सुप्रीम कोर्ट ग्रीन पैनल ने डीज़ल वाहनों पर 20 से 22 प्रतिशत उपकर लगाने की सिफारिश की-(08-JUL-2016) C.A

| Friday, July 8, 2016
पर्यावरण प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) प्राधिकरण ने 5 जुलाई 2016 को डीज़ल वाहनों पर 20-22 प्रतिशत हरित उपकर लगाने की सिफारिश की.

ईपीसीए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किया गया ग्रीन पैनल है जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (एनसीआर) में प्रदूषण से सम्बंधित मामले देखता है.
सिफारिशों की विशेषताएं

•    इन वाहनों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है - 1200 सीसी तक, 2000 सीसी तक एवं 2000 सीसी से ऊपर.

•    1200 सीसी इंजन तक के वाहनों पर वाहन की कीमत का 10 प्रतिशत पर्यावरण मुआवजा प्रभार (ईसीसी) लगाया जायेगा.

•    ईपीसीए द्वारा 1500 सीसी तक के इंजन वाले डीज़ल वाहनों पर ईसीसी का 20 प्रतिशत उपकर लगाये जाने की सिफारिश की गयी.

•    जिन डीज़ल वाहनों में 1500 सीसी से अधिक का इंजन लगा है उसपर 22 प्रतिशत तक उपकर लगाये जाने की सिफारिश की गयी.

•    इसी प्रकार 2000 सीसी से अधिक के इंजन पर 25 प्रतिशत उपकर लगाए जाने की सिफारिश की गयी.

•    प्राधिकरण द्वारा लगाए गये 20 एवं 22 प्रतिशत उपकर की सीमा लगभग 179766 रुपये एवं 215883 रुपये होगी.

टिप्पणी

यदि ईपीसीए की सिफारिशें मान ली जायें तो डीज़ल वाहनों पर लगने वाला सेस एक से दो लाख रुपये होगा. ईपीसीए द्वारा डीज़ल वाहनों पर लगाये गए उपकर का उद्देश्य डीज़ल से होने वाले प्रदूषण हो कम करना है.

समिति द्वारा की गयी सिफारिश अंतिम नहीं मानी जाएगी, इसके अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया जाने वाला निर्णय ही अंतिम होगा.

पृष्ठभूमि

दिसम्बर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने 2000 सीसी से अधिक इंजन वाली गाड़ियों का दिल्ली में पंजीकरण किया जाना प्रतिबंधित कर दिया था. यह प्रतिबन्ध केवल तीन महीने के लिए ही लगाया गया था.

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