न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 30 अप्रैल 2014 को सिंथेटिक क्रोमोसोम तैयार करने की
घोषणा की.
वैज्ञानिकों ने जैविक इंजीनियरिंग के तहत ख़मीर का पहला सिंथेटिक गुणसूत्र (क्रोमोसोम) तैयार किया. शोध में ख़मीर में मौजूद मूल गुणसूत्रों को सिंथेटिक गुणसूत्रों से बदल दिया गया. वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया गुणसूत्र ख़मीर में सफलतापूर्वक काम करने लगा. नए गुणसूत्र को सिन-lll नाम दिया गया है. इसे बनाने में 273,871 डीएनए जोड़ों का इस्तेमाल किया गया है, जो ख़मीर के शरीर के मूल गुणसूत्र में मौजूद 316,667 डीएनए से थोड़ा कम है.
ख़मीर के अंदर आए नए बदलाव का कारण रसायनिक परिवर्तन है, जिससे वैज्ञानिक उसके गुणसूत्रों में हज़ारों तरह की भिन्नता ला सकते हैं, जो जेनिटिक कोड को बदलने में मददगार होगा. ख़मीर के सिंथेटिक गुणसूत्रों की मदद से इसका प्रयोग उपयोगी टीकों और जीव ईंधन को बनाने में किया जा सकेगा.
विदित हो कि ख़मीर में कोशिकाओं का एक केंद्र होता है, जो पौधों और जानवरों से मिलता जुलता है. इसमें 2000 जीन्स होते हैं.
वैज्ञानिकों ने जैविक इंजीनियरिंग के तहत ख़मीर का पहला सिंथेटिक गुणसूत्र (क्रोमोसोम) तैयार किया. शोध में ख़मीर में मौजूद मूल गुणसूत्रों को सिंथेटिक गुणसूत्रों से बदल दिया गया. वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया गुणसूत्र ख़मीर में सफलतापूर्वक काम करने लगा. नए गुणसूत्र को सिन-lll नाम दिया गया है. इसे बनाने में 273,871 डीएनए जोड़ों का इस्तेमाल किया गया है, जो ख़मीर के शरीर के मूल गुणसूत्र में मौजूद 316,667 डीएनए से थोड़ा कम है.
ख़मीर के अंदर आए नए बदलाव का कारण रसायनिक परिवर्तन है, जिससे वैज्ञानिक उसके गुणसूत्रों में हज़ारों तरह की भिन्नता ला सकते हैं, जो जेनिटिक कोड को बदलने में मददगार होगा. ख़मीर के सिंथेटिक गुणसूत्रों की मदद से इसका प्रयोग उपयोगी टीकों और जीव ईंधन को बनाने में किया जा सकेगा.
विदित हो कि ख़मीर में कोशिकाओं का एक केंद्र होता है, जो पौधों और जानवरों से मिलता जुलता है. इसमें 2000 जीन्स होते हैं.
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