क्या गोपाल सुब्रमण्यम प्रकरण ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के मध्य विवाद पैदा किया है?-(03-JULY-2014) C.A

| Thursday, July 3, 2014
गोपाल सुब्रमण्यम प्रकरण ने क्या न्यायपालिका और कार्यपालिका के मध्य पुनः विवाद नहीं पैदा कर दिया है? हाँ, निश्चित तौर पर जिस तरह से यह विवाद सावर्जनिक हुआ है, इससे देश की इन दोनों उच्च संस्थाओं को ऐसे विवादों से बचाना चाहिए और दोनों को अपने- अपने अधिकार क्षेत्र में रहना चाहिए.
भारत के प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढ़ा ने पूर्व सॉलिसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम के प्रकरण पर केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना की. उन्होंने कहा कि गोपाल सुब्रमण्यम को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायधीश नियुक्त करने की कॉलिजियम की सिफारिश को ठुकराना  केंद्र सरकार का एकतरफ़ा फैसला था. इस मामले पर उनसे सहमति नहीं ली गई.
मामला क्या था? 
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश आर.एम. लोढा की अध्यक्षता वाले कॉलेजियमने 14 मई 2014 को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए चार लोगों के नाम की सिफारिश की थी. मानक प्रक्रिया के तौर पर सभी चारों मामलों में सत्यापन किया गया. परन्तु भारत सरकार ने कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण मिश्रा, ओड़ीशा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल और वकील रोहिंटन नरीमन के नामों को स्वीकृति दे दी. लेकिन पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम के नाम को पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम को वापस भेज दिया गया.
 
कॉलेजियम 
कॉलेजियम’ (निर्णायक मंडल) भारतीय सर्वोच्च न्यायालय की एक प्रमुख निर्णायक संस्था है. इसमें मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में सर्वोच्च न्यायालय के पांच वरिष्ठतम न्यायाधीश होते हैं. कॉलेजियम’ (निर्णायक मंडल) के माध्यम से नए न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं अन्य अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों से संबंधित विवाद में निर्णय लिया जाता है.


0 comments:

Post a Comment