केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्यम मंत्री कलराज मिश्र ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 5 जुलाई 2016 को विश्व के सबसे बड़े चरखे का लोकार्पण किया. विश्व के सबसे बड़े चरखे के प्रदर्शन का उद्देश्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दिखाए समतावादी समाज को बढ़ावा देने के भारत की खोज पर प्रकाश डालना है.
चरखा आज भी स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और परस्पर निर्भरता का प्रतिनिधित्व करता है क्योंकि पहिया कपास उत्पादकों के नेटवर्क, कैडरों, बुनकरों वितरकों और उपयोगकर्ताओं के केन्द्र में है.
प्रतिष्ठित चरखे को प्रस्थान प्रांगण में स्थापित किया गया है जिससे हमारी समृद्ध संस्कृति को विभिन्न कला कार्यों के जरिये प्रोत्साहन मिलता रहेगा.
टर्मिनल पर लगाए गए मुद्रा, राजसी जूलूस, हाथी प्रतिमाएं, सूर्य मूर्तिकला, सूर्य-नमस्कार और अन्य कलाचित्र विश्व-स्तर पर भारतीय विरासत का वर्णन करते हैं.
चरखे की विशेषताएं
• यह 4 टन भारी बर्मा सागवान की लकड़ी से बनाया गया है.
• इस चरखे के जीवन काल का अनुमान 50 वर्ष से अधिक लगाया गया है.
• यह 9 फीट चौड़ा, 17 फीट ऊंचा और 30 फीट लंबा है.
• इसे अहमदाबाद के उच्च दक्षता वाले 42 बढ़इयों के एक दल द्वारा 55 दिनों में बनाया गया.
• यह 4 टन भारी बर्मा सागवान की लकड़ी से बनाया गया है.
• इस चरखे के जीवन काल का अनुमान 50 वर्ष से अधिक लगाया गया है.
• यह 9 फीट चौड़ा, 17 फीट ऊंचा और 30 फीट लंबा है.
• इसे अहमदाबाद के उच्च दक्षता वाले 42 बढ़इयों के एक दल द्वारा 55 दिनों में बनाया गया.
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