अमेरिका स्थित गैर लाभकारी संगठन सोशल प्रोग्रेस
इम्पेरेटिव द्वारा 3 अप्रैल 2014 को
प्रकाशित सामाजिक प्रगति सूचकांक (एसपीआई) में भारत 132 देशों
में 102वें स्थान पर रहा. पहले सामाजिक प्रगति सूचकांक का
प्रकाशन 2013 में हुआ था जिसमें 50 देशों
के लिए सामाजिक प्रगति कि गणना की गयी थी.
वर्ष 2014 का सामाजिक प्रगति सूचकांक समावेशी विकास एवं साझा समृद्धि पर मौजूदा बहस को उल्लेखित करता हैं. एसपीआई 132 देशों को 50 से अधिक संकेतकों जिनमें स्वस्थ्य,स्वच्छता, आवास, व्यक्तिगत सुरक्षा, सूचना तक पहुँच, संधारणीयता, सहिष्णुता व समावेशन एवं शिक्षा तक पहुँच सम्मिलित हैं के आधार पर मूल्यांकन करता हैं.
वर्ष 2014 का सामाजिक प्रगति सूचकांक समावेशी विकास एवं साझा समृद्धि पर मौजूदा बहस को उल्लेखित करता हैं. एसपीआई 132 देशों को 50 से अधिक संकेतकों जिनमें स्वस्थ्य,स्वच्छता, आवास, व्यक्तिगत सुरक्षा, सूचना तक पहुँच, संधारणीयता, सहिष्णुता व समावेशन एवं शिक्षा तक पहुँच सम्मिलित हैं के आधार पर मूल्यांकन करता हैं.
सामाजिक प्रगति सूचकांक के मुख्य अंश:
• शीर्ष पाँच देशों में
न्यूजीलैंड, स्विटजरलैंड, आइसलैंड,
नीदरलैंड्स और नॉर्वे हैं. ये देश जो की अपेक्षाकृत कम जनसंख्या
वाले देश हैं, ने सूचकांक के सभी आयामों में अच्छा प्रदर्शन
किया हैं.
• सूडान (128 वां), गिनी (129 वां), बुरुंडी (130 वां), मध्य
अफ्रीकी गणराज्य (131 वां) और चाड (132 वां) सूची में सबसे निचले पायदान पर हैं.
• ब्रिक्स देशों
(ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) का सामाजिक प्रगति संकेतकों पर
प्रदर्शन मिली जुली प्रकृति का हैं यद्यपि इन देशों को विकास क्षमता वाली
अर्थव्यवस्थाओं के रूप में देखा जाता है.
• ब्रिक्स समूह में केवल
ब्राजील (46 वां) सामाजिक प्रगति में अच्छा प्रदर्शन करता
हैं जबकि प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में इसका 57 वां
स्थान हैं. रूस का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में स्थान (39 वां) उच्च हैं लेकिन सामाजिक प्रगति सूचकांक (80 वां)
में काफी निचले पायदान पर हैं. दक्षिण अफ्रीका का सामाजिक प्रगति में 69 वां, एवं सकल घरेलू उत्पाद में 58 वां स्थान हैं. चीन सामाजिक प्रगति व सकल घरेलू उत्पाद में क्रमशः 90
वां व 69 वां व स्थान रखता हैं. भारत का प्रति
व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में जहाँ 94 वां स्थान हैं वही
सामाजिक प्रगति सूचकांक में यह 102 वें पायदान पर हैं.
• दक्षिण एशियाई क्षेत्र
में आरोही क्रम में पाकिस्तान (124), भारत (102), नेपाल (101), बांग्लादेश (99) और
श्रीलंका (87) स्थान पर हैं.
श्रीलंका के अतिरिक्त दक्षिण एशियाई क्षेत्र के सभी देश पांचवे स्तर (निम्न सकल
घरेलू उत्पाद के साथ निम्न सामाजिक प्रगति सूचकांक) में आते हैं.
• अकेले आर्थिक विकास ही
सामाजिक प्रगति के परिणामों की व्याख्या करने के लिए पर्याप्त नहीं है. प्रति
व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद देश के समग्र प्रदर्शन को मापने का अपूर्ण उपाय हैं.
• उच्च आय वाले देशों
में सामाजिक विकास कि प्रवृत्ति उच्च पायी जाती हैं. न्यूजीलैंड (प्रति व्यक्ति 25,857
$ जीडीपी) सामाजिक विकास में उच्चतम एवं चाड (प्रति व्यक्ति 1,870
$ जीडीपी) निम्नतम स्थान पर है.
• सामाजिक प्रगति
सूचकांक एवं प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में अरैखिक संबंध हैं. आर्थिक विकास
एवं सामाजिक प्रगति के मध्य संबंध आय में वृद्धि के साथ परिवर्तित होता हैं. निम्न
आय स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद में कम अंतराल सामाजिक प्रगति में बड़े अंतराल से
संबंधित हैं.
• सामाजिक प्रगति
सूचकांक के मान प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद की प्रवृत्ति रेखा से अर्थपूर्ण
विचलन प्रदर्शित करते हैं. उदाहरण के लिए न्यूजीलैंड जो की सामाजिक प्रगति में
सर्वोच्च स्थान रखता हैं लेकिन उसकी प्रति व्यक्ति सकल घरेलू आय 25 वें स्थान पर हैं ठीक ऐसे ही चाड जो कि सामाजिक प्रगति में निम्नतम स्थान
प्राप्त देश हैं विश्व के सबसे गरीब देश से बहुत दूर हैं (प्रति व्यक्ति सकल घरेलू
आय के आधार पर 109 वें स्थान पर हैं.)
• यदि सामान्यीकरण किया
जाये तो संसाधन संपन्न देश जैसे सऊदी अरब, कुवैत, और अंगोला अपने प्रति व्यक्ति सकल घरेलू आय के स्तर के अनुरूप सामाजिक
प्रगति प्रदर्शित नहीं करते हैं.
सूचकांक के विभिन्न
आयामों पर भारत का प्रदर्शन
सामाजिक प्रगति सूचकांक (एसपीआई) में भारत 132
देशों में 102 वें स्थान पर रहा हैं. पोषण एवं
मूलभूत चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में भारत का प्रदर्शन अच्छा हैं. भारत के लिए
सामाजिक प्रगति सूचकांक का समग्र मान 50.24 हैं.
आधारभूत मानवीय आवश्यकता
आयाम- भारत ने पोषण और बुनियादी चिकित्सा
देखभाल जैसे क्षेत्रों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया हैं एवं आश्रय पर अधिक ध्यान
केंद्रित करके मानवीय सुख में और अधिक वृद्धि की जा सकती हैं. भारत ने सूचकांक के
इस आयाम में 54.48 मान के साथ 100 वां
स्थान प्राप्त किया हैं.
कल्याण के मूलाधार आयाम- भारत ने जीवन के मूलभूत
अंग जैसे आधारभूत ज्ञान तक लोगों की पहुँच बढ़ाने हेतु उत्कृष्ट प्रयास किये हैं.
भारत ने 56.84 मान के साथ 108 वां स्थान प्राप्त किया हैं.
अवसर आयाम - भारत ने लोगों को समाज में उनकी स्थिति में सुधार करने के लिए अवसर उपलब्ध कराने में बहुत अच्छा कार्य किया हैं साथ ही निजी स्वतंत्रता एवं चयन आयाम में उच्च मान प्राप्त किया हैं. भारत ने इसमें 39.39 अंक के साथ 109 वां रैंक हासिल की हैं.
अवसर आयाम - भारत ने लोगों को समाज में उनकी स्थिति में सुधार करने के लिए अवसर उपलब्ध कराने में बहुत अच्छा कार्य किया हैं साथ ही निजी स्वतंत्रता एवं चयन आयाम में उच्च मान प्राप्त किया हैं. भारत ने इसमें 39.39 अंक के साथ 109 वां रैंक हासिल की हैं.
सामाजिक प्रगति सूचकांक
क्या है?
यह सूचकांक अमर्त्य सेन, डगलस
नॉर्थ और जोसफ स्टिगलिट्ज़ के लेखन पर आधारित है और यह 54 विभिन्न
सामाजिक और पर्यावरण संकेतकों का एक समग्र सूचकांक है, जो की
सामाजिक प्रगति के तीन आयामों: आधारभूत मानवीय आवश्यकता, कल्याण
के मूलाधार एवं अवसर को अभिग्रहित करता हैं. यह सूचकांक सफलता के परिणामों को
देखकर सामाजिक प्रगति का मापन करता हैं न की ये ये देखकर कि देश द्वारा कितना
प्रयास किया गया हैं.
सामाजिक प्रगति सूचकांक
तीन कारकों पर आधारित है:-
1. आधारभूत मानवीय आवश्यकताएँ: (क) पोषण
और बुनियादी चिकित्सा देखभाल (ख) जल और स्वच्छता (ग) आश्रय और (घ) व्यक्तिगत
सुरक्षा.
2. कल्याण के मूलाधार: (क)
आधारभूत ज्ञान तक पहुँच (ख) सूचना एवं संचार तक पहुँच (ग) स्वास्थ्य और कल्याण एवं
(घ) पारिस्थितिकी तंत्र संधारणीयता.
3. अवसर: (क) व्यक्तिगत अधिकार (ख) व्यक्तिगत स्वतंत्रता और चयन (ग) सहिष्णुता और
समावेशन (घ) उन्नत शिक्षा तक पहुँच.
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