दलहन संकट का दीर्घकालिक समाधान करने के लिए केंद्र सरकार ने 12 जुलाई 2016 को मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन की निगरानी के तहत एक उच्च स्तरीय पैनल का गठन किया है ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और बोनस प्रणाली पर पुनर्विचार किया जा सके. इसके अलावा इस साल अच्छी फसल की उम्मीद में बफर स्टॉक की सीमा बढ़ाकर 20 लाख टन करने का फैसला किया गया है. समिति अगले दो हफ्ते में अपनी रिपोर्ट जमा करेगी.
पैनल की कार्रवाई:
भारत में दलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए उपयुक्त नीति तैयार किया जायेगा.
केंद्र ने पहले 1 लाख टन का बफर स्टॉक बनाने की योजना बनाई थी जिसे बाद में बढ़ाकर 8 लाख टन कर दिया गया था.
वर्ष 2016-17 के फसल में दाल का उत्पादन 18 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2 करोड़ टन रह सकता है.ऐसे में बफर स्टॉक की सीमा में भी बढ़ोतरी की जा रही है.
बफर स्टॉक घरेलू खरीद और आयात के जरिये तैयार किया जाएगा.
इसके अलावा आयात पर ज्यादा जोर होगा ताकि स्थानीय बाजार में कोई कमी न रहे.
इस बैठक में आयात के दूसरे विकल्पों को तलाशने का भी फैसला किया गया और आयातकों के लिए भंडार रखने के नियमों में थोड़ी छूट देते हुए इसे माल आने के दिन से 45 दिन कर दिया गया है.
मोजांबिक के बाद केंद्र कनाडा और म्यांमार से भी दालों के आयात के लिए दीर्घावधि के सौदे करने पर विचार कर रही है.
केंद्र सरकार ने पहले से ही वर्ष 2016-17 फसल वर्ष के लिए खरीफ दालों की एमएसपी में बढ़ोतरी की घोषणा की है.
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