14 नवंबर: विश्व मधुमेह दिवस
विश्व मधुमेह दिवस (World Diabetes Day) विश्वभर में 14 नवंबर 2014 को
मनाया गया. वर्ष 2009-2013 की अवधि के दौरान विश्व मधुमेह
दिवस का विषय-मधुमेह शिक्षा और निवारण है. प्रतिवर्ष 14 नवंबर
को विश्व मधुमेह दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य मधुमेह के प्रति
लोगों में जागरूकता पैदा करना है.
विश्व मधुमेह दिवस (World Diabetes Day)
• अंतरराष्ट्रीय मधुमेह संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इंसुलिन के आविष्कारक फ्रेडरिक के जन्म दिवस 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस के रूप में मनाया जाता है.
• दिसंबर 2006 में मधुमेह को संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रमों में शामिल किया गया था.
• निरन्तर मधुमेह रोगियों की संख्या में हो रही वृद्धि को देखते हुए वर्ष 1991 में अंतरराष्ट्रीय मधुमेह संघ एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संयुक्त रूप से इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने हेतु प्रति वर्ष विश्व मधुमेह दिवस आयोजित करने का विचार किया था.
• पहला विश्व मधुमेह दिवस वर्ष 1991 में मनाया गया था.
मधुमेह
मधुमेह शरीर में अग्नाशय द्वारा इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण होती है. रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है, साथ ही इन मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अवयव भी असामान्य हो जाते हैं. धमनियों में बदलाव होते हैं. इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है.
विश्व मधुमेह दिवस (World Diabetes Day)
• अंतरराष्ट्रीय मधुमेह संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इंसुलिन के आविष्कारक फ्रेडरिक के जन्म दिवस 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस के रूप में मनाया जाता है.
• दिसंबर 2006 में मधुमेह को संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रमों में शामिल किया गया था.
• निरन्तर मधुमेह रोगियों की संख्या में हो रही वृद्धि को देखते हुए वर्ष 1991 में अंतरराष्ट्रीय मधुमेह संघ एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संयुक्त रूप से इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने हेतु प्रति वर्ष विश्व मधुमेह दिवस आयोजित करने का विचार किया था.
• पहला विश्व मधुमेह दिवस वर्ष 1991 में मनाया गया था.
मधुमेह
मधुमेह शरीर में अग्नाशय द्वारा इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण होती है. रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है, साथ ही इन मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अवयव भी असामान्य हो जाते हैं. धमनियों में बदलाव होते हैं. इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है.
विदित हो कि वर्ष 2030 तक भारत में
मधुमेह रोगियों की संख्या 10 करोड़ पार कर जाने का अनुमान
है. मधुमेह एक जानलेवा बीमारी है, और स्वास्थ्य संबंधी अन्य
तमाम बीमारियों से जुड़ी हुई है. देश में जागरूक लोगों में भी बहुत कम व्यक्ति समय
से मधुमेह को लेकर चिकित्सा जांच करवाते हैं. उम्र के साथ होने वाले इस रोग से
बचाव के लिए शुरू से चिकित्सा जांच जरूरी है.
मधुमेह (डायबिटीज) का कारण
खान-पान की गलत आदतें, धूम्रपान की लत और अस्वस्थ जीवनशैली भारतीय युवाओं में मधुमेह (डायबिटीज) की आशंका को बढ़ाती है. मोटापा इसमें समस्या और बढ़ा देता है. ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली और मोटापे से दूर रहकर मधुमेह जैसी बीमारी से भी बचा जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, डायबिटीज एशिया की बड़ी सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभरी है, एशियाई सबसे अधिक मात्रा में मधुमेह का शिकार हो रहे हैं.
मधुमेह (डायबिटीज) का कारण
खान-पान की गलत आदतें, धूम्रपान की लत और अस्वस्थ जीवनशैली भारतीय युवाओं में मधुमेह (डायबिटीज) की आशंका को बढ़ाती है. मोटापा इसमें समस्या और बढ़ा देता है. ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली और मोटापे से दूर रहकर मधुमेह जैसी बीमारी से भी बचा जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, डायबिटीज एशिया की बड़ी सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभरी है, एशियाई सबसे अधिक मात्रा में मधुमेह का शिकार हो रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय मधुमेह फेडरेशन के अनुसार, भारत में वर्तमान समय में 6.5 करोड़ वयस्क मधुमेह की
समस्या से ग्रस्त हैं और लगभग 7.7 करोड़ लोगों में प्री
डायबिटीज की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं. इनके अनुसार, वर्ष 2035
तक यह आंकड़े 10.9 करोड़ तक पहुंचने की आशंका
जाताई जा रही है. 40 वर्ष से कम उम्र के, लगभग 15 प्रतिशत (1.5 करोड़)
लोग मधुमेह की इस समस्या से ग्रस्त हैं.
ऐसा पाया जाता कि मधुमेह के रोगी मधुमेह के साथ-साथ अन्य कई शारीरिक
बीमारियों, जैसे-मोटापा, डिप्रेशन,
उच्च रक्तचाप, सुनने में समस्या, आर्थोपेडिक जटिलताओं और हृदय संबंधी रोग का शिकार हो जाते हैं. मोटापा
मधुमेह की समस्या का एक बड़ा कारण है। अतिरिक्त चर्बी, इंसुलिन
संवेदनशील कोशिकाओं को प्रभावित करती है साथ ही ये कम इंसुलिन की वजह से
संवेदनशीलता को भी जन्म दे सकता है. ऐसा माना जाता है कि मोटापा, टाइप 2 मधुमेह के खतरे को लगभग 80-85 तक बढ़ा देता है, जबकि हाल के शोध के अनुसार,
मोटापे से ग्रस्त लोगों में लगभग टाइप 2 डायबिटीज
की संभावना उन लोगों से 80 गुना ज्यादा होती है, जिनकी बीएमआई 22 से कम है.
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