
गृह मंत्रालय
2.
श्रीमती सुषमा स्‍वराज (भाजपा,मध्यपदेश)
विदेश मंत्रालय
 विदेश मामले मंत्रालय
3.
श्री अरुण जेटली (भाजपा, गुजरात)
वित्‍त
कॉरर्पोरेट मामले
रक्षा  
4.
श्री एम वेंकैया नायडू (भाजपा, आंध्र प्रदेश)
शहरी विकास
आवास तथा शहरी गरीबी उन्‍मूलन
संसदीय मामले
5.
श्री नितिन जयराम गडकरी (भाजपा, महाराष्ट्र)
सड़क परिवहन तथा राजमार्ग
शिपिंग

6.
श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा (कर्नाटक)
रेलवे
7.
सुश्री उमा भारती (भाजपा, मध्य प्रदेश)
जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा पुनरूद्धार
8.
डॉ. नजमा ए. हेपतुल्‍ला (भाजपा, मध्य प्रदेश)
अल्‍पसंख्‍यक मामले
9.
श्री गोपीनाथ राव मुंडे (भाजपा, महाराष्ट्र)
ग्रामीण विकास
पंचायती राज
पेयजल एवं स्‍वच्‍छता

10.
श्री रामविलास पासवान (लोजपा, बिहार)
उपभोक्‍ता मामले , खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण

11.
श्री कलराज मिश्र, भाजपा, (उत्तरप्रदेश)
सूक्ष्‍म, लघु तथा मझौले उद्योग
12.
श्रीमती मेनका संजय गांधी (भाजपा उत्तरप्रदेश)
महिला एवं बाल विकास

13.
श्री अनंत कुमार (भाजपा, कर्नाटक)
रसायन एवं उर्वरक

14.
श्री रविशंकर प्रसाद (भाजपा, बिहार) 
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी
कानून एवं न्‍याय

15.
श्री अशोक गजपति राजू पूसापति (तेलुगू देशम पार्टी, आंध्र प्रदेश)

नागरिक उड्डयन
16.
श्री अनंत गीते (शिवसेना, महाराष्ट्र)
भारी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यमिता
17.
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल (शिरोमणि अकाली दल, पंजाब)
खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग

18.
श्री नरेंद्र सिंह तोमर (भाजपा, मध्य प्रदेश)
खनन
इस्‍पात 
श्रम एवं रोजगार
19.
श्री जुएल उरांव (बीजू जनता दल, ओडीशा)
जनजातीय मामले

20.
श्री राधा मोहन सिंह (भाजपा, बिहार)
कृषि

21.
श्री थावरचंद गहलोत(भाजपा, मध्य प्रदेश)
सामाजिक न्‍याय तथा अधिकारिता 
22.
श्रीमती स्‍मृति जुबिन ईरानी (भाजपा, गुजरात)
मानव संसाधन विकास

23.
डॉ. हर्षवर्धन (भाजपा, दिल्ली)
स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण
राज् मंत्री
1.
जनरल वी. के. सिंह (भाजपा, उत्तर प्रदेश)
पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (स्‍वतंत्र प्रभार)
विदेशी मामले
प्रवासी मामले

2.
श्री इंद्रजीत सिंह राव (भाजपा, हरियाणा)
आयोजना (स्‍वतंत्र प्रभार)
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन (स्‍वतंत्र प्रभार)

रक्षा
3.
श्री संतोष कुमार गंगवार (भाजपा, उत्तर प्रदेश)
कपड़ा (स्‍वतंत्र प्रभार)
संसदीय मामले
जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा पुनरूद्धार  
4.
श्री श्रीपद येस्‍सो नाइक (भाजपा, गोवा)
संस्‍कृ‍ति (स्‍वतंत्र प्रभार)
पर्यटन (स्‍वतंत्र प्रभार)

5.
श्री धर्मेंद्र प्रधान (भाजपा, बिहार)
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (स्‍वतंत्र प्रभार)

6.
श्री सर्बानंदा सोनवाल (भाजपा, असम)
कौशल विकास, उद्यमिता, युवा मामले और खेल (स्‍वतंत्र प्रभार)
7.
श्री प्रकाश जावडेकर (भाजपा, महाराष्ट्र)
सूचना और प्रसारण (स्‍वतंत्र प्रभार)
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन (स्‍वतंत्र प्रभार)
संसदीय मामले
8.
श्री पीयूष गोयल (भाजपा, महाराष्ट्र)
ऊर्जा (स्‍वतंत्र प्रभार)
कोयला (स्‍वतंत्र प्रभार)
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (स्‍वतंत्र प्रभार)

9.
डॉ. जितेंद्र सिंह (भाजपा, जम्मू-कश्मीर)
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्‍वतंत्र प्रभार)
पृथ्‍वी विज्ञान (स्‍वतंत्र प्रभार)
प्रधानमंत्री कार्यालय
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन
परमाणु ऊर्जा विभाग
अंतरिक्ष विभाग
10.
श्रीमती निर्मला सीतारमन (भाजपा, तमिलनाडु)
वाणिज्‍य एवं उद्योग (स्‍वतंत्र प्रभार)
वित्‍त
कॉरर्पोरेट मामले

11.
श्री जी.एम. सिद्देश्‍वरा (भाजपा, कर्नाटक)
नागरिक उड्डयन

12.
श्री मनोज सिन्‍हा (भाजपा, उत्तर प्रदेश)
रेलवे

13.
श्री निहालचंद (भाजपा, राजस्थान)
 रसायन एवं उर्वरक

14.
श्री उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, बिहार)
ग्रामीण विकास
पंचायती राज
पेयजल एवं स्‍वच्‍छता

15.
श्री राधाकृष्‍णन पी (भाजपा, तमिलनाडु)
भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यमियता

16.
श्री किरण रिजिजू (भाजपा, अरुणाचल प्रदेश)
गृह मामले
17.
श्री कृष्‍णपाल (भाजपा, हरियाणा)
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग
शिपिंग
18.
डॉ. संजीव कुमार बालयान (भाजपा, उत्तर प्रदेश)
कृषि
खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग

19.
श्री मनसुखभाई धानजीभाई वसावा (भाजपा, गुजरात)
जनजातीय मामले

20.
श्री राव साहेब दादाराव दानवे (भाजपा, महाराष्ट्र) 
उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण
21.
श्री विष्‍णु देव साई (भाजपा, छत्तीसगढ़)
खनन
इस्‍पात
श्रम एवं रोजगार
22.
श्री सुदर्शन भगत (झारखंड)
सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता


आम चुनाव 2014 
भारत निर्वाचन आयोग ने 16वीं लोकसभा के गठन के लिए आम चुनाव 2014  के तिथियों की घोषणा नई दिल्ली में 5 मार्च 2014 को की थी. इसके साथ ही तीन राज्यों- आंधप्रदेश, उड़ीसा और सिक्किम के विधान सभा चुनाव की भी घोषणा की गई. यह चुनाव 7 अप्रैल 2014 से 12 मई 2014 के बीच नौ चरणों में कराए गए. मतदान 7, 9, 10, 12, 17, 24 और 30 अप्रैल 2014 को तथा 7 और 12 मई 2014 को कराए गए.

भारत निर्वाचन आयोग ने 16वीं लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव 2014 का परिणाम 17 मई 2014 को घोषित किया. कुल 543 सीटों के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 282 सीटें जीत कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया. भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 334 सीटें प्राप्त हुई. कांग्रेस पार्टी को मात्र 44 सीटों पर विजय मिली. वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को मात्र 60 सीटें प्राप्त हुईं.

इसके अलावां ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को 37, आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को 34, बीजू जनता दल को 20, शिवसेना को 18, तेलुगू देशम पार्टी को 16, तेलंगाना राष्ट्र समिति को 11, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को 9, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 6, लोक जनशक्ति पार्टी को 6, आम आदमी पार्टी को 4, समाजवादी पार्टी को 5, राष्ट्रीय जनता दल को 4, शिरोमणि अकाली दल को 4, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को 3, जम्मू और कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी को 3, आल इंडिया डेमोक्रेटिक फ्रंट को 3, अपना दल को 2, इंडियन नेशनल लोकदल को 2, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को 2, जनता दल (सेकुलर) को 2, जनता दल (यूनाइटेड) को 2, झारखंड मुक्ति मोर्चा को 2, केरल कांग्रेस (M) को 1, नागा पीपुल्स फ्रंट को 1, नेशनल पीपुल्स पार्टी को 1, पट्टाली मक्कल कच्ची को 1, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी को 1, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को 1, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन को 1, ऑल इंडिया एन.आर. सम्मेलन को 1, स्वाभिमानी पक्ष को 1 सीटें प्राप्त हुईं. 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार निर्वाचित किए गए.  

मतदान प्रवृत्तियां
16वीं लोकसभा चुनाव में कुल मतदाता 81.4 करोड़ हैं, जो 15वीं लोकसभा चुनाव से करीब 10 करोड़ अधिक हैं. 16वीं लोकसभा चुनाव में कुल 66.48 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया जिसमें 67.17 प्रतिशत पुरुष मतदाता और 65.71 प्रतिशत महिला मतदाता हैं. 15वीं लोकसभा चुनाव वर्ष 2009 में 16 से 13 मई के बीच पांच चरणों में हुये थे.

15वीं लोकसभा का कार्यक्राल 31 मई 2014 को समाप्त होना है. परन्तु 16वीं लोकसभा का गठन इसलिए 30 मई 2014 से पूर्व हो गया.

भारतीय संविधान में निर्वाचन के प्रावधान 
भारतीय संविधान के भाग 15 में अनुच्छेद 324 से अनुच्छेद 329 तक निर्वाचन की व्याख्या की गई है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 में एक चुनाव आयोग की स्थापना का प्रावधान है. वर्ष 1989 तक निर्वाचन आयोग केवल एक सदस्यीय संगठन था लेकिन 16 अक्टूबर 1989 को एक राष्ट्रपति की अधिसूचना के द्वारा दो और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की गई.

प्रधानमंत्री के नियुक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रावधान 
प्रधानमंत्री के चयन तथा नियुक्ति से संबंधित प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 में वर्णित है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 (1) के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है किन्तु अन्य मंत्री प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति किए जाते हैं और प्रधानमंत्री ही उन्हें विषयों का आवंटन करता है.

संविधान में मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या विनिद्रिष्ट नहीं है. तथापि संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा अनुच्छेद 75 में उपखंड (1क) अंतःस्थापित कर दिया गया है जो यह उपबंधित करता है कि प्रधानमंत्री को सम्मलित करते हुए मंत्रियों की कुल संख्या लोक सभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी. यह 1.1. 2004 से प्रभावी हो गया है.

अनुच्छेद 75 (2) के अनुसार मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद धारण करेंगे’.

अनुच्छेद 75 (3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोक सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी’.

अनुच्छेद 75 (5) में वर्णित है कि कोई मंत्री जो निरंतर छह मास की किसी अवधि तक संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं होता है उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा.