स्थाई मध्यस्थता न्यायालय ने दक्षिण चीन सागर के समुद्री विवाद में फिलीपींस के पक्ष में फैसला सुनाया-(15-JUL-2016) C.A

| Friday, July 15, 2016
12 जुलाई 2016 को हेग स्थित स्थाई मध्यस्थता न्यायालय (पीसीए) ने दक्षिण चीन सागर पर समुद्री विवाद में फिलीपींस के पक्ष में फैसला सुनाया है. न्यायाधिकरण ने कहा कि चीन के पास समुद्र के बड़े हिस्से पर ऐतिहासिक अधिकार का दावा करने का कोई कानूनी आधार नहीं है.

न्यायाधिकरण की जांच और आदेश

• न्यायाधीकरण ने अपने आदेश में कहा है कि चीन के पास उसके नाइन–डैश लाइन, जिसका विस्तार इसके द्वीपीय प्रांत हैनान के दक्षिण और पूर्व में सैंकड़ों मील तक किया जा चुका है और जो विवादित जल का करीब 90  फीसदी हिस्से को कवर करता है, के भीतर संसाधनों का अधिकार नहीं है.

• न्यायाधीकरण ने यह भी पाया कि चीन द्वारा दावा किए जाने वाले किसी भी समुद्री सुविधाओं में विशेष आर्थिक क्षेत्र पैदा करने की क्षमता नहीं है जो इस देश को उस भू– खंड के 200 नौटिकल मीलों के भीतर मछली, तेल और गैस जैसे समुद्री संसाधनों का अधिकार देश को प्रदान करता है.

• यह पाया गया कि वहां द्वीपों की बजाए चट्टानें (reefs) जैसी कम– ज्वार वाले उभार हैं.

• न्यायाधिकरण ने यह पाया कि इलाके में चीन की कुछ गतिविधियां फिलीपींस के संप्रभु अधिकारों का उल्लंघन करते हैं.

• अपने फैसले में न्यायाधिकरण ने यह भी कहा है कि चीन ने मछली पकड़ने और तेल की खोज में दखलअंदाजी कर, कृत्रिम द्वीपों का निर्माण कर और उस क्षेत्र में मछली पकड़ने से चीनी मछुआरों को रोकने में नाकाम रह कर, उन अधिकारों का उल्लंघन किया है.

• न्यायाधिकरण ने पाया कि कृत्रिम द्वीपों के स्थान के आस–पास के प्रवाल (coral) को भी चीन ने बहुत नुकसान पहुंचाया है. साथ ही उसने नाजुक पारिस्थितिकी प्रणालियों के रक्षा के अपने दायित्वों का भी पालन नहीं किया.

• न्यायाधीकरण ने कहा कि यह चीनी और फिलीपींस की सेना के बीच " स्टैंड–ऑफ के विवाद पर विचार करने के लिए क्षेत्राधिकार की कमी है", खासतौर पर सेकेंड थॉमस शोएल पर और कहा कि विवाद पर कोई भी प्रस्ताव " अनिवार्य निपटान से बाहर रखा गया था".

• न्यायाधिकरण ने चीन की स्थिति के समाधान, द्वीपों पर निर्माण कार्य को नष्ट करने या फिलीपींस को किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति करने का आदेश नहीं दिया है.

• चीन के मछुआरों ने चीन की जानकारी में विलुप्तप्राय समुद्री कछुओं और जाइंट काल्म्स (giant clams) का बड़े पैमाने पर शिकार किया. 

फैसले का प्रभाव

• यह फैसला न सिर्फ चीन और फिलीपींस को प्रभावित करेगा बल्कि यह उन देशों को भी प्रभावित करेगा जो समुद्र के बड़े हिस्सों पर अपना दावा कर रहे थे.

• मलेशिया, वियतनाम और इंडोनेशिया ने भी इस क्षेत्र पर चीन की बढ़ती उपस्थिति का हवाला लिया और आगे की कार्रवाई के लिए उसका हौसला बढ़ सकता है.

• हालांकि द हेग में इस संबंध में किया गया फैसला कानूनी बाध्यता के रूप में माना जा रहा है, इसे लागू करने की कोई व्यवस्था नहीं है.

पृष्ठभूमि

• चीन दक्षिण चीन सागर के बड़े हिस्से पर चीन के अधिकार के दावे की वजह से फिलीपींस और चीन के बीच लंबे समय से समुद्री विवाद चला आ रहा है. मनीला इस विवाद को लेकर 2013 में अदालत पहुंचा था.

• इसने तनाव को बढ़ा दिया है क्योंकि चीन कब्जा किए गए हिस्से के बड़े पैमाने पर निकर्षण संचालन कर रहा है. साथ ही उसने रेतीली जमीन को हवाईअड्डों, बंदरगाहों और लाइटहाउसों से सुसज्जित द्वीप बना दिया है.

• इस इलाके पर दावों की ओवरलैपिंग के मामले में किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत के पहली बार दिए जाने वाले फैसले में चीन ने भाग लेने से मना कर दिया था.

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