पिचाई समेत चार भारतीयों को अमेरिकी गौरव पुरस्कार-(01-JUL-2016) C.A

| Friday, July 1, 2016
भारतीय मूल के चार अमेरिकीयों को 29 जून 2016 को अमेरिका के गौरव (ग्रेट इमीग्रेंट्स : द प्राइड ऑफ अमेरिका) पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. यह पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है.
दुनिया के अन्य देशों से अमेरिका में आवासित होने वाले कुल 42 व्यक्तियों को इस पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा. 42 लोगों में भारतीय मूल के गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई सहित तीन अन्य लोग शामिल हैं.

तीन अन्य भारतीयों में पीबीएस न्यूजआवर के एंकर व वरिष्ठ संवाददाता हरी श्रीनिवासन, मैकिंसे एंड कंपनी के चेयरमैन विक्रम मल्होत्रा और लेखक व आलोचक, नेशनल बुक क्रिटिक्स सर्किल पुरस्कार विजेता भारती मुखर्जी हैं.
  • कार्नेगी कॉर्पोरेशन की ओर से ये पुरस्कार न्यूयॉर्क में 30 जून को दिए जाएंगे.
  • जिन 42 लोगों को पुरस्कारों के लिए चुना गया है, वे 30 विभिन्न देशों से हैं.
  • ‘गिल्डर, गैगनोन, होपवे एंड कंपनी’ की पाकिस्तानी अमेरिकी साझेदार शाइजा रिजवी का नाम भी पुरस्कार के लिए नामित लोगों में शामिल है।
  • कार्नेगी कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष वर्तन ग्रेगोरियन के अनुसार ये लोग उन लाखों आव्रजकों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो अमेरिका में आर्थिक कारणों, शिक्षा प्राप्त करने, राजनीतिक या धार्मिक शरण लेने या सुरक्षा की दृष्टि से आए.
सुंदर पिचाई के बारे में-
सुंदर पिचाई को पिछले साल अगस्त के महीने में सर्च इंजन गूगल का सीईओ बनाया गया था. चेन्नई में जन्मे 43 साल के सुंदर पिचाई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर से स्नातक हैं. वह भारतीय मूल के दूसरे ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें आईटी कंपनी की कमान सौंपी गई है। सीईओ बनाए जाने से पहले सुंदर गूगल में वाइस प्रेसीडेंट के पद पर तैनात थे.

स्वदेश निर्मित लड़ाकू विमान तेजस भारतीय वायु सेना में शामिल-(01-JUL-2016) C.A

|
tejasस्वदेश में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस को 1 जुलाई 2016 को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया. वायुसेना में दो तेजस विमानों को शामिल करके पहले स्क्वॉड्रन का गठन किया गया.

इन विमानों का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा किया गया. पहले स्क्वॉड्रन का नाम फ्लाइंग डैगर्स-45 रखा गया. मार्च 2017 तक छह और तेजस मिलने की संभावना है जबकि दो वर्षों में 16 तेजस विमान वायुसेना में शामिल किये जाने की योजना बनाई गयी है.

तेजस ने अपनी निर्माण एवं विकास प्रक्रिया के दौरान ढाई हजार घंटे का सफर तय किया जिसमें इस विमान ने तीन हज़ार बार सफलतापूर्वक उड़ान भरी. तेजस ने पहली उड़ान 4 जनवरी 2001 को भरी थी इसके बाद अब तक यह कुल 3184 बार सफल उड़ान भर चुका है.
तेजस की विशेषताएं

•    यह हल्का लड़ाकू विमान है जो 50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है.

•    इसका वजन 6560 किलोग्राम है तथा इसके पंखों की चौड़ाई 8.20 मीटर है. इसकी लम्बाई 3.20 मीटर और ऊंचाई 4.40 मीटर है.

•    तेजस हवा से हवा में मार करने वाली डर्बी मिसाइलों और जमीन पर स्थित निशाने के लिए आधुनिक लेजर डेजिग्नेटर और टारगेटिंग पॉड्स से लैस है.

•    इसमें सेंसर तरंग रडार लगाया गया है जो दुश्मन के विमान या जमीन से हवा में दागी गई मिसाइल के तेजस के पास आने की सूचना देता है.

•    स्वदेश निर्मित तेजस भारतीय वायुसेना को पुराने पड़ चुके मिग-21 विमानों का विकल्पस उपलब्धव कराएगा.

•    विमान का ढांचा कार्बन फाइबर से निर्मित है  जो धातु की तुलना में कहीं ज्या दा हल्काब और मजबूत है.

केंद्र सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों की वित्तीय शक्तियों में बढ़ोतरी की-(01-JUL-2016) C.A

|
केंद्र सरकार ने 28 जून 2016 को गैर योजनागत योजनाओं/परियोजनाओं की मंजूरी के लिए सक्षम अधिकारियों के वित्तीय सीमा में संशोधन किया.
संबंधित मुख्य तथ्य:
संशोधित नियम के अनुसार गैर-योजना व्यय (सीएनई) पर बनी समिति, जो केन्द्र  सरकार के मंत्रालयों/विभागों से जुड़े सभी गैर-योजना प्रस्तावों का मूल्यांकन करती है, वह अब 300 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी. इससे पहले यह सीमा 75 करोड़ रुपये थी.
गैर-योजनागत योजनाएं/300 करोड़ रुपये से कम की योजनाओं का मूल्यांकन अब मंत्रालय/वित्त मंत्रालय की स्टैंगडिंग कमेटी द्वारा किया जा सकता है.
गैर-योजनागत योजनाओं/परियोजनाओं के अनुमोदन के लिए प्रशासनिक मंत्रालय के प्रभारी मंत्री की वित्तीय शक्तियों को भी बढ़ाया गया है.
उनके तरफ से 500 करोड़ रुपये तक की योजनाओं को मंजूरी दी जा सकती है. इससे पहले यह सीमा 150 करोड़ रुपये से कम थी.
500 करोड़ रुपये या उससे अधिक और 1000 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं के लिए वित्त मंत्री के पास ही वित्तीय अनुमोदन का अधिकार होगा.
1000 करोड़ रुपये और उससे ऊपर की वित्ती‍य सीमा के लिए कैबिनेट/आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति से अनुमोदन लेना पड़ेगा.
इसी तरह मूल्यांकन और लागत अनुमान में वृद्धि की स्वीकृति संबंधी वित्तीआय सीमाओं में भी संशोधन किया गया है.

केंद्र सरकार ने ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग 42 के अंगूल-संबलपुर खंड को चार लेन करने की मंजूरी प्रदान की-(01-JUL-2016) C.A

|
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 जून 2016 को ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग 42 के अंगूल-संबलपुर खंड को चार लेन करने की मंजूरीप्रदान कर दी है.
निर्माण के बाद इस राजमार्ग का नया नाम राष्ट्रीय राजमार्ग 55 कर दिया जाएगा.
इस परियोजना पर लगभग भूमि अधिग्रहण, पुनरूद्धार और पुनर्वास और अन्य निर्माण पूर्व गतिविधियों सहित कुल लागत 2491.53 करोड़ होने का अनुमान है.
परियोजना के तहत कुल लगभग 151 किलोमीटर सड़क विकसित की जाएगी.

यह कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी) के चतुर्थ-चरण के तहत इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) आधार पर किया जाएगा.
परियोजना से लाभ-
  • इस परियोजना से ओडिशा में बुनियादी ढांचे के सुधार में तेजी आएगी और अंगूल तथा संबलपुर के बीच समय के साथ-साथ पैसे की भी बचत होगी साथ ही लोगों को ट्रैफिक से भी निजात मिलेगा। इस क्षेत्र में विकास होने से राज्य के लोगों के सामाजिक-आर्थिक पहलूओं में भी सुधार होगा.
  • इस परियोजना से स्थानीय मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर में वृद्धि होगी.
  • अनुमान के अनुसार 1 किलोमीटर सड़क बनाने में करीब 4076 श्रमिकों की आवश्यकता होगी.
  • जिससे करीब इस क्षेत्र के 616600 लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे.

भारतीय डाक ने व्यक्ति और कॉरपोरेट के लिए ‘माय स्टाम्प ' योजना प्रारंभ किया-(01-JUL-2016) C.A

|
भारतीय डाक ने जून 2016 में व्यक्ति और कॉरपोरेट के लिए ‘माय स्टाम्प’ योजना प्रारंभ किया. कोई भी व्यक्ति या कारपोरेट इकाई अब 12 लाख रुपये में डाकटिकट में अपना फोटो या प्रतीक चिन्ह (लोगो) छपवा सकती है.
इसके तहत 60000 डाकटिकटों वाली 5000 शीट छापी जाएंगी. अब तक डाक विभाग ने केवल 300 रपये वाली ‘माय स्टांप' शीट पर डाक टिकट के पास फोटो या डिजाइन छपवाने की अनुमति दे रखी थी.
माय स्टाम्प ने वित्त वर्ष 2016-17 में दो करोड़ रुपये प्राप्त करने में भारतीय डाक की मदद की.
माय स्टाम्प का कुल राजकोषीय आय 2015-16 में 2.83 करोड़ रुपए था.
माय स्टाम्प ग्राहक को अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों जैसे बच्चे का जन्म, विवाहोत्सव तथा उनके जीवन का अभिन्न अंग बन चुके ऐसे अन्य आनंददायक अवसरों को यादगार बनाने का अनूठा अवसर प्रदान करता है.
इन डाक – टिकटों को उपहारस्वरुप देने के साथ – साथ डाक – शुल्क के रूप में प्रयोग किया जा सकता है.
माय स्टाम्प योजना का उद्देश्य ग्राहकों को निजी पसंद के अनुसार डाक – टिकट बनवाने का अवसर प्रदान करना है, जिस पर वे अपनी अथवा अपने प्रियजनों की फोटो अथवा हैरीटेज भवन, उनके प्रतीक चिन्ह आदि की फोटो का अंकन करा सकते है.

सुप्रीम कोर्ट ने समलेंगिको को ट्रांसजेंडर की श्रेणी में शामिल करने से इनकार किया-(01-JUL-2016) C.A

|
सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून 2016 को समलेंगिको को ट्रांसजेंडर की श्रेणी में शामिल करने से इनकार कर दिया. समलेंगिको ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका के माध्यम से मांग की थी कि उन्हें ट्रांसजेंडर की श्रेणी में शामिल किया जाय.
फैसले में जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस एनवी रमना की पीठ ने स्पष्ट किया कि पूर्व में 15 अप्रैल 2014 के आदेश से पूरी तरह स्पष्ट है कि समलैंगिक महिला, पुरुष और उभयलिंगी लोग ट्रांसजेंडर नहीं हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडरों पर अपने 2014 के आदेश में संशोधन से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि समलैंगिक महिला, पुरुष और उभयलिंगी लोग तीसरा लिंग यानी ट्रांसजेंडर नहीं हैं.

केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) मनिंदर सिंह ने सुनवाई के दौरान कहा कि पूर्व के आदेश से यह स्पष्ट नहीं है कि समलैंगिक महिला, पुरुष व उभयलिंगी लोग ट्रांसजेंडर हैं या नहीं.
उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक स्पष्टता की आवश्यकता है.

ट्रांसजेंडरों की दलील-

  • ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि केंद्र शीर्ष न्यायालय के 2014 के आदेश को पिछले दो साल से यह कहकर क्रियान्वित नहीं कर रहा है कि उसे ट्रांसजेंडरों के मुद्दे पर स्पष्टता की आवश्यकता है.
  • इस आदेश में कोर्ट ने ट्रांसजेंडरों को ओबीसी का दर्जा देने का निर्देश दिया था.
न्यायलय का स्पष्टीकरण-
  • पीठ इस पर नाराज हो गई और एएसजी से पूछा, हमें अर्जी को क्यों न जुर्माने के साथ खारिज कर देना चाहिए.
  • पीठ ने कहा, किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है.
  • यह बिल्कुल साफ है कि समलिंगी ट्रांसजेंडर नहीं हो सकते.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दी-(01-JUL-2016) C.A

|
7th   Pay Commissionकेंद्रीय मंत्रिमंडल ने 29 जून 2016 को 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है. यह फैसला 1जनवरी 2016 से प्रभावी रहेगा. अब केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी 23.55 फीसदी तक बढ़ जाएगी. यह बढ़ोतरी पिछले 70 साल में आयोगों की सिफारिशों में सबसे कम बताई जा रही है.
स्वीकृत सिफारिशें निम्न है:
•    वेतन आयोग ने कर्मचारियों का न्यू:नतम वेतन 18000 रुपए प्रति माह करने की सिफारिश की है.
•    वेतन आयोग ने कर्मचारियों का अधिकतम 225000 रुपये (कैबिनेट सचिव और इस स्तर के अधिकारी के लिए 250000 रुपये) की सिफारिश की है.
•    वेतन आयोग की रिपोर्ट में मौजूदा कर्मचारियों के मूल वेतन में 16%, भत्तों में 63% और पेंशन में 24% इजाफे किया गया है.
•    कर्मचारियों के लिए वार्षिक वेतन वृद्धि की दर 3 प्रतिशत किया गया है.
•    नए वेतन ढांचे में सातवे वेतन आयोग ने छठे वेतन आयोग की शुरू की गई ‘पे ग्रेड’ व्यवस्था खत्म कर इसे वेतन के मैट्रिक्स (ढांचे) में शामिल कर दिया है और कर्मचारी का पद अब ग्रेड पे की जगह नए ढांचे के वेतन से तय होगा.
•    आयोग ने ‘पे बैंड' और ‘ग्रेड पे' की प्रणाली खत्म करने की सिफारिश की है और वेतन में वार्षिक 3 प्रतिशत की वृद्धि की व्यवस्था को बरकरार रखा है. इसके साथ ही सभी कर्मचारियों के लिए 2.57 के फिटमेंट-फैक्टर लागू करने की सिफारिश की है.
•    7वें वेतन आयोग ने सैन्य बलों की तर्ज पर केंद्र सरकार के हर विभाग में वन रैंक वन पेंशन लागू किए जाने की सिफारिश की है. आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा है कि ओआरओपी न सिर्फ सेना बल्कि अर्धसैनिक बलों और सिविल सेवाओं में भी लागू किया.
•    ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गई और जब कभी महंगाई भत्ता (डीए) 50 प्रतिशत तक बढ़ेगा तो ग्रैच्यूटी की सीमा में 25 प्रतिशत की वृद्धि की है.
•    शॉर्ट सर्विस कमीशन के अधिकारियों को सेवा के 7 से 10 वर्ष के बीच नौकरी छोड़ने की अनुमति होगी.
•    आयोग ने कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना की सिफारिश की है. इस बीच, सीजीएचएस का फायदा नहीं पा रहे पेंशनभोगियों के लाभ के लिए सीजीएचएस को उन अस्पतालों को अपने पैनल में शामिल करना चाहिए जो इन पेंशनभोगियों की नकदीरहित चिकित्सा जरूरतें पूरी करने के लिए सीएस (एमए) ईसीएचएस के तहत पैनल में हैं.
•    डाक विभाग के सभी पेंशनभोगियों को सीजीएचएस के दायरे में लाया और सभी डाक डिस्पेंसरीज को सीजीएचएस में समाहित कर दिया.
•    केंद्रीय कर्मियों की सामूहिक बीमा योजना के तहत अंशदान की दर और बीमा का कवरेज उपयुक्त तरीके से बढ़ाया गया है. इसके तहत उच्चतम वेतन स्तर पर मासिक कटौती 120 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 5,000 रुपए और बीमा कवरेज 1.2 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है.
•    वेतन ढांचे में सबसे निचले स्तर पर यह कटौती 30 से बढ़ाकर 1500 रुपए और बीमा कवरेज 30,000 से बढ़ाकर 15 लाख रुपए की गई है. आयोग की सिफारिशों के अनुसार, अब कर्मचारियों को बिना ब्याज वाले अग्रिम की कोई सुविधा नहीं मिलेगी और मकान खरीदने के लिए ब्याज वाले अग्रिम की सीमा 7.5 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपए कर दी गई है.
•    संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (एमएसीपी) के तहत आयोग ने प्रस्ताव किया है कि जो कर्मचारी एमएसीपी या प्रथम 20 वर्ष की सेवा के बाद नियमित प्रोन्नति के मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी. आयोग ने कार्य प्रदर्शन पर आधारित वेतन (पीआरपी) की भी सिफारिश की है जो सभी दर्जे के कर्मचारियों के लिए होगी.
•    कर्मचारी की मृत्यु पर परिवार के निकटतम व्यक्ति के लिए एकमुश्त मुआवजा की दरों में भी संशोधन का सुझाव दिया है जो रक्षा बलों के कर्मचारियों और असैन्य कर्मचारियों व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मचारियों के लिए समान रूप से लागू होगा.
•    नई पेंशन योजना से जुड़ी शिकायतों को देखते हुए आयोग ने योजना की कार्यप्रणाली में सुधार करने और शिकायत निवारण व्यवस्था करने की सिफारिश की है.
•    सभी सीएपीएफ कर्मियों के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र 60 साल होना चाहिए.
पृष्ठभूमि:
7वें केन्द्रीय वेतन आयोग को तत्कालीन केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और रक्षा एवं रेलवे सहित केंद्र सरकार के पेंशनरों के पारिश्रमिक को संशोधित करने हेतु फरवरी 2014 में स्थापित किया गया.
सरकार ने अपने कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन करने के लिए प्रत्येक 10 वर्ष पर वेतन आयोग का गठन करती है और कुछ संशोधनों के बाद अधिकांश सिफारिशों राज्यों द्वारा अपना लिया जाता है.

समीर नेशनल इंटर-स्टेट एथलेटिक्स में सबसे तेज़ फर्राटा धावक बने-(01-JUL-2016) C.A

|
Sameer Monभारत के वरिष्ठ फर्राटा धावक समीर मोन ने 30 जून 2016 को 100 मीटर डैश में 10.60 सेकेंड का समय निकालकर 56वीं राष्ट्रीय इंटर स्टेट एथलेटिक्स प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक जीता.

इस रिकॉर्ड के साथ ही मणिपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे समीर देश के सबसे तेज़ दौड़ने वाले एथलीट बने.

32 वर्षीय समीर दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के 4X100 रिले रेस टीम का हिस्सा थे. इससे पहले उन्होंने वर्ष 2008 एवं 2011 में इंटर-स्टेट ख़िताब भी जीते.

56वें राष्ट्रीय इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के परिणाम –

महिला 100 मीटर डैश: कर्नाटक की रीना जॉर्ज ने 11.99 सेकेंड समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता. इससे पहले उन्होंने 400 मीटर डैश के पश्चात् 100 मीटर डैश खेला.
महिला पोल वॉल्ट: कर्नाटक की ख्याति वखारिया ने 3.80 मीटर की ऊंचाई हासिल करके स्वर्ण पदक जीता.

महिला 100 मीटर बाधा दौड़: केरल की एम सुगिना ने 14.17 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता.

पुरुष 110 मीटर बाधा दौड़: केरल के डी श्रीकांत ने 14.54 सेकेंड समय के साथ स्वर्ण पदक जीता.

महिला ट्रिपल जम्प: केरल की शिल्पा चाको ने 13.22 मीटर के साथ तीसरा स्वर्ण पदक जीता. 13 मीटर से अधिक की दूरी हासिल करने वाली वे इकलौती खिलाड़ी रहीं.

पुरुष 20 किलोमीटर पैदल चाल: बाबूभाई पनोचा ने 1 घंटा 31 मिनट और 26 सेकेंड का समय निकालकर तीसरी बार स्वर्ण पदक जीता.

अर्जेंटीना महिला टीम ने 7वीं बार चैंपियंस हॉकी ख़िताब जीता-(01-JUL-2016) C.A

|
अर्जेंटीना महिला टीम ने 27 जून 2016 को वर्ष 2016 की चैंपियंस हॉकी ट्रॉफी ख़िताब जीता. ख़िताब पाने के लिए अर्जेंटीना ने नीदरलैंड्स को 2-1 से हराया. 

फाइनल मुकाबला इंग्लैंड के ली वैली हॉकी एवं टेनिस सेंटर में आयोजित किया गया. अर्जेंटीना ने लगातार तीसरी बार यह ख़िताब जीता तथा कुल सातवां ख़िताब था.

टूर्नामेंट में अर्जेंटीना की कप्तान कार्ला रेबेची ने सबसे अधिक 7 गोल किये. नीदरलैंड्स की जॉयसी सोम्ब्रोक को श्रेष्ठ गोल कीपर का ख़िताब दिया गया.

कांस्य पदक की दौड़ के लिए अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया को हराया. अमेरिका का यह पहला चैंपियंस ट्रॉफी मेडल था. इससे पहले 1995 में उन्होंने अर्जेंटीना में मार डेल प्लाटा में कांस्य पदक जीता था.

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, हिमालय में पशुओं पर जलवायु परिवर्तन के असर पर अध्ययन करेगा-(01-JUL-2016) C.A

|
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ज़ेडएसआई) द्वारा 29 जून 2016 को पशुओं के जीवन में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का अध्ययन करने हेतु पांच चरणों वाला शोधकार्य आरंभ किया. यह परियोजना पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित है.

इस परियोजना के तहत ज़ेडएसआई, मछलियों, तितलियों एवं अन्य कीटों में जलवायु परिवर्तन के संकेतों को समझने का प्रयास करेगा तथा उनके जीवन पर इसके प्रभाव को भी मापेगा.
परियोजना कार्यान्वयन

•    एकत्रित किये गये आंकड़ों को ज़ेडएसआई के पास मौजूद पुराने आंकड़ों से मिलाया जायेगा.

•    इन आंकड़ों से ज़ेडएसआई जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन कर सकेगा.

परियोजना

•    यह परियोजना पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम एवं अरुणाचल प्रदेश में तीन वर्ष तक चलेगी.

•    इस परियोजना के लिए 2 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है.

•    वर्ष 2015 में भारत में 262 नई प्रजातियां पाई गयीं जिसमे 70 भारतीय प्राणी सर्वेक्षण द्वारा खोजी गयीं.

•    31 दिसम्बर 2015 तक भारत में 94515 जीव-जंतुओं की प्रजातियों के रिकॉर्ड दर्ज किये गये.

शोधकर्ताओं ने दो घंटे में गैर-आक्रामक रूप से कैंसर सेल समाप्त करने की विधि विकसित की-(01-JUL-2016) C.A

|
Tumour Cellsयूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्सास स्थित सैन एंटोनियो डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोलॉजी (यूटीएसए) के एसोसिएट प्रोफेसर मैथ्यू डोविन ने हाल ही में कैंसर सेल्स को समाप्त करने की नयी विधि का पेटेंट प्राप्त किया.

डोविन के इस शोध को 27 जून 2016 को द जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित किया गया.

इस शोध से जिन लोगों के ऑपरेशन अथवा ट्यूमर को ठीक करने के उपायों में परेशानी आती है उनका उपचार किया जा सकेगा.

विधि का आविष्कार

•    इसके अनुसार ट्यूमर में नाइट्रोबेन्ज़ालडीहाइड नामक केमिकल डाला जाता है जिससे यह टिश्यू में जाकर उसपर अपना प्रभाव डालता है.

•    लेजर बीम से उपचार के दौरान टिश्यू एसिडिक हो जाते हैं लेकिन इस उपचार द्वारा टिश्यू को समाप्त होना पड़ता है.

•    शोध में पाया गया कि दो घंटे में लगभग 95 प्रतिशत कैंसर सेल मर चुके थे.
इस विधि की उपयोगिता

•    डोविन ने इसका प्रयोग नेगेटिव ब्रैस्ट कैंसर पर किया, कैंसर का यह रूप महिलाओं में पाया जाने वाला सबसे अधिक रूप है.

•    इस प्रकार के कैंसर के बारे में किसी भी तरह का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता.

•    प्रयोगशाला में चूहों पर किये गये एक अध्ययन के अनुसार ट्यूमर ने बढ़ना रोक दिया जिससे चूहे के जीवित रहने की संभावना दोगुनी हो गयी.

चीन ने दूसरा शिजियन-16 सीरीज उपग्रह प्रक्षेपित किया-(01-JUL-2016) C.A

|
चीन ने 29 जून 2016 को दूसरा शिजियन-16 सीरीज़ का उपग्रह प्रक्षेपित किया. यह उपग्रह लॉन्ग मार्च-4बी रॉकेट द्वारा जियुक्वान सेटेलाईट लॉन्च सेंटर से प्रक्षेपित किया गया. 

शिजियन-16 उपग्रह अंतरिक्ष के वातावरण को मापने, विकिरण एवं उसके प्रभाव तथा प्रौद्योगिकी के परीक्षण के लिए उपयोग किया जाएगा.

पहला शिजियन-16 उपग्रह अक्टूबर 2013 को प्रक्षेपित किया गया था.

लॉन्ग मार्च रॉकेट की यह 231वीं उड़ान थी.  
लॉन्ग मार्च-4बी रॉकेट

•    इसका उपयोग समकालिक कक्षा के मौसम उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए किया जाता है.

•    पहली बार इसे मई 1999 में उपयोग किया गया. इसे शंघाई एकेडमी ऑफ़ स्पेस फ्लाइट टेक्नोलॉजी (एसएएसटी) द्वारा चांग जेंग-4 प्रणाली के आधार पर विकसित किया गया.

•    यह 2800 किलोग्राम के उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है.

•    इस रॉकेट का वजन 2,48,470 किलोग्राम है, इसकी लम्बाई 45.58 मीटर है तथा व्यास 3.35 मीटर है.

भारत ने ओडिशा में जमीन से हवा में वार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया-(01-JUL-2016) C.A

|
भारत ने 30 जून 2016 की सुबह सतह से हवा में वार करने वाली एक नई बैलेस्टि‍क मिसाइल का परीक्षण किया. इजराइल के साथ मिलकर तैयार की गई इस मिसाइल का ओडिशा के तट पर चांदीपुर स्थित रक्षा अड्डे (आईटीआर) से परीक्षण किया गया.

मीडियम रेंज (70 किमी) की इस मिसाइल को आईटीआर चांदीपुर से सुबह 8:15 बजे मोबाइल लॉन्चर से दागा गया. डीआरडीओ अधिकारियों के अनुसार  परीक्षण सफल रहा. 
यह मिसाइल मल्टी फंक्शनल सर्विलांस, ट्रेकिंग के लिए एमएफ स्टार (थ्रेट अलर्ट रडार) जैसे टूल्स से सुसज्जित है.

सात गांव के 3600 लोगों को दूर भेजा गया
  • सुरक्षा मानकों के द्रष्टिगत जिला प्रशासन ने परीक्षण के लिए आस पास के सात गांव के 3,652 लोगों को अस्थाई तौर पर हटाया.
  • ये लोग ओडिशा के बालासोर जिले में लॉन्च साइट के क्षेत्र के 2.5 किलोमीटर के क्षेत्र में रह रहे थे.
  • बालासोर, भद्रक और केंद्रपड़ा जिले के मछुआरों को लॉन्च के वक्त उस इलाके से दूर रहने के लिए कहा गया है.
  • वैज्ञानिकों ने 3D प्रिंटिंग के लिए स्टेम सेल्स से बायो–इंक बनाया-(01-JUL-2016) C.A

    |
    यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के वैज्ञानिकों के एक समूह ने स्टेम सेल वाला एक नया बायो– इंक (जैव– स्याही) बनाया है जो जटिल सजीव उतकों का 3D प्रिंटिंग कर सकता है. 
    नई स्टेम– सेल वाली जैव स्याही सजीव ऊतकों की 3D प्रिंटिंग की अनुमति देता है, इसे बायो– प्रिंटिंग कहा जाता है. 
    टीम की इस खोज को एडवांस्ड हेल्थकेयर मटेरियल्स नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया था.
    इस तकनीक की मुख्य विशेषताएं
    •    इस्तेमाल किए गए बायो– इंक (जैव– स्याही) में समुद्री शैवाल से मिलने वाला प्राकृतिक बहुलक (पॉलिमर) और चिकित्सा उद्योग में इस्तेमाल किया जाने वाला लाभहीन सिंथेटिक बहुलक (पॉलिमर) शामिल है. 
    •    जब कोशिका पोषक तत्वों को शामिल किया जाता है तब समुद्री शैवाल बहुलक संरचनात्मक समर्थन प्रदान करते हैं. 
    •    जैसे ही तापमान बढ़ता है सिंथेटिक बहुलक बायो–इंक (जैव– स्याही) को तरल से ठोस में बदल देते हैं. 
    •    विशेष बायो–इंक को रेट्रोफिट बेंचटॉप– 3D प्रिंटर से तैयार किया गया है जो 37°सेल्सियस पर तरल से जेल में बदल जाता है. सूत्रीकरण जटिल जीवित 3D वास्तुकलाओं के निर्माण की अनुमति देता है. 
    •    स्टेम सेल्स को ऑस्टियोब्लास्ट्स और कॉन्ड्रोसाइट्स में बांटा गया था. 
    •    ऑस्टियोब्लास्ट्स वैसी कोशिकाएं होते हैं जो अस्थि पदार्थ स्रावित करते हैं एवं कॉन्ड्रोसाइट्स वैसी कोशिकाएं होती है जो कार्टिलेज के मैट्रिक्स स्रावित करती हैं एवं फिर इन्हें इसमें लगाया जाता है. 
    •    इसके साथ, ऊतकों की संरचना में एक श्वसननली जैसी उपास्थि वलय था, जहां 5 सप्ताह से अधिक समय में 3D प्रिंटिंग की गई. 
    •    जब इसमें कोशिका पोषकतत्व मिलाए गए, सिंथेटिक बहुलक स्टेम सेल्स और प्राकृतिक समुद्री शैवाल बहुलक को छोड़ते हुए 3 D संरचना से पूरी तरह बाहर हो गए. 
    •    यह, इस प्रकार, संरचना में माइक्रोस्कोपिक छिद्रों का निर्माण किया, जिसने स्टेम सेल्स के लिए अधिक प्रभावी पोषकतत्व प्रदान किया.

    एलईडी की नीली रोशनी मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर कर सकती है: एएमए-(01-JUL-2016) C.A

    |
    LEDअमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (एएमए) द्वारा 14 जून 2016 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार लाइट एमिटिंग डियोड्स (एलईडी) द्वारा निकलने वाली रोशनी मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. एएमए ने अमेरिका की सड़कों पर लगाई गयी एलईडी प्रकाश व्यवस्था पर अध्ययन किया.

    एएमए ने एलईडी का चुनाव करने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किये ताकि इसके मानव और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके.

    एलईडी के प्रभाव

    •    यह नीली रोशनी मानवीय आँखों से सफेद दिखती है जिसका रात के समय आँखों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

    •    तेज़ नीली रोशनी से देखने की क्षमता में कमी तथा एकाग्रता भी प्रभावित होती है.

    •    सड़कों पर लगाई गयी नीली रोशनी का ड्राइवरों पर भी प्रभाव पड़ता है जिससे वाहन चलाते समय आँखें चौंधिया सकती हैं.

    •    यह देखा गया है कि एलईडी बल्ब की तुलना में साधारण रोशनी में सोने पर पांच गुना बेहतर परिणाम दिखाई देता है.

    •    इसका प्रभाव केवल मनुष्यों पर ही नहीं पड़ता अपितु जो प्राणी अंधेरे में रहना पसंद करते हैं उनके जीवन पर इसका सीधा असर पड़ता है. इनमें पक्षी, कीड़े-मकोड़े, कछुआ तथा मछलियों की कुछ प्रजातियां शामिल हैं जिन्हें एलईडी के कारण समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

    इससे पहले किये गए कुछ अध्ययनों में भी इसी प्रकार के आंकड़े प्रस्तुत किये गये थे. इसमें पाया गया कि जिन घरों में तेज़ रोशनी की जाती है वहां लोगों की निद्रा की अवधि कम हो गयी है. पूरी नींद नहीं लेने से लोगों में क्रोध, चिडचिडापन एवं मोटापे जैसी बीमारियां भी घर करती जा रही हैं.

    दिशा-निर्देश

    •    इसके तहत लोगों से नीली रोशनी वाले कम-से-कम बल्ब प्रयोग करने के लिए कहा गया.
    •    एलईडी लाइट्स को कवर कर के ही जलाया जाना चाहिए ताकि इसकी चौंध से होने वाले नुकसान से बचा जा सके.