केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच अक्तूबर 2016 को ‘एचआईवी एवं एड्स विधेयक, 2014’ को मंजूरी दे दी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा के अनुसार विधेयक में राज्य और केंद्र सरकार एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (एआरटी) प्रदान करना अनिवार्य बनाया गया है.
एचआईवी एवं एड्स विधेयक, 2014 के तहत एचआईवी आौर एड्स से पीड़ित मरीजों के साथ भेदभाव करने वाले व्यक्ति को अपराधी मानकर उसके खिलाफ अधिकतम दो साल की जेल और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है.
सरकार ने इस संबंध में कानून में संशोधनों को मंजूरी दे दी. मसौदा कानून के माध्यम से ऐसे लोगों के साथ भेदभाव करने वालों के विरुद्ध शिकायतों की जांच हेतु एक औपचारिक तंत्र स्थापित करने और कानूनी जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रावधान करके एड्स मरीजों और एचआईवी विषाणु से संक्रमित लोगों के हितों की रक्षा करने की कोशिश की है.
‘एचआईवी एवं एड्स विधेयक, 2014’ अधिनियम के तहत इस तरह के मरीजों के साथ भेदभाव करने वालों को न्यूनतम तीन महीने और अधिकतम दो साल के कारावास की सजा का प्रावधान है.
‘एचआईवी एवं एड्स विधेयक, 2014’ अधिनियम के तहत इस तरह के मरीजों के साथ भेदभाव करने वालों को न्यूनतम तीन महीने और अधिकतम दो साल के कारावास की सजा का प्रावधान है.
एचआईवी एवं एड्स विधेयक, 2014 के बारे में-
- विधेयक में भेदभाव के तरीकों को भी सूचीबद्ध किया गया है.
- विधेयक में भेदभाव के तरीकों को प्रतिबंधित भी किया गया है.
- भेदभाव के तरीकों में रोजगार, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं, निवास के लिए या किराए पर दी गई संपत्तियों समेत अन्य के संबंध में अस्वीकृति, समाप्ति या अनुचित व्यवहार शामिल है.
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