छठा विश्व आयुर्वेद सम्मेलन (अखिल भारत आयुर्वेद महासम्मेलन) छह से
नौ नवंबर के बीच नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित किया गया. छठे विश्व
आयुर्वेद सम्मेलन का विषय‘स्वास्थ्य चुनौतियों और आयुर्वेद’था. छठे विश्व आयुर्वेद सम्मेलन में 24 देशों से 200
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों सहित लगभग 4,000 प्रतिभागीयों
ने हिस्सा लिया. सात आयुर्वेद विश्वविद्यालय और 270 आयुर्वेद
कॉलेजों ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया. आयुर्वेद सम्मेलन में भारत, जर्मनी, इटली, अमेरिका,
अर्जेंटीना, रूस तथा कई अन्य देशों के 750
वैज्ञानिकों मे शोध पेपर प्रस्तुत किए.
विश्व आयुर्वेद सम्मेलन का उद्देश्य आयुर्वेद के माध्यम से भारत और
विश्व स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल में सुधार लाना हैं. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य
आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना और एक समग्र
स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली स्थापित करना है, जिससे
वैश्विक स्वास्थ्य के लक्ष्य को पाया जा सके. सरकार ने 12वीं
पंचवर्षीय योजना के आयुष मिशन में 5,000 करोड़ रुपये का
आवंटन किया.
छठे विश्व आयुर्वेद सम्मेलन में राष्ट्रीय औषधि पौध बोर्ड द्वारा
आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा फार्मेक्सिल द्वारा आयोजित क्रेता-विक्रेता
सम्मेलन शामिल है. छठे विश्व आयुर्वेद सम्मेलन में प्रतिनिधियों और पर्यटकों के
रुप में राष्ट्रों के प्रमुख, नोबेल पुरस्कार
विजेताओं, प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता, नीति
निर्माताओं, विनिर्माण कंपनियों और दुनिया प्रख्यात
शिक्षाविदों के प्रमुखों ने भाग लिया.
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