इंडियन लॉ इंस्टिट्यूट (आईएलआई) के प्रोफेसर एस सिवाकुमार को सितंबर 2016 के अंतिम सप्ताह में 21वें विधि आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया.
इससे पहले राजकोट आधारित वकील अभय भारद्वाज को 21वें विधि आयोग का अंशकालिक सदस्य नियुक्त किया गया था. अभय ने 2002 के गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में आरोपी का प्रतिनिधित्व किया था.
मार्च 2016 में सुप्रीम कोर्ट के जज बलबीर सिंह चौहान को विधि आयोग का नया निदेशक चयनित किया गया.
गुजरात उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश रवि आर त्रिपाठी को भी आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया.
जून 2016 में गुजरात लॉ यूनिवर्सिटी के निदेशक बिमल पटेल को भी अंशकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया.
इससे पहले राजकोट आधारित वकील अभय भारद्वाज को 21वें विधि आयोग का अंशकालिक सदस्य नियुक्त किया गया था. अभय ने 2002 के गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में आरोपी का प्रतिनिधित्व किया था.
मार्च 2016 में सुप्रीम कोर्ट के जज बलबीर सिंह चौहान को विधि आयोग का नया निदेशक चयनित किया गया.
गुजरात उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश रवि आर त्रिपाठी को भी आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया.
जून 2016 में गुजरात लॉ यूनिवर्सिटी के निदेशक बिमल पटेल को भी अंशकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया.
भारतीय विधि आयोग
• भारतीय विधि आयोग एक कार्यकारी संगठन है जिसे भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया है.
• इसका प्रमुख काम कानूनी सुधारों हेतु कार्य करना है.
• इसकी सदस्यता में मुख्य रूप से कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं.
• यह एक निश्चित अवधि के लिए तैयार किया जाता है तथा यह विधि एवं न्याय मंत्रालय के अधीन कार्य करता है.
• 21वां विधि आयोग 1 सितंबर 2015 से अगले तीन वर्षों तक गठित किया गया है.
• आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त 2015 तक होगा, वर्तमान आयोग ने अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी है.
• 1955 से अब तक 262 रिपोर्ट पेश की जा चुकी हैं.
• 31 अगस्त 2016 को पूर्व अध्यक्ष ए पी शाह द्वारा अंतिम रिपोर्ट पेश की गयी.
• भारतीय विधि आयोग एक कार्यकारी संगठन है जिसे भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया है.
• इसका प्रमुख काम कानूनी सुधारों हेतु कार्य करना है.
• इसकी सदस्यता में मुख्य रूप से कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं.
• यह एक निश्चित अवधि के लिए तैयार किया जाता है तथा यह विधि एवं न्याय मंत्रालय के अधीन कार्य करता है.
• 21वां विधि आयोग 1 सितंबर 2015 से अगले तीन वर्षों तक गठित किया गया है.
• आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त 2015 तक होगा, वर्तमान आयोग ने अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी है.
• 1955 से अब तक 262 रिपोर्ट पेश की जा चुकी हैं.
• 31 अगस्त 2016 को पूर्व अध्यक्ष ए पी शाह द्वारा अंतिम रिपोर्ट पेश की गयी.
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