रिजर्व बैंक ने दस लाख रुपये तक के आवास ऋण नियमों में ढील दी-(08-MAR-2015) C.A

| Sunday, March 8, 2015
रिजर्व बैंक ने दस लाख रुपये तक के आवास ऋण नियमों में ढील देने कि घोषणा 5 मार्च 2015 को की. भारतीय रिजर्व बैंक ने सस्ती आवासीय परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए आवासीय कर्ज के लिए नियमों में यह ढील दी.
रिजर्व बैंक ने इसके तहत बैंकों को स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क को भी मकान की लागत में शामिल करने की अनुमति दे दी. केंद्रीय बैंक ने इस बारे में एक अधिसूचना जारी की है. इसके अनुसार, ‘इस तरह के कर्जदारों के लिए सस्ते मकानों की उपलब्धता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह फैसला किया गया है. इसके तहत दस लाख रुपये तक की लागत वाले मकान के मामले में बैंक स्टांप ड्यूटी, पंजीकरण और अन्य दस्तावेजी शुल्कों को मकान की कीमत के समक्ष ऋण (एलटीवी) अनुपात की गणना में शामिल किया जा सकता हैं.
वर्तमान प्रक्रिया के तहत बैंक स्टांप ड्यूटी, पंजीकरण अन्य दस्तावेजी शुल्कों को आवासीय संपत्ति की लागत में शामिल नहीं किया जाता हैं.    
रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि यदि आवासीय परियोजना को सरकार, सांविधिक प्राधिकरण ने प्रायोजित किया है उसमें भी बैंक भुगतान के विभिन्न स्तरों के अनुरूप कर्ज वितरित कर सकते हैं. निर्माण के विभिन्न स्तरों के अनुरूप खरीदारों से भुगतान की मांग न भी की गई हो तब भी बैंक कर्ज उपलब्ध करा सकते हैं. 
विदित हो कि किसी मकान की लागत में इन शुल्कों का हिस्सा लगभग 15 प्रतिशत होता है और इससे ऋण लेने वालों पर बोझ पड़ता है.

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