भारतीय-अमेरिकी डॉ. पिनाकी पाणिग्रही ने सेप्सिस का अचूक और सस्ता इलाज खोजा-(22-AUG-2017) C.A

| Tuesday, August 22, 2017
अमेरिका में भारतीय चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. पिनाकी पाणिग्रही ने हाल ही में सेप्सिस का अचूक और सस्ता इलाज खोजा है. सेप्सिस एक घातक संक्रमण की बीमारी है जिससे प्रत्येक वर्ष विश्वभर में 60,000 बच्चों की मौत हो जाती है. अमेरिकी मीडिया संगठन, नेश्नल पब्लिक रेडियो (एनपीआर) की रिपोर्ट के अनुसार, पाणिग्रही पिछले प्रोबायोटिक जीवाणु का पता लगाने के लिए पिछले 20 सालों से इस विषय पर शोध कर रहे थे जो आम, अचार और अन्य सब्जियों में पाया जाता है और ये नवजात शिशुओं में इस समस्या का अचूक ईलाज बन सकता है.
पिनाकी पाणिग्रही:
•    पिनाकी पाणिग्रही बीजेबी कॉलेज, भुवनेश्वर और एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज, ब्रह्मपुर के पूर्व छात्र थे.
•    वे वर्तमान में नेब्रास्का मेडिकल सेंटर कॉलेज ऑफ पब्लिक हेल्थ के बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में काम कर रहे हैं.
सेप्सिस:
डॉ. पिनाकी पाणिग्रही ने बताया कि सेप्सिस एक घातक संक्रमण की बीमारी है, एक बार इस संक्रमण से प्रभावित होने पर बच्चे अचानक से निष्क्रिय हो जाते हैं वे रोना और अन्य हरकत करना भी बंद कर देते हैं. यह काफी तेजी से फैलता है और जब तक उन्हें अस्पताल ले जाया जाता है तब तक उनकी मौत हो जाती है.
शोध में यह भी कहा गया है कि जिन बच्चों ने कुछ शर्करा के साथ एक सप्ताह के लिए सूक्ष्म जीवों को खाया था, उनमें सेप्सिस के कारण होने वाली मौत में नाटकीय कमी आई थी. उनमें 40 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. इतना ही नहीं, प्रोबायोटिक ने फेफड़ों में शामिल अन्य कई प्रकार के संक्रमणों को भी रोकने में मदद की.

भारतीय मूल के राहुल दोषी ने चाइल्ड जीनियस ख़िताब जीता-(22-AUG-2017) C.A

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भारतीय मूल के 12 वर्षीय राहुल दोषी को ब्रिटेन में चाइल्ड जीनियस पुरस्कार से सम्मानित किया गया. राहुल को यह सम्मान 19 अगस्त 2017 को आयोजित एक कार्यक्रम में दिया गया.

राहुल दोषी ने ब्रिटेन में टेलीविजन क्विज प्रतियोगिता में ‘चाइल्ड जीनियस’  पुरस्कार हासिल किया. ऐसा समझा जाता है कि उसका आईक्यू अल्बर्ट आइंसटीन और स्टीफन हॉकिंग से भी ज्यादा है.

चैनल फोर के शो ‘चाइल्ड जीनियस’ में राहुल दोषी ने नौ वर्षीय रोनन को फाइनल मुकाबले में 10-4 से हराया था. अगस्त 2017 के तीसरे सप्ताह में सभी सवालों के सही जवाब देकर वह सुर्खियों में आया था. 

उत्तर लंदन के स्कूली छात्र राहुल ने 19वीं सदी के कलाकार विलियम होलमन हंट और जॉन एवेरेट मिलियस के बारे में सवालों के जवाब देकर खिताब जीता. राहुल के पास विश्व के सबसे बड़े व पुराने उच्च बौद्धिक स्तर समुदाय मेन्सा में शामिल होने के लिए अत्यधिक कौशल है.

राहुल ने सप्ताह भर चले इस कार्यक्रम में आठ से 12 साल के 19 बच्चों को हराकर यह खिताब अपने नाम किया है. खिताब जीतने के बाद राहुल ने कहा, ‘वास्तव में यह अच्छी अनुभूति है.’

अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त सैन्याभ्यास शुरू किया-(22-AUG-2017) C.A

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अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने 21 अगस्त 2017 को संयुक्त  सैन्याभ्यास शुरू किया. हर साल अगस्त से दक्षिण कोरिया और अमेरिका के सुरक्षाबल संयुक्त रूप से सैन्याभ्यास करते हैं. यह सैन्याभ्साय 12 दिनों तक चलेगा, जिसका मकसद उत्तर कोरिया की ओर से किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई की प्रतिक्रियास्वरूप आपस में समन्वय करना है.
उत्तर कोरिया इस सैन्याभ्यास की हर साल आलोचना करता है और इसे अपने खिलाफ युद्ध की तैयारियों के तौर पर देखता है. अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त  सैन्य अभ्यास ‘उल्ची फ्रीडम गार्जियन’ को लेकर उत्तर कोरिया ने चेतावनी दी है.
उत्तर कोरिया की ओर से बढ़ते तनाव और चेतावनी के बावजूद दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने वार्षिक संयुक्त सैन्याभ्यास शुरू कर दिया. उत्तर कोरिया ने चेताया था कि इस अभ्यास से क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा.
इस सैन्य अभ्यास में हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. दक्षिण कोरिया का यह बड़े पैमाने पर किया जाने वाला कंप्यूटर-सिम्युलेटेड अभ्यास है, जो दो सप्ताह तक चलता है. हालांकि इस सैन्य अभ्यास को रक्षात्मक अभ्यास बताया गया है, लेकिन परमाणु हथियार संपन्न प्योंगयांग इस अभ्यास को आक्रमण के लिए बेहद उकसावे वाला मानता है.
प्योंगयांग ने जुलाई 2017 में दो अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया था जिसके टार्गेट में अमेरिका का ज्यादातर हिस्सा आता है. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था.
पृष्ठभूमि:
उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर प्रतिक्रियास्वरूप अमेरिका के गुआम द्वीप पर हमले की चेतावनी दी थी, जिसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़े शब्दों में उत्तर कोरिया को करारा जवाब दिया था. उत्तर कोरिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका का विवादित संयुक्त सैन्याभ्यास कोरियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए घातक बताया था. उत्तर कोरिया इस सैन्याभ्यास की हर साल आलोचना करता है और इसे अपने खिलाफ युद्ध की तैयारियों के तौर पर देखता है

केंद्र सरकार ने 6 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर खरीद को स्वीकृति प्रदान की-(19-AUG-2017) C.A

| Saturday, August 19, 2017
डिफेंस मिनिस्ट्री ने आर्मी के लिए 6 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी. डिफेंस पर्चेस क्लियर करने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की मीटिंग 17 अगस्त 2017 को दिल्ली में हुई. भारत इस एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टर के साथ अमेरिका से संबद्ध उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, प्रशिक्षण एवं गोला-बारूद भी लेगा.

बैठक की अध्यक्षता डिफेंस और फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने की. इन छह अपाचे जंगी हेलिकॉप्टरों की खरीद पर कुल 4,168 करोड़ का खर्च आएगा. इसके अलावा डीएसी ने यूक्रेन से दो गैस टर्बाइन सेट भी खरीदने को मंजूरी दे दी. 

ये गैस टर्बाइन सेट रूस में भारत के लिए तैयार किए जा रहे दो ग्रिगोरोविच क्लास गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट पोतों के लिए खरीदे जाएंगे. इन गैस टर्बाइन सेट की कीमत 490 करोड़ रुपये होगी. गत वर्ष मोदी पुतिन मीटिंग में नेवी शिप पर फैसला हुआ था. इसका वजन चार हजार टन है.
भारत यूक्रेन से इन शिपों में लगने वाले इंजन खरीदेगा. फिर फ्रिगेट को तैयार करने हेतु इन्हें रूस भेजा जाएगा. इसकी कीमत करीब चार बिलियन डॉलर है. अपाचे में दो टर्बोसॉफ्ट इंजन लगाए गए हैं. अमेरिका इराक और अफगानिस्तान में इनका इस्तेमाल कर चुका है.

अपाचे हेलिकॉप्टर्स को अमेरिकी कंपनी बोइंग बनाती है और इन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन अटैक हेलिकॉप्टर माना जाता है. अपाचे हेलिकॉप्टर की विशेषता यह है कि ये रात और बेहद खराब मौसम में भी बिना किसी रुकावट या परेशानी के अपने टारगेट को हिट कर सकते हैं.

अपाचे को यूएस आर्मी के एडवांस्‍ड अटैक हेलीकॉप्‍टर प्रोग्राम के लिए डेवलप किया गया. इसने पहली उड़ान 30 सितंबर 1975 को भरी. अप्रैल 1986 में अपाचे को यूएस आर्मी में शामिल किया गया.

उस समय यह इतने तकनीकी युक्त नहीं थे, जितने अब हैं.वर्तमान में इस हेलीकॉप्टर को यूएस आर्मी के अलावा इजरायल, मिस्र और नीदरलैंड की आर्मी भी इस्तेमाल करती है.
भारत दुनिया का पांचवा ऐसा देश है, जिसके पास अपाचे हेलीकॉप्टर होंगे. इस हेलीकॉप्टर के दोनों तरफ 30 एमएम गन लगी है. इसमें फिट सेंसर दुश्‍मनों को आसानी से तलाश कर उन्‍हें खत्‍म कर सकता है.

इसमे नाइट विजन सिस्‍टम भी इंस्‍टॉल हैं. इसमें हेलिफायर और स्ट्रिंगर मिसाइलें लगाई गई हैं. जो बिना भटके और राडार की पकड़ में आए दुश्मन के टारगेट को हिट कर सकती हैं.

फार्चून की सालाना ‘40 अंडर 40’ सूची में भारतीय मूल के पांच लोग सम्मिलित-(19-AUG-2017) C.A

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अमेरिका की पत्रिका फार्चून ने वर्ष 2017 की ‘40 अंडर 40’ सर्वाधिक प्रभावी युवा लोगों की वार्षिक सूची जारी की है. फार्चून द्वारा जारी की गई इस सूची में आयरलैंड के प्रधानमंत्री लियो वरादकर सहित भारतीय मूल के पांच लोग शामिल किये गये हैं.

सूची में उन लोगों को प्राथमिकता दी गयी है जिन्होंने अपन ने काम से अन्य व्यक्तियों को प्रोत्साहित किया. यह वह लोग हैं जिनकी उम्र 40 साल से कम है और अपना काम कर रहे हैं.

पत्रिका ने ऐसे लोगों को नवप्रर्वतक, विद्रोही और कलाकार तथा अन्य को प्रोत्साहित करने वाला बताया है. सूची में फ्रांस के 39 साल के राष्ट्रपति एमानुएल मैक्रोन पहले पायदान पर हैं. यह नेपोलियन के बाद सबसे युवा नेता हैं जिन्होंने मई में राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की.

सूची में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग दूसरे स्थान पर हैं. उनके बाद एयरबीएनबी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी तथा सह-संस्थापक ब्रायन चेसकी, नाथन ब्लेचारासाइक, जोइ गेबिया चोथे तथा टेनिस स्टार सेरेना विलयम्स सातवें स्थान पर हैं.
सूची में भारतीय मूल के लोगों में 26 साल की दिव्या नाग, 31 साल के ऋषि शाह, शारदा अग्रवाल (32) तथा सैमसोर्स की सीईओ तथा संस्थापक लीला जाना सम्मिलित हैं.

सूची 27वें स्थान पर सम्मिलित दिव्या नाग एपल की महत्वकांक्षी रिसर्चकिट और केयर किट कार्यक्रम को देखती हैं और संबंधित लोगों को स्वास्थ्य संबंधित एप के विकास के लिये प्रोत्साहित करती हैं. फार्चून के अनुसार, दिव्या ने स्टेम सेल शोध स्टार्टअप की स्थापना की और चिकित्सा क्षेत्र में निवेश को गति दी.

सूची में 38वें स्थान पर मौजूद ऋषि शाह तथा तथा शारदा अग्रवाल 10 साल से अधिक समय से स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी कंपनी आउटकम हेल्थ का जिम्मा संभाल रही हैं. 38 वर्षीय वरादकर सूची में पाचवें पायदान पर हैं. वरादकर के पिता का जन्म भारत में हुआ. दोनों ने 40,000 से अधिक डाक्टरों के कार्यालयों में टच स्क्रीन और टैबलेट लगाया जो संबंधित चिकित्सा सूचना तथा संबंधित जानकारी प्रदान करता है.

फार्चून के अनुसार आयरलैंड में काफी प्रवासी हैं लेकिन उसके नये प्रधानमंत्री का व्यक्तित्व अलग है. वह मुंबई से यहां आये प्रवासी हिंदू परिवार से हैं. पूर्व में डाक्टर रहे वरादकर आयरलैंड के सबसे युवा नेता हैं.

फार्चून की सूची में लीला 40वें स्थान पर हैं. भारतीय प्रवासी की पुत्री लीला का गैर-सरकारी संगठन सैमासोर्स इस साल 1.5 करोड़ डालर हासिल करने के रास्ते पर है. वह वैश्विक स्तर पर गरीबी समाप्त करने के लिये काम पर जोर देती हैं न कि परमार्थ कार्यों पर.

इंफोसिस के सीईओ विशाल सिक्‍का ने पद से इस्‍तीफा दिया-(19-AUG-2017) C.A

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विशाल सिक्का ने इंफोसिस के मैनेजिंग डायेक्ट (एमडी) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) पद से इस्तीफा दे दिया. विशाल सिक्का के इस्‍तीफा के बाद शेयर मार्किट में कंपनी के शेयर गिर गए. कीमतें सात फीसदी तक गिर गईं.
इंफोसिस ने उनके स्थान पर यूबी प्रवीण राव को अंतरिम सीईओ और एमडी नियुक्त किया है. यूबी प्रवीण राव अब तक चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर थे. कंपनी के अनुसार बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने विशाल सिक्का का इस्तीफा मंजूर कर लिया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को लिखे पत्र में कंपनी सेक्रेटरी एजीएस मणीकांत ने इस बात की पुष्टि की. मणीकांत के अनुसार विशाल सिक्‍का का इस्तीफा 18 अगस्त को हुई बोर्ड मीटिंग में स्वीकार कर लिया गया. 
 
इंफोसि‍स बोर्ड ने वि‍शाल सि‍क्‍का को एक्‍जीक्‍युटि‍व वाइस चेयरमैन नि‍युक्‍त कि‍या है. विशाल सिक्का नए स्थायी मैनेजिंग डायरेक्टर तथा सीईओ के पदभार ग्रहण करने तक इन्फोसिस के एक्ज़ीक्यूटिव वाइस-चेयरमैन पद पर बने रहेंगे. यह नियुक्ति 31 मार्च, 2018 से पहले कर दी जाएगी. 

इस मामले में इंफोसिस ने प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की. जिसमे उनकी नियुक्ति की घोषणा की गई. नई जिमीदारी में सिक्का रणनीतिक पहल, महत्वपूर्ण ग्राहक संबंध और प्रौद्योगिकी विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगे.

विशाल सिक्का के अनुसार उन्होंने इस्तीफा 'व्यक्तिगत' हमलों के कारण दिया है. विशाल सिक्का को तीन वर्ष पूर्व 2014 में चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त किया गया. इंफोसिस से जुड़ने से पहले विशाल सिक्का जर्मन कंपनी सैप में निदेशक मंडल के कार्यकारी सदस्य थे.
अंतरिम प्रबंध निदेशक यू बी प्रवीण के बारे में-
  • इंफोसिस के नए अंतरिम प्रबंध निदेशक यू बी प्रवीण राव वर्ष 1986 में इंफोसिस के साथ जुड़े.
  • राव को कंपनी के पूरे पोर्टफोलियो हेतु रणनीतिक और ऑपरेशनल संबंधी जिम्मदारी प्रदान की गई.
  • यू बी प्रवीण वैश्विक बिक्री, डिलिवरी और बिजनेस संबंधित कार्यों का निरीक्षण करते हैं.
  • यू बी प्रवीण राव इंफोसिस बीपीओ के चेयरपर्सन भी हैं.
  • राव 30 साल पहले कंपनी से जुड़े, वह कई सीनियर लीडरशिप भूमिकाएं निभा चुके हैं. इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट सर्विसेज के हैड, यूरोप के डिलिवरी हेड एंड हेड ऑफ रिटेल, कंज्यूमर पैकेज्ड गुड्स, लॉगिस्टिक एंड लाइफ साइंसेज के हेड जैसी भूमिकाएं सम्मिलित हैं.
  • राव नेशनल काउंसिल ऑफ कंफिडिरेशन ऑफ इंडिया इंडस्ट्री (सीआईआई) और नैस्कॉम के एग्जेक्यूटिव काउंसिल के सदस्य भी हैं.
इंफोसिस के बारे में-
  • इंफोसिस देश की दूसरी सबसे बड़ी साफ्टवेयर सेवा निर्यातक कंपनी है.
  • इंफोसिस के संरक्षक एवं संस्‍थापक सदस्‍य एन नारायणमूर्ति हैं.

बिल गेट्स वर्ष 2017 के सबसे बड़े दान दाता बने-(18-AUG-2017) C.A

| Friday, August 18, 2017

सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन की ओर से जारी रिलीज के अनुसार बिल गेट्स ने अब तक का अपना सबसे बड़ा दान किया है. उन्होंने अपनी कंपनी के 4.6 अरब डॉलर (29,571 करोड़ रुपये) के 6.4 करोड़ शेयर दान कर दिए.

बिल गेट्स अमेरिकी टेक्नॉलजी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक हैं, उनकी गिनती दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में की जाति है. बीते 17 साल में यह उनके द्वारा दान की गई सबसे बड़ी धन राशि है.

इतना दान देने के बाद भी बिल गेट्स दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं. ब्लूमबर्ग की अरबपतियों वाली लिस्ट में इनकी संपत्ति 86.1 अरब डॉलर आंकी गई है.

बिल गेट्स ने 6 जून को ही यह धनराशि दान कर दी. दान की गई धनराशी में सॉफ्टवेयर बनानेवाले माइक्रोसॉफ्ट के 6 करोड़ 40 लाख शेयर हैं, जिनकी कीमत 4.6 अरब डॉलर यानी करीब 29 हजार 571 करोड़ रुपये है.

बिल गेट्स के पास 1.3 फीसदी शेयर बचे-

सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमिशन के अनुसार अब बिल गेट्स के पास माइक्रोसॉफ्ट के मात्र 1.3 फीसदी शेयर बचे है. 
दान की गई धन राशि से पूर्व उनके पास 2.3 फीसदी और 1996 में 24 फीसदी शेयर थे. 
उनकी 5.8 लाख करोड़ रुपए नेटवर्थ में माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों की हिस्सेदारी सिर्फ 8 फीसदी रह गई है.

वर्ष के सबसे बड़े दानदाता-
बिल गेट्स द्वारा यह दान किसको दिया गया है इसकी जानकारी नहीं हो सकी है. उन्होंने ज्यादातर दान अपने बिल ऐंड मेलिंडा फाउंडेशन को ही दिए.
बिल ऐंड मेलिंडा फाउंडेशन- 
बिल ऐंड मेलिंडा फाउंडेशन की स्थापना गेट्स दंपती ने अपने नाम पर की थी ताकि अपने परोपकारी कार्यों को अंजाम दे सकें.

सबसे बड़ा दान-
वर्ष 2000 के बाद बिल गेट्स द्वारा किए गए अब तक दान में से यह सबसे सबसे बड़ा है. वर्ष 1999 में वह 16 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) की कीमत के शेयर दान कर चुके हैं. 
उसके अगले ही साल उन्होंने 5.1 अरब डॉलर (करीब 32,780 करोड़ रुपये) दान में दिए.

35 अरब डॉलर कर चुके है दान-
गेट्स फाउंडेशन की ओर से फाइल टैक्स रिटर्न्स, ऐनुअल रिपोर्ट्स और रेग्युलेटरी फाइलिंग्स की समीक्षा से ज्ञात हुआ है कि बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स साल 1994 से शेयर और कैश के रूप में 35 अरब डॉलर (करीब 2.24 लाख करोड़ रुपये) दान कर चुके हैं. 
गेट्स ने अरबपति निवेशक वॉरेन बफेट के साथ गिविंग प्लेज की स्थापना साल 2010 में की थी. तब से 168 दौलतमंद लोग उनसे जुड़ चुके हैं जिन्होंने अपनी संपत्ति का ज्यादातर हिस्सा दान करने का संकल्प लिया है.

भारत और स्वीडन के बीच बौद्धिक संपदा समझौता ज्ञापन को मंजूरी-(18-AUG-2017) C.A

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 अगस्त 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भारत और स्वीडन के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी. समझौता ज्ञापन में एक ऐसी व्यापक और सुगम व्यवस्था कायम करने का प्रावधान है जिसके जरिए दोनों देश बौद्धिक संपदा अधिकारों के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए उत्कृष्ट पद्धतियों और प्रौद्योगिकी का आदान प्रदान करेंगे और साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में मिलकर काम करेंगे.
यह समझने में सहयोग करना कि परम्परागत ज्ञान का संरक्षण कैसे किया जाये तथा डेटा बेस संबंधी परम्परागत जानकारी सहित उत्कृष्ट पद्धतियों का आदान-प्रदान और वर्तमान बौद्धिक संपदा प्रणालियां के बारे में जागरूकता बढ़ाना है. समझौता ज्ञापन के अंतर्गत एक संयुक्त समन्वय समिति बनाई जायेगी जो बहुत सारे क्षेत्रों में सहयोग गतिविधियों के बारे में निर्णय करेगी.
संयुक्त रूप से या किसी एक राष्ट्र द्वारा आयोजित कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्यम से उद्योगों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान और विकास संगठनों तथा लघु और मध्यम उद्यमों के बीच बौद्धिक संपदा के बारे में उत्कृष्ट पद्धतियों, अनुभवों और जानकारी का आदान-प्रदान करना.
मुख्य तथ्य:
•    दोनों देशों के लोगों, व्यापारियों और शैक्षिक संस्थानों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों के बारे में उत्कृष्ट पद्धतियों, अनुभवों और जानकारी का आदान प्रदान करना.
•    प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोग, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान, तकनीकी आदान-प्रदान और संपर्क गतिविधियाँ.
•    पेटेंटों, ट्रेडमार्कों, औद्योगिक डिजाइनों, कापीराइटों और भौगोलिक संकेतकों और साथ ही बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण, प्रवर्तन और इस्तेमाल संबंधी आवेदनों के निपटान के लिए उत्कृष्ट पद्धतियों, अनुभवों और जानकारी का आदान-प्रदान.
•    बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में आटोमेशन और आधुनिकीकरण परियोजनाओं के कार्यान्वयन, नव प्रलेखन और सूचना प्रणालियों और बौद्धिक संपदा के प्रबंधन की प्रक्रियाओं के विकास में सहयोग.
•    डिजिटल वातावरण, विशेषकर कॉपीराईट मुद्दों में बौद्धिक संपदा कानून के उल्लंघनों के बारे में जानकारी और उत्‍कृष्‍ट पद्धतियों का आदान-प्रदान करना.
•    अन्य सहयोगात्मक गतिविधियां, जो दोनों पक्षों द्वारा आपसी समझ-बूझ से तय की जा सकती है.
प्रभाव:
समझौता ज्ञापन भारत को बौद्धिक संपदा प्रणालियों में अनुभव का आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाएगा, जिससे दोनों देशों के उद्यमियों, निवेशकों और व्यापारियों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचेगा. दोनों देशों के बीच उत्कृष्ट पद्धतियों के आदान प्रदान से भारत के विविध प्रकार के बौद्धिक अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ेगी और उनका बेहतर संरक्षण किया जा सकेगा. यह समझौता वैश्विक नवाचार के क्षेत्र में एक बड़ी शक्ति बनने की भारत की यात्रा में ऐतिहासिक सिद्ध होगा और राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति के लक्ष्यों को बढ़ावा देगा. ये अधिकार उतने ही विविध हैं जितनी विविधता भारत के लोगों में है.
स्रोत(पीआईबी)

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी रिपोर्ट जारी-(18-AUG-2017) C.A

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अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने 15 अगस्त 2017 को वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वर्ष 2016 हेतु अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट (आईआरएफआर) जारी की. 

अमेरिका द्वारा जारी इस रिपोर्ट में विभिन्न धर्मों के लोगों के साथ अलग-अलग देशों में हो रहे बर्ताव के बारे में जानकारी दी गयी है. इस रिपोर्ट में भारतीय हिन्दुओं के साथ पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों के बारे में भी जानकारी दी गयी है.

भारत के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट (आईआरएफआर)

•    इस रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश, पाकिस्तान और अन्य स्थानों पर हिंदुओं पर हुए हमलों की घटनाएं देखने को मिली हैं जबकि फ्रांस और डेनमार्क में सिखों पर प्रतिबंध लगाए गये.

•    बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किये गये जिनमें हिन्दुओं की संख्या अच्छी-खासी है. इन हमलों के लिए अलकायदा और इस्लामिक स्टेट को जिम्मेदार माना गया.

•    रिपोर्ट के अनुसार इस्लाम की आलोचना संबंधी एक फेसबुक पोस्ट के बाद पूर्वी बांग्लादेश में सैकड़ों ग्रामीणों ने 50 से अधिक हिंदू घरों और 15 हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की.

•    बांग्लादेश की घटनाओं के बारे में कहा गया कि आतंकवादी संगठनों द्वारा किए गए हमलों में लगभग 24 लोगों की मौत हो गई, जिनमें हिंदू, ईसाई, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यक शामिल थे.

•    आईआरएफआर के अनुसार फ्रांसीसी सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में सिखों के पगड़ी पहनने पर रोक लगाई गयी है जबकि डेनमार्क में न्यायधीशों पर पगड़ी पहनने पर प्रतिबंध है.

•    रिपोर्ट के अनुसार, मलेशिया में अप्रैल से नवंबर 2016 के बीच कम से कम आठ हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की गई.

केंद्र सरकार ने गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस संवाद की शुरूआत की-(18-AUG-2017) C.A

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सरकार ने गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस (जीईएम) एसपीवी और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के बीच आज एक सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. इस अवसर पर वाणिज्य और उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमन मौजूद थी. सहमति ज्ञापन पर जीईएम एसपीवी की ओर से जीईएम की सीईओ एस.राधा चौहान और सीआईआई की ओर से सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने हस्ताक्षर किए.
मुख्य तथ्य:
इस सहमति ज्ञापन का उद्देश्य भारतीय उद्योग और उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए उद्योग के साथ सहभागी और सहयोगपूर्ण दृष्टिकोण कायम करने के लिए जीईएम संवाद स्थापित करना है. इस पहल के तहत जीईएम और भारतीय उद्योग मिलकर काम कर सकेंगे. इस पहल के तहत जीईएम और भारतीय उद्योग इस तरह मिलकर काम करेंगे.
जीईएम से जुड़ी जागरूकता पैदा करने और देशभर से उद्योग से जुड़े सदस्यों को शामिल करने.
भारतीय उद्योग के साथ सहयोग के लिए एक जीईएम उद्योग मंच बनाने जिससे उत्पादों के तकनीकी ब्यौरे और सरकारी एजेंसियों द्वारा प्राप्त की जाने वाली सेवाओं के एसएलए के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके.
उत्पादों या सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार खासतौर से जिन्हें एमएसएमई से प्राप्त किया गया है, सभी साझेदारों का वार्षिक लोक उपार्जन सम्मेलन आयोजित करने और सीआईआई के क्षेत्रीय कार्यालयों में जीईएम संसाधन केन्द्रों की स्थापना करने के लिए.
स्रोत(PIB)

वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला पौधा-आधारित ज़िका वैक्सीन विकसित किया-(18-AUG-2017) C.A

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अमेरिका के वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला पौधा आधारित ज़िका वैक्सीन विकसित किया है, जो कि अन्य टीकों की तुलना में अधिक प्रभावी, सुरक्षित और सस्ता हो सकता है. इस टीका को तम्बाकू संयंत्र से प्राप्त प्रोटीन का उपयोग करके विकसित किया गया. वर्तमान में, जिका से निपटने के लिए विश्व भर मैं कोई  भी लाइसेंस प्राप्त टीका या चिकित्सा उपलब्ध नहीं है.

ज़िका वायरस

ज़िका विषाणु मुख्य रूप से एडीज एजेपिटी मच्छरों द्वारा प्रेषित वेक्टर जनित रोग है, वही मच्छर जो डेंगू, पश्चिम नाइल बुखार, येलो वायरस इत्यादि का भी वाहक है. इसका नाम युगांडा में ज़िका जंगल के नाम पर रखा गया है जहां पहले 1947 में इसे अलग किया गया था। वायरस गंभीर जन्म दोषों के लिए सक्षम है यानी न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और भ्रूण विकृति जिसे माइक्रोसेफली कहा जाता है जिसमें शिशुओं के असामान्य रूप से छोटे सिर के साथ पैदा होते हैं। वायरस और गिलेन-बैर सिंड्रोम (एक ऐसी स्थिति जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिका तंत्र का हिस्सा है) के बीच एक संभावित कड़ी के अलावा भी संदेह है यह भी पाया जाता है कि, ज़िका वायरस रोग का यौन संचरण संभव है। इस वायरस का दंश अबसे अधिक् गर्भवती महिलाओं को झेलना पड़ा. इससे पीड़ित नवजात शिशु में गंभीर मस्तिष्क विकार पैदा होने लगते हैं. 

विश्व भर में यह रोग सबसे पहले 2015 में फैला, जिसने दक्षिणी-अमेरिका मैं लाखों लोगों को संक्रमित किया. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस बीमारी को महामारी के रूप में घोषित किया. इसके जवाब में, ज़िका को रोकने के लिए वैज्ञानिक प्रयासों की एक बहार से आने लगी और सारी सरकारी, अकादमिक प्रयोगशालाओं और फार्मास्युटिकल कंपनियां में ज़िका वैक्सीन विकसित करने के लिए दौड़ गई हैं।

नयी खोज:
प्लांट-आधारित ज़िका वैक्सीन डीआईआईआई के खिलाफ काम करती है, जो कि ज़िका वायरल प्रोटीन का एक हिस्सा है जो लोगों को संक्रमित करने के लिए वायरस के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सभी फ्लावीवायरस के बाहर भाग पर एन्वेल्प प्रोटीन (E-protein) होते हैं. इसमें तीन डोमेन हैं और डोमेन III में डीएनए का एक अद्वितीय खंड होता है. शोधकर्ताओं ने ज़िका के लिए एक मजबूत और सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए डोमेन III का उपयोग किया.
सबसे पहले उन्होंने बैक्टीरिया में एन्वेल्प प्रोटीन विकसित किया और तंबाकू पौधों में डीआईआई प्रोटीन डोमेन तैयार किया. चूहों पर किए गए इस टीका के कई प्रतिरक्षण प्रयोगों ने चूहों में कई ज़िका वायरस के खिलाफ शत-प्रतिशत सुरक्षा दिखाया.

महत्व:
जब पूरा विश्व इस महामारी से जूझ रहा है ऐसे समय में इसके प्रतिरक्षा में वैक्सीन की खोज करोड़ों लोगो को इससे निजात दिलाने में सहायक होगा. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है की यह पौधा आधरित वैक्सीन है जिससे किसी अन्य प्रकार के दोषों के उत्पन्न होने की सम्भावना ना के बराबर है. विशेषतया यह वैक्सीन उन गरीब देशों को राहत प्रदान करेगा जो खुद से इस रोग को रोकने मैं सक्षम नहीं हैं.

वैज्ञानिकों द्वारा अंटार्कटिक में सबसे बड़े ज्वालामुखीय क्षेत्र की खोज-(18-AUG-2017) C.A

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ब्रिटिश वैज्ञानिकों द्वारा अगस्त 2017 के दूसरे सप्ताह में घोषणा की गयी कि उन्होंने अंटार्कटिक में बर्फ की चादर के नीचे विश्व के सबसे बड़े जवालामुखी क्षेत्र मौजूद होने की खोज की है. 

वैज्ञानिकों के अनुसार सतह से दो किलोमीटर नीचे लगभग 100 ज्वालामुखियों की मौजूदगी होने की संभावना है. एक ही स्थान पर इतने अधिक ज्वालामुखी मौजूद होने के कारण यह विश्व का सबसे बड़ा ज्वालामुखी क्षेत्र है.

प्रमुख बिंदु

•    इस खोज को ब्रिटेन के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा प्रमाणित किया गया.

•    वैज्ञानिकों के अनुसार इस क्षेत्र में 91 ज्वालामुखियों का हाल ही में पता लगाया गया है जबकि कुछ समय पहले ही 47 ज्वालामुखी खोजे जा चुके हैं. 

•    शोधकर्ताओं का दावा है कि यह ज्वालामुखी स्विट्जरलैंड के 4 हजार मीटर ऊंचे ईगर पर्वत जितने बड़े हो सकते हैं.

•    यह ज्वालामुखी 100 से 3850 मीटर ऊंचे हो सकते हैं.

•    यह ज्वालामुखी अंटार्कटिका प्रायद्वीप के रोज़ आईस शेल्फ से लगभग 3500 किमी दूर हैं.

•    एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के रॉबर्ट बिंघमद्वारा जारी बयान के अनुसार रोज़ आईस शेल्फ के नीचे स्थित समुद्र की सतह पर और और भी ज्वालामुखी मौजूद हो सकते हैं. 

•    यह पूर्वी अफ्रीका के ज्वालामुखी क्षेत्र से भी बड़ा है जहां माउंट न्यिरोगोंगो, किलिमंजारो, लोंगोनॉट और अन्य सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि इनमें से कोई भी ज्वालामुखी फूट पड़ा तो वह पश्चिम अंटार्कटिका की बर्फ की चादरों को अस्थिर कर सकता है. शोधकर्ताओं के अनुसार वर्तमान में अधिकांश ज्वालामुखी उन क्षेत्रों में हैं जहां ग्लेशियर खत्म हो चुके हैं. उनके मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसा पश्चिमी अंटार्कटिका में भी हो सकता है.

केंद्र सरकार ने प्रसून जोशी को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का अध्‍यक्ष नियुक्‍त किया-(14-AUG-2017) C.A

| Monday, August 14, 2017
केंद्र सरकार ने प्रसून जोशी को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी/CBFC) का अध्‍यक्ष नियुक्‍त किया है. प्रसून जोशी की यह नियुक्‍ति मानद हैसियत से 11 अगस्‍त, 2017 से प्रभावी हो गई.

केंद्र सरकार ने यह नियुक्ति सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 1983 के नियम 3 के साथ सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 (1952 की 37) की धारा 3 की उप-धारा (1) के तहत की है.

प्रसून जोशी की नियुक्‍ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से लेकर अगले तीन वर्षों तक अथवा अगले आदेश तक, इनमें से जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी, तक की गई है. इससे पहले इस पद पर से पहलाज निहलानी अपनी सेवाएं दे रहे थे. 

वर्ष 2014 के आम चुनाव में प्रसून जोशी ने बीजेपी के लिए 'मैं देश नहीं झुकने दूंगा' प्रचार गीत बनाया.  इसके बाद भी प्रसून बीजेपी के लिए विभिन्न विधान सभा चुनावों में सहयोग करते रहे.
प्रसून जोशी के बारे में-
  • नए सेंसर बोर्ड चेयरमैन प्रसून जोशी एक फेमस ऐडमेकर हैं.
  • प्रसून जोशी सबसे पहले ऐड कंपनी ओ एंड एम/ O&M में काम कर चुके हैं.
  • 'ठण्डा मतलब कोका कोला' इस पंचलाइन के साथ 'कोक' को सॉफ्ट ड्रिंक के बाजार में मजबूती के साथ दोबारा प्रसून जोशी ने ही खड़ा किया.
  • इसके बाद प्रसून जोशी ऐड कंपनी 'मैकऐन इरिक्सन' में कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे.
  • वर्ष 2001 में राजकुमार संतोषी की फिल्म 'लज्जा' से प्रसून को बॉलीवुड में एंट्री मिली.
  • वर्ष 2007 में आई फिल्म 'तारे जमीन पर' के लिए प्रसून को 'राष्ट्रीय पुरस्कार' भी प्रदान किया गया.
  • वर्ष 2015 में उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के प्रचार अभियान में प्रसून ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

पाकिस्तान की 'मदर टेरेसा' का निधन-(13-AUG-2017) C.A

| Sunday, August 13, 2017
पाकिस्तान की 'मदर टेरेसा' की उपाधि से सम्मानित डॉक्टर रूथ फ़ॉ का 87 वर्ष की अवस्था में कराची के अस्पताल में निधन हो गया है. फ़ॉ ने अपना पूरा जीवन पाकिस्तान में कुष्ठ रोग के उन्मूलन के लिए काम करते हुए बिताया. डॉ. फ़ॉ भले ही जर्मनी में पैदा हुई थीं, लेकिन उनका दिल हमेशा पाकिस्तान में रहा.

डॉ. फ़ॉ ने साल 1960 में पाकिस्तान में कुष्ठ रोग पहली बार देखा और उसके बाद वह देशभर में क्लिनिक स्थापित करने का मक़सद लेकर लौटीं. डॉक्टर रूथ फ़ॉ के प्रयासों की बदौलत ही 1996 में पकिस्तान में यह घोषणा की जा सकी कि बीमारी अब नियंत्रण में आ गई है.
डॉक्टर रूथ फ़ॉ के बारे में-
  • डॉ. फ़ॉ का जन्म लिपज़िक में वर्ष 1929 में हुआ.
  • डॉ. फ़ॉ को पाकिस्तान और जर्मनी में कई अवॉर्ड प्रदान किए गए.
  • डॉ. फ़ॉ को पाकिस्तान के दूसरे प्रमुख नागरिक सम्मान हिलाल ए इम्तियाज़ से साल 1979 में सम्मानित किया गया. वर्ष 1989 में उन्हें हिलाल ए पाकिस्तान और 2015 में जर्मन स्टॉफ़र मेडल से सम्मानित किया गया.
  • दूसरे विश्व युद्ध में उनका घर बमबारी में तबाह हो गया था.
  • डॉ. फ़ॉ ने मेडिसीन की पढ़ाई की और बाद में उन्हें दक्षिण भारत जाने का आदेश दिया गया. वीज़ा की परेशानी के चलते उन्हें कराची में रुकना पड़ा.
  • डॉ. रूथ उस समय पाकिस्तान आई थीं जब पाकिस्तान के बनने के शुरुआती साल थे.
  • डॉ. फ़ॉ के अनुसार उनका पहला मरीज़ एक युवा पठान था जो हाथों और पैरों के बल घिसट कर चलते हुए डिस्पेंसरी पहुंचा.
  • उन्होंने कुष्ठ रोग से प्रभावित हज़ारों लोगों को नई ज़िंदगी दी. डॉक्टर रूथ फ़ॉ ने पाकिस्तानी डॉक्टरों को प्रशिक्षित भी किया.
  • उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम की शुरुआत में विदेशों से भी पैसे जुटाने में मदद की.
  • वर्ष 2010 में जब पाकिस्तान में तबाही मचाने वाली बाढ़ में डॉ. फ़ॉ ने पीड़ितों की मदद की, जो सराहनीय थी.
  • पाकिस्तान में अपने काम के बारे में डॉ. फ़ॉ ने जर्मन में चार किताबें लिखीं. उनकी किताब 'टू लाइट ए कैंडल' को अंग्रेज़ी में अनुवादित किया गया.

प्रधानमंत्री अब्बासी के अनुसार डॉक्टर रूथ फ़ॉ यहां कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों का जीवन बेहतर बनाने आई थीं और ऐसा करते हुए वो यहीं की होकर रह गईं.'

वेंकैया नायडू ने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की-(12-AUG-2017) C.A

| Saturday, August 12, 2017
वेंकैया नायडू ने 11 अगस्त 2017 को भारत के 13वें उपराष्ट्रपति के तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की. वेंकैया नायडू का पद शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में आयोजित किया गया.
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. उपराष्ट्रपति पद की शपथ से पहले वेंकैया नायडू ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित किया. वेंकैया नायडू ने हिंदी में शपथ ली. उन्होंने इसके बाद सदन की कार्यवाही में सभापति के तौर पर हिस्सा लिया.
उपराष्ट्रपति के तौर पर नायडू राज्यसभा के सभापति होंगे और सरकार को उम्मीद है कि सदन में उनकी मौजूदगी से उसे ज्यादा सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलेगी.
वेंकैया नायडू के बारे में:
•    वेंकैया नायडू का जन्म 1 जुलाई 1949 को आंध्र प्रदेश में हुआ था.
•    वे वर्ष 2002 से वर्ष 2004 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं.
•    वे वाजपेयी के नेतृत्व वाली पिछली राजग सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री थे.
•    वे वर्ष 2004, 2010 और 2016 में राज्यसभा के सांसद रहे.
•    वे वर्ष 1983 में भी विधानसभा पहुंचे और धीरे-धीरे राज्य में भाजपा के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे.
•    वे मोदी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री और आवास एवं शहरी विकास मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इससे पहले वे संसदीय कार्य मंत्री का पदभार भी संभाल चुके हैं.
•    वे वर्ष 1974 में आंध्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुये.
•    वे कुछ दिनों तक आंध्र प्रदेश के छात्र संगठन समिति के संयोजक भी रह चुके हैं.
•    वेंकैया नायडू की पहचान हमेशा एक 'आंदोलनकारी' के रूप में रही है.