दीमक की नयी प्रजाति ग्लेप्टोटरमेस चिराहरिताए की केरल स्थित मालाबार वन्यजीव अभ्यारण्य में खोज की गयी.
इस प्रजाति का नाम पश्चिमी घाट के उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों पर रखा गया. यह वन क्षेत्र मालाबार वन्यजीव अभ्यारण्य में स्थित हैं.
नयी प्रजाति के बारे में जानकारी देने वाले शोधपत्र को हाल ही में पेरिस स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम में प्रकाशित किया गया.
इस प्रजाति का नाम पश्चिमी घाट के उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों पर रखा गया. यह वन क्षेत्र मालाबार वन्यजीव अभ्यारण्य में स्थित हैं.
नयी प्रजाति के बारे में जानकारी देने वाले शोधपत्र को हाल ही में पेरिस स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम में प्रकाशित किया गया.
नयी प्रजाति की खोज
• दीमक तीन प्रकार के होते हैं: नम लकड़ी वाले, सूखी लकड़ी वाले तथा भूमिगत दीमक. ग्लेप्टोटरमेस चिराहरिताए नम लकड़ी वाला दीमक है.
• यह उस लकड़ी में प्रवेश करता है जो अत्यधिक नम होती है अथवा नमी से सड़ चुकी होती है.
• यह पूरी तरह लकड़ी में ही रहते हैं तथा मृदा से किसी तरह संपर्क नहीं करते.
• इस प्रजाति में एक व्यस्क दीमक की लम्बाई लगभग 10 एमएम तक होती है जबकि छोटे दीमक 9.5 एमएम तक होते हैं.
• यह अधिकतर आम, साल, सिल्वर ओक, जामुन तथा बरगद के पेड़ों में पाए जाते हैं.
• भारत में दीमक की 285 प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें 61 केरल में पायी जाती हैं.
• दीमक तीन प्रकार के होते हैं: नम लकड़ी वाले, सूखी लकड़ी वाले तथा भूमिगत दीमक. ग्लेप्टोटरमेस चिराहरिताए नम लकड़ी वाला दीमक है.
• यह उस लकड़ी में प्रवेश करता है जो अत्यधिक नम होती है अथवा नमी से सड़ चुकी होती है.
• यह पूरी तरह लकड़ी में ही रहते हैं तथा मृदा से किसी तरह संपर्क नहीं करते.
• इस प्रजाति में एक व्यस्क दीमक की लम्बाई लगभग 10 एमएम तक होती है जबकि छोटे दीमक 9.5 एमएम तक होते हैं.
• यह अधिकतर आम, साल, सिल्वर ओक, जामुन तथा बरगद के पेड़ों में पाए जाते हैं.
• भारत में दीमक की 285 प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें 61 केरल में पायी जाती हैं.
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