सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सुरक्षित सड़क यातायात को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली की शुभारंभ की.
भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली देश में सभी पुलों की एक सूची बना सकते है जिससे पुल की गंभीर हालत के आधार पर मरम्मत का काम किया जा सकता है.
पुलों की खराब हालत से परिवहन पर बहुत खराब असर पड़ता है और अनेक बार दुर्घटनाओं में जीवन का नुकसान होता है.
भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली का उद्देश्य:
• भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली का उद्देश्य देश में सभी पुलों का डाटाबेस तैयार करना है.
• वे सभी पुलों की विस्तृत ब्योरा देना है ताकि पुलों की समय पर मरम्मत की जा सके और नया पुल बनाया जा सके.
यह कैसे काम करेगा?
• इनवेंटरी बनाते समय प्रत्येक पुल को अनूठी पहचान संख्या या राष्ट्रीय पहचान संख्या दी जाती है.
• जीपीएस के माध्यम से अक्षांश, देशांतर के संदर्भ में पुल के वास्तविक स्थान का पता किया जाता है और इसी के अधार पर पुल स्थान संख्या दी जाती है.
• मेटेरियल,डिजाइन,पुल के प्रकार, पुल की आयु, लोडिंग, यातायात लेन,लम्बाई, चौड़ाई संबंधी जानकारिया एकत्रित की जाती है और इनका इस्तेमाल करके पुल वर्गीकरण संख्या दी जाती है.
• पुलों को ढांचागत रेटिंग संख्या भी दी जाती है. यह संख्या शून्य के 9 के स्केल पर प्रत्येक पुल को दी जाती है.
• यह रेटिंग पुल के ढांचे से संबंधित घटकों पर विचार करने के बाद दी जाती है.
• सूची के आधार पर आईबीएम डाटा का विश्लेषण करेगा और उन पुलों की पहचान करेगा जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है.
• पुल की संचालन उपलब्धता में सुधार, अवधि में वृद्धि तथा मरम्मत कार्य को प्राथमिकता देने के लिए निरीक्षण कार्य किया जाएगा.
• डाटा से यह निर्णय लेने में मदद मिलेगी कि किस पुल की स्थिति कितनी गंभीर हैं और किसे फिर से बनाने की जरूरत है.
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