भारतीय रिज़र्व बैंक ने हाल ही में नीतिगत दरों में अर्थात रेपो रेट में 0.25 फ़ीसदी की कटौती करने की घोषणा की. हालांकि 0.25 फीसदी की कटौती के बाद रेपो रेट 6.5 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी हो गया है.
हाल ही में गठित 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने पहली बार मौद्रिक नीति समीक्षा प्रस्तुत की. मौद्रिक नीति तैयार करने में अभी तक भारतीय रिज़र्व बैंक गवर्नर की ही पूरी भूमिका होती थी. लेकिन अब भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति ने यह काम करना शुरू कर दिया है.
उर्जित पटेल ने भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर नियुक्त होने के बाद उनकी ये पहली क्रेडिट पॉलिसी है. मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 6-7 दिसंबर को होगी.
इससे संबंधित मुख्य तथ्य:
• रेपो रेट में कटौती से अब बैंकों को आरबीआई से सस्ता कर्ज़ मिल सकेगा और बैंक उसका फायदा ग्राहकों को भी देगा.
• अब रिवर्स रेपो रेट 6 फ़ीसदी से घटकर 5.75 फीसदी के स्तर पर आ गया है. रिवर्स रेपो रेट पर ही बैंक अपना पैसा भारतीय रिज़र्व बैंक के पास रखते हैं.
• भारतीय रिज़र्व बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) 4 फीसदी ही रखा है.
• सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर): 20.75 प्रतिशत हैं.
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