मानव संसाधन विकास
मंत्रालय (MoHRD) ने 9 मार्च 2015
को बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए एक वेब आधारित उपकरण डिजिटल
जेंडर एटलस जारी किया. डिजिटल जेंडर एटलस का स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग
द्वारा अनावरण किया गया.
इस वेब आधारित उपकरण को संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के समर्थन
से विकसित किया गया. इस उपकरण से अनुसूचित जाति, अनुसूचित
जनजाति और मुस्लिम अल्पसंख्यकों लड़कियों की शिक्षा के बारे में आंकडे प्राप्त
करने में मदद मिलेगी.
यह एटलस तीन वर्षों में अलग-अलग लिंग संबंधी संकेतक के तुलनात्मक
विश्लेषण प्रदान करता है, जिससे यह भी पता चल सकेगा कि सरकार की
योजनाएं कितनी लागू हो पाती है और किन इलाकों में और ध्यान देने की जरूरत है. इस
एटलस से सरकार को भविष्य में योजनाएं बनाने, फंड को खर्च
करने की प्राथमिकता तय करने और कार्यक्रमों को लागू करने में भी मदद मिलेगी.
यह राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर उपयोगकर्ता को भौगोलिक और संख्यात्मक डेटा उपलब्ध
कराने हेतु सक्षम बनाता है और प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और
माध्यमिक स्तर पर लड़कियों की शिक्षा के बारे में जानकारी देता है.
भारत में बालिका शिक्षा
भारत ने लड़कियों के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर स्कूल में दाखिले की उच्च दर हासिल की. हालांकि, माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के दाखिले की दर निम्न है.
उच्च प्राथमिक में कुल नामांकन में लड़कियों का प्रतिनिधित्व 48.66 प्रतिशत है, जबकि माध्यमिक स्तर में यह 47.29 प्रतिशत है.
भारत में बालिका शिक्षा
भारत ने लड़कियों के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर स्कूल में दाखिले की उच्च दर हासिल की. हालांकि, माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के दाखिले की दर निम्न है.
उच्च प्राथमिक में कुल नामांकन में लड़कियों का प्रतिनिधित्व 48.66 प्रतिशत है, जबकि माध्यमिक स्तर में यह 47.29 प्रतिशत है.
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