आइसलैंड के वैज्ञानिकों ने कार्बफिक्स परियोजना के तहत co2 के संचयन की तकनीक की खोज की-(16-JUNE-2016) C.A

| Thursday, June 16, 2016
आइसलैंड के वैज्ञानिकों ने कार्बफिक्स परियोजना के तहत ग्रीन हाउस गैस के संचयन की तकनीक विकसित की है. इस तकनीक के जरिये गहरी भूमि में चट्टान बनाकर इस गैस को संचित करने का कार्य किया जा सकता है. 

यह तकनीक कार्बन डाईऑक्साइड को पृथक करने और ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने का सुरक्षित और सरल तरीका प्रदान करेगा तथा इसकी पहचान जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने वाले एक संभावित महत्वपूर्ण कारक के रूप में की गयी है.
शीघ्र कर्बोनेशन का यह तरीका स्थायी रूप से रिसाव के बिना कार्बनडाईऑक्साइड के भुमिगत संचयन का व्यावहारिक तरीका हो सकता है. 

यह शोध साइंस नामक जर्नल में 10 जून 2016 को प्रकाशित हुआ था. 

शोध के निष्कर्ष 

कोलंबिया विश्वविद्यालय के लैमोंट-डोहर्टी पृथ्वी वेधशाला और अन्य संस्थान के वैज्ञानिकों ने कार्बफिक्स परियोजना के एक पायलट कार्यक्रम के तहत इस तकनीक की खोज की. 

इसका शुभारम्भ 2012 में आइसलैंड के हेलिसेडी बिजली संयंत्र में किया गया था.

वैज्ञानिकों ने सतह के नीचे 400-800 मीटर के मध्य बेसाल्ट के परतों में 220 टन कार्बनडाई ऑक्साईड रखा. कार्बोनिक एसिड से प्रतिक्रिया के लिए वैज्ञानिकों ने इसमें अतिरिक्त जल का भी मिश्रण किया.
प्रतिक्रिया स्वरुप शीघ्र ही नए कार्बोनिक मिनरल्स का निर्माण हुआ जो सक्रिय रूप में सदा के लिए गैस के चारो तरफ आवरण बना इसे इकट्ठा कर लेता है.

दो वर्षों के अंतर्गत बेसाल्ट के अन्दर रखे गये कार्बन का 95 % हिस्से  पत्थर के रूप में जम चुके थे.
इस प्रक्रिया के तहत 1 टन co2  के लिए 25 टन जल की आवश्यकता होगी जो विश्व के कुछ हिस्सों के लिए उत्पादन की इस प्रक्रिया में मुख्य बाधा है.

कार्बन पृथकीकरण (कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन) 

इसके अंतर्गत वातावरण से या फिर मानवजनित स्थिर श्रोतों से उर्जा संयंत्रों की तरह बड़े पैमाने पर co2 को रखा जाता है.

इसे लम्बी अवधि तक स्टोर करके रखा जाता है.

कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन के दो प्रचलित तरीके हैं -

टेरेस्ट्रियल सिक्वेस्ट्रेशन-

इसके अंतर्गत पौधों का इस्तेमाल कर वातावरण से co2 को इकट्ठा किया जाता है और इसे कार्बन के रूप में पौधों की तना,जड़ और मिटटी में संचित किया जाता है.

जियोलोजिक सिक्वेस्ट्रेशन-

इसके अंतर्गत co2 को लम्बी अवधि तक गहरी भूमिगत भूगर्भिक क्षेत्रों में इकठ्ठा करके रखा जाता है.

विश्व के अनेक परियोजनाओं ने बिजली संयत्रों से कार्बन उत्सर्जन को रोकने के माध्यम के रूप में कार्बन कैप्चर और स्टोरेज प्रक्रिया के परीक्षण की मांग की है .

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