एमआईटी के वैज्ञानिकों ने भारतीय गांवों के लिए सस्ती, सौर उर्जा चालित वाटर ट्रीटमेंट प्रणाली विकसित की है. अनुसंधानकर्ताओं ने प्रोटोटाइप प्रणाली की डिजाइन तैयार कर इसका निर्माण और परीक्षण किया.
इनका अगला कदम हैदराबाद के बाहर एक गांव में इसे लागू करना है. भारत के गांवों में किफायती पेयजल और बिजली की कमी है.
एक सर्वे के अनुसार महाराष्ट्र के म्हासावाड़ गांव में हजारों लोग नियमित तौर पर ऐसा पानी पीते हैं जिसमें खारापन का स्तर 1200 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) 600 पीपीएम से नीचे के स्तर की सिफारिश करता है.
एक सर्वे के अनुसार महाराष्ट्र के म्हासावाड़ गांव में हजारों लोग नियमित तौर पर ऐसा पानी पीते हैं जिसमें खारापन का स्तर 1200 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) 600 पीपीएम से नीचे के स्तर की सिफारिश करता है.
मैसेच्यूट जनरल हास्पिटल के कार्डियोलाजिस्ट मौलिक डी. मजूमदार के अनुसार ‘‘ अत्यधिक खारा पानी पीने से व्यक्ति के स्वास्थ्य को अल्पकाल और दीर्घकाल में काफी नुकसान पहुंच सकता है.
किफायती और भारत के गांवों में काम करने लायक एक वाटर ट्रीटमेंट प्रणाली डिजाइन करने के लिए सहायक प्रोफेसर एमोस विंटर और पीएचडी विद्यार्थी नताशा राइट ने निवासियों से सीधे बातचीत कर समस्या को गहराई से समझने का प्रयास किया.
राइट और विंटर के अनुसार किफायती मूल्य पर स्वादपूर्ण और बिना खारापन वाला पानी उपलब्ध करा सकने वाली एक सामुदायिक प्रणाली डिजाइन करने से सभी ग्रामीण निरंतर स्वच्छ और स्वस्थ जल पी सकेंगे.
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