पाकिस्तान की सेना ने 30 जून 2014
को ऑपरेशन ‘जर्ब-ए-अज्ब’ या ‘पैगंबर की तलवार का वार’ के
दूसरे चरण का आरंभ किया. ऑपरेशन का दूसरा चरण उत्तरी वजीरिस्तान में तालिबानी
आतंकवादियों के खिलाफ जमीनी हमले के रूप में होगा.
जमीनी हमले का आरंभ अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर सुरक्षा को मजबूत बनाने और आतंकवादियों को अफगानिस्तान भागने से रोकने के लिए किया जाएगा.
जमीनी हमले का आरंभ अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर सुरक्षा को मजबूत बनाने और आतंकवादियों को अफगानिस्तान भागने से रोकने के लिए किया जाएगा.
पाकिस्तान की सेना ने 15 जून 2014
को आपरेशन ‘जर्ब-ए-अज्ब’ शुरू किया लेकिन हवाई हमले की अपनी रणनीति को सीमित किया.
उत्तरी वजीरिस्तान में आपरेशन का शुभारंभ 7 जून 2014 को कराची हवाई अड्डे पर आतंकवादी हमले के बाद किया गया जिसमें 10 तालिबान बंदूकधारियों सहित 36 लोग मारे गए थे.
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एक व्यापक क्षेत्रीय सुलह के हिस्से के रूप में संघर्ष विराम कराने के लिए तालिबान आतंकवादियों के साथ बातचीत के कई दौर आयोजित कराए गए.
उत्तरी वजीरिस्तान पाकिस्तानी तालिबान और अन्य आतंकवादी समूहों जैसे हक्कानी नेटवर्क और अल कायदा के नेता अयमान अल जवाहिरी के लिए एक प्रमुख स्थान है.
उत्तरी वजीरिस्तान में आपरेशन का शुभारंभ 7 जून 2014 को कराची हवाई अड्डे पर आतंकवादी हमले के बाद किया गया जिसमें 10 तालिबान बंदूकधारियों सहित 36 लोग मारे गए थे.
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एक व्यापक क्षेत्रीय सुलह के हिस्से के रूप में संघर्ष विराम कराने के लिए तालिबान आतंकवादियों के साथ बातचीत के कई दौर आयोजित कराए गए.
उत्तरी वजीरिस्तान पाकिस्तानी तालिबान और अन्य आतंकवादी समूहों जैसे हक्कानी नेटवर्क और अल कायदा के नेता अयमान अल जवाहिरी के लिए एक प्रमुख स्थान है.
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