टेरेंटुला की नयी प्रजाति का नाम नोबल विजेता गाब्रेल ग्रेशिया मार्क्विस के नाम रखा गया-(08-JUL-2016) C.A

| Friday, July 8, 2016
वैज्ञानिकों ने टेरेंटुला (मकड़ी की प्रजाति) का नाम 1982 के साहित्य में नोबल पुरस्कार विजेता गाब्रेल ग्रेशिया मार्क्विस के नाम पर कानकुआमो मार्क्वेजी रखा. 

यह मकड़ी कैरिबियन कोलम्बिया पहाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में पायी जाती थी. इसका नाम मार्क्विस को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से रखा गया.

इसकी खोज उरुग्वे एवं कोलंबिया के वैज्ञानिकों द्वारा की गयी जिसकी अध्यक्षता कार्लोस पेरेफैन ने की.
कानकुआमो मार्क्वेजी

•    यह मकड़ी अपनी सुरक्षा के लिए जहरीले नुकीले बाल छोड़ती है जो शिकारी की आँख और त्वचा में घुस जाते हैं.

•    इसका आकार दिखने में भयानक लगता है. इसका शरीर तीन सेंटीमीटर लम्बा, तीन सेंटीमीटर लम्बी टांगें तथा कुल मिलकर यह 3.5 इंच के आकार की मकड़ी है.

•    यह पहाड़ी क्षेत्र के 2200 मीटर की ऊंचाई पर पायी गयी. यह अधिकतर वर्षा तथा ठंड वाले क्षेत्र में पाई जाती है.

•    कानकुआमो कोलंबिया क्षेत्र की एक जाति है. यह सियरा नवादा डी सांता मारिया के पूर्वी स्लोप में निवास करती है. 

•    टेरेंटुला प्रजाति की इस मकड़ी की अब तक लगभग 900 मकड़ियों की पहचान की जा चुकी है.

गाब्रेल मार्क्विस

•    वे कोलंबिया के उपन्यासकार, लघु कथा लेखक, पटकथा लेखक एवं पत्रकार थे.

•    उन्हें उपन्यास वन हंड्रेड इयर्स ऑफ़ सॉलीट्यूड के लिए 1982 में नोबल पुरस्कार दिया गया.

•    उनका जन्म 6 मार्च 1927 को कोलम्बिया के उत्तरी तट पर स्थित आराकाटाका में हुआ.

•    उन्हें यथार्थ से जुड़े मुद्दों से सम्बंधित उपन्यास लिखे.

•    उनका निधन 87 वर्ष की आयु में अप्रैल 2014 में मेक्सिको में हुआ.

नयी प्रजातियों एवं जीवों की खोज के संबंध में पत्रिका ज़ूकीज़ में जानकारी प्रकाशित की गयी.

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