राज्यसभा में मातृत्व लाभ (संशोधन) विधेयक 2016 पारित-(13-AUG-2016) C.A

| Saturday, August 13, 2016
राज्यसभा ने 11 अगस्त 2016 को मातृत्व लाभ संशोधन विधेयक 2016 पारित कर दिया है. विधेयक में कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किये जाने का प्रावधान है ताकि माताएं अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकें.
दो बच्चों के मामलों में यह सुविधा 26 सप्ताह की होगी. इसके बाद यह सुविधा 12 हफ्ते की होगी. साथ ही प्रसूति सुविधाएं किसी ‘‘अधिकृत माता’’ या ‘‘दत्तक माता’’ के लिए भी होंगी जो वे बालक के हस्तगत करने की तारीख से 12 सप्ताह की प्रसूति लाभ की हकदार होंगी.
विधेयक का उद्देश्य है कि कार्यबल और कार्मिक बल में महिलाओं की संख्या बढ़ाई जाए. संशोधनों से 18 लाख महिलाओं को लाभ होगा.
विधेयक में किसी माता को घर से काम करने की सुविधा को सुगम बनाने पर भी जोर दिया गया है. 50 से अधिक कर्मचारी वाले प्रतिष्ठानों के लिए शिशु कक्ष (क्रेच) की व्यवस्था अनिवार्य होगी। माताओं को प्रति दिन चार बार शिशु कक्ष जाने जाने की अनुमति होगी। ऐसी व्यवस्था न करने वाले संगठनों के लिए दंड का प्रावधान भी किया गया है.
इसके अनुसार प्रत्येक प्रतिष्ठान हर महिला को उसकी आरंभिक नियुक्ति के समय कानून के तहत उपलब्ध सुविधाओं के बारे में लिखित या इलेक्ट्रॉनिक रूप से जानकारी देगा.
प्रसूति मां और बच्चों को बेहतर जीवन प्रदान करना एक बहुत ही गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दा है तथा यह विधेयक इस दिशा में काफी मददगार साबित होगा.
मातृत्व अवकाश के बारे में भारत का दुनिया में तीसरा स्थान है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका में 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश दिया जाता है. मेक्सिको में 15 सप्ताह, स्पेन में 16 सप्ताह, फ्रांस में 16 सप्ताह, ब्रिटेन में 20 सप्ताह, नॉर्वे में 44 सप्ताह और कनाडा में 50 सप्ताह का मातृत्व अवकाश दिया जाता है.
उन्होंने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के लिए भी कुछ कदम उठाए जाने की मांग की. इस कानून का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं को जुर्माने के अलावा एक साल तक की सजा का प्रावधान है.

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