आयुष-82 के लिए एनआरडीसी ने 10 जून 2016 को प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण समझौते पर हस्ताक्षर किये. इस लाइसेंस समझौते पर राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम, नई दिल्ली के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एच. पुरुषोत्तम और चतुर्भुज फार्मास्युटिकल कंपनी, हरिद्वार की ओर से कंपनी के मालिक मुरारी शर्मा ने हस्ताक्षर किये.
राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग का एक उपक्रम है.
एनआरडीसी ने मैसर्स चतुर्भुज फार्मास्युटिकल कंपनी, हरिद्वार के साथ मधुमेह के प्रबंधन के लिए एक आयुर्वेदिक फॉर्म्यूलेशन आयुष-82 के व्यावसायीकरण के लिए लाइसेंस अनुबंध किया है.
आयुष-82 को केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), नई दिल्ली ने विकसित किया था जो आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध) मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है.
राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम ने अभी तक सीसीआरएएस द्वारा विकसित 13 आयुर्वेदिक प्रौद्योगिकियों के लाइसेंस भारत में 33 से अधिक कंपनियों को दिए हैं.
आयुष-82 से संबंधित मुख्य तथ्य:
• आयुष-82, सीसीआरएएस द्वारा विकसित एक मधुमेह रोकने वाली दवा है और यह ज्ञात और विकसित परीक्षण की गई हाइपोग्लिसेमिक दवाओं का संयोजन है.
• बड़े पैमाने पर इसके नैदानिक अध्ययन किये गये हैं.
• डाइबटिज मेलिट्स चयापचय रोगों का एक समूह है जिसमें बहुत अधिक रक्त ग्लूकोज होता है जिसके कारण इंसुलिन के उत्पादन, इंसुलिन के कार्य या दोनों में विकार आ जाता है.
• मधुमेह कई अंग प्रणालियों में गंभीर जटिलताओं को बढ़ावा दे सकता है.
• इस सस्ती और प्रभावी दवा से मधुमेह से पीड़ित लाखों लोगों को राहत मिलेगी.
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